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मानवता 

वह बस में बैठी हुई उसके चलने का इंतजार कर रही थी। तभी किसी वाहन की टक्कर लगने से बाइक पर सवार दंपती सड़क पर धड़ाम से जा गिरे। चोट गहरी थी लिहाजा दोनों खून से लथपथ तड़पने लगे। यह दृश्य देख उसकी चीख निकल गई। तभी उसने देखा कि तमाशबीनों की भीड़ के बीच […]

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ताजी हवा का झोंका

पांखी की पन्द्रह वर्ष पुरानी सहेली विदेश से भारत लौटी तो उसी के घर आयी। अपनी खूबसूरत और अमीर सखी के आगमन पर पांखी का कॉलर थोड़ा ऊंचा हुआ और उसने खुलकर स्वागत किया अपनी माडर्न सहेली का। सुधीर को पहले तो अजीब सा लगा पर जब आमने-सामने मुलाकात हुई पांखी की सखी से, तो वह […]

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मृगतृष्णा का दंश – गृहलक्ष्मी कहानियां

वो पेट की भूख, जल्दी और ज्यादा कमाई का लालच ही था जो देवू और बीरू ने चोरी के भुट्टे बेचने का धंधा करने की सोची। उन्हें ये नहीं पता था कि यह लालच आने वाले समय में उन्हें कैसा समय दिखाने वाला है।

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गरीबी का उपहास

राधिका बी.पी.एल.कार्ड बनाने वाले इंस्पेक्टर के सामने गिड़गिड़ा रही थी, बार-बार उनके पैर पकड कर कह रही थी ‘‘बड़े साहब हम बहुत गरीब है हमार उ कारड बनाये देत जे पे सस्ता सामान मिलत है, अरे गरीबी वाला कारड हम जिनगी भर तोहार उपकार मानव …….।  इन्सपेक्टर लगा था ‘‘अरे वो कार्ड तो गरीबों का […]

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पीला गुलाब

मैं दिल ही दिल उससे नफरत करती हूं, मैं नहीं चाहती कि वह अच्छे नंबरों से पास हो एवं सबकी प्रशंसा की पात्र बने, इसीलिए मैंने उसका नाम भी एक साधारण से स्कूल में लिखवाया है, जबकि मेरी बेटी कान्वेंट में पढ़ रही है।

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सपनों की उड़ान – गृहलक्ष्मी कहानियां

बचपन से एक सपना था, आईआईटी में एडमिशन लेने का, एक विश्वास कि- हां! कुछ करना है। इस विश्वास ने कब जुनून का रूप ले लिया, इसका मुझे खुद भी पता नहीं चला।

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नम्मो की शादी – गृहलक्ष्मी कहानियां

जब भी मैं नम्रता की कहानी सुनाना चाहता हूं, कलेजा मुंह को आ जाता है यह भी समझ नहीं आता कि कहां से शुरू करूं पता नहीं वह ऊपर वाला ऐसी निष्ठुर कहानियां रचता कैसे है। क्या पत्थर का दिल है उसका ! आज मैंने मन कड़ा करके यह निश्चय कर लिया है कि आपको नम्मो की कथा सुनाकर ही रहूंगा।

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : अंतर्द्वंद

आज सुबह से ही विभा का दिल बहुत बेचैन था। रह रह कर उसे कुछ अनजाना सा भय सता रहा था। जैसे तैसे करके उसने अपना सारा काम निपटाया और छुट्टी का समय होते ही घर के लिए निकलने की तैयारी करने लगी।

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पवित्र रिश्ता

अमरीन को बहन मानने वाला कृष्णमोहन रक्षाबंधन के दिन राखी बंधवाने अमरीन के पास पहुंचा, लेकिन धर्म के लिए अंधे लोगों ने उसके साथ क्या किया, धर्म की आंधी में भावनाओं को दबा देने वाली कहानी…

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