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‘गर साथ तुम्हारा मिल जाता’ – गृहलक्ष्मी कविता

रुई के फाहे से गिरते हिम के टुकड़े, मेरे मन को करते विह्वल आंखो से बहते निर्झर, बन के पानी ये पिघल-पिघल बिसरी यादों की कुछ कड़ियां, जो लिपटी हुई मेरे कल से वापस उनको फिर मैं पाता, गर साथ तुम्हारा मिल जाता उगते सूरज की स्वर्ण किरण सी, यादें  तेरी मन में छा जातीं […]

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नारी – गृहलक्ष्मी कविता

किसी किताब के पन्नों में लिखा था नारी को देवी का रूप कहा था पर आज नारी को कोई देवी  नहीं मानता उसे खुलेआम बदनाम करने से कोई नहीं चुकता पुराणों में जहां नारी की शक्ति  को दर्शाया आज वहां नारी को समझ कोई  नहीं पाया। जिस देश में नारियों को देवी के रूप में […]

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दिन और रात उनके दर्शन करते हैं

जब मैं सात-आठ साल की थी तो मैं अपनी नानी जी के घर रहने के लिए गई थी। वहां पर हम सभी बैठे बातें कर रहे थे तो वैष्णों देवी की बातें होने लगीं और मेरे मामा-मामी जी ने बताया कि जब वे लोग वैष्णों देवी की यात्रा पर गए थे तो उन्होंने लगभग रात […]

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रिवाज या लालच – गृहलक्ष्मी कहानियां

हैलो समधन जी! कैसी हैं आप? मैंने सोचा कि आपको याद दिला दूं कि शिखा की गोद भराई आने वाली है| सब तैयारी हो गई है ना? देखना हमारा सबके सामने तमाशा ना बने” शिखा की सास लता जी ने फोन पर कहा।

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जब चीटों ने दिखाया रास्ता

मैं बचपन से ही बेहद नटखट थी व खाने की बेहद शौकीन। एक दिन पिताजी आए, उनके हाथों में कई पैकेट व एक हाथ में बड़ा सा बर्तन था। पिताजी ने माताजी को निर्देश दिए कि ये मिठाइयां व रसगुल्ले वे ननकू हलवाई के यहां से लाए हैं, जो देसी घी की स्वादिष्ट मिठाइयां बनाता […]

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सिनेमा घर का चक्कर

जब मैं छोटा बच्चा था तो बेहद नटखट था। मेरी माताजी की, उनकी सास यानी मेरी दादी से आए दिन खट-पट होती ही रहती थी और माताजी को मनाने के लिए हमारे पिताजी पास के ही सिनेमाघर में माताजी को ले जाते थे, मेरा भी बहुत मन होता था कि मैं भी जाकर देखूं वहां होता क्या है।

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हमें भी सम्मानित करो – गृहलक्ष्मी कहानियां

कोरोना कब जाएगा ये तो चीन को भी नहीं पता परंतु कोरोना कैरियर्ज से ज्यादा कोरोना वारियर्ज की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

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संबंधों के समीकरण – गृहलक्ष्मी कहानियां

शुचिता से मिलने के बाद जाते हुए जब दीप ने अपना फैसला सुनाया तो उसे सुनकर न केवल शुचिता के मम्मी पापा चौंक गए बल्कि खुद दीप के मम्मी पापा को अपने बेटे के इस अप्रत्याशित फैसले से हैरानी हो रही थी ।

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बरसेगा सावन – गृहलक्ष्मी कहानियां

प्रतीक के गाने की रिकॉर्डिंग चल ही रही थी कि एक अप्रत्याशित दुखद समाचार ने पूरे स्टूडियो को हिला दिया। राघव सर के पिताजी ह्रदयाघात से चल बसे थे. प्रतीक तुरंत राघव सर के संग उनके बंगले की ओर रवाना हो गया। उनके पहुँचने तक अंदर बाहर मास्क लगाए लोग जमा हो चुके थे। माना कोरोनाकाल था लेकिन फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध संगीतकार के पिता का निधन हुआ था।

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गुरुओं की फसल – गृहलक्ष्मी कहानियां

आजकल गुरुओं की गुरुघंटाली की चर्चा आए दिन सुनने को मिल जाती है। चलिए, कुछ ऐसे ही भांति-भांति के गुरुओं के प्रमुख प्रकारों के बारे में जानें।

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