Life Poem: वक्त का आंधी किस कदर चल रहा है,दूरियां बढ़ाने पर कितना पुरजोर हो रहा है..टूटते बिखरते रिश्तों का बिखरा ये चादर,कितनी नफरतों के छिद्र से बिखरा ये रिश्तों का चादर,कभी किसी के कील भरी बातों से उधड़ गया,कभी बेमतलब की बातों से ही छिद्र हो गया..दूर करने के बजाए अच्छा है,क्यूं न उसपर […]
Tag: कविता कहानी
उलझनें-गृहलक्ष्मी की कविता
Grehlakshmi Kavita: चलते चलते क्यों रुक सी गई हैं जिंदगी परेशान हर लम्हा क्यों हो रही हैं जिंदगी जीने का मज़ा क्यों छीन रही है जिंदगी खामोश थे लम्हें क्यों बुलवा रही हैं जिंदगी रुके से कदमों को क्यों खींच रही हैं जिंदगी अनजाने थे ये रास्तेंं क्यों बहका रही हैं जिंदगी शमा से खामोश […]
छुअन तेरे की सुख अनुभूति-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: दे दे मुझको स्पर्श कोई मां तेरे जैसायाद में तेरी तरस रही हूं, प्यार हो ऐसा इस धरती पे आने से पहलेमैंने तेरा ही स्पर्श जानाअंश तेरा बना मेरा जीवनतेरा उदर था मेरा ठिकानामैं ना जानूं इस दुनिया को कौन करें कैसादे दे मुझको स्पर्श कोई मां तेरे जैसा। मृत्यु तुल्य प्रसव पीड़ा […]
क्रेडिट कार्ड-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: हो जाओ हर खुशी के लिए तैयारले लो हमारे बैंक का क्रेडिट कार्डफ्री है यह जादू की चिप्पीले आओ जीवन मे सुविधा की मस्तीएक लाख का सामान लो उधारअपने सपने के घर को दो आकारछोटी सी ज़िन्दगी क्यो घुट घुट के जीनापरिचितो के सामने शर्म का घूंट क्यो पीनाकम तनख्वाह मे अमीरी अपनी […]
गुनहगार बहू!!-गृहलक्ष्मी की कविता
Gunhgar Bahu: बहू हर बात की गुनहगार होती है।चाहे गुनाह किसी ने भी किया हो।गलती सिर्फ बहू की होती है। बेटा धन बर्बाद करें तो बहू गुनहगारबचत करना ही नहीं जानती है।बेटा शराब पिए तो बहू गुनहगारपति को टेंशन देती है।बेटा नाजायज रिश्ते रखे तो बहू गुनहगारउसकी जरूरत को पूरा नहीं करती है। सास ससुर […]
रेस्ट इन पीस-गृहलक्ष्मी की कहानी
Rest in Peace Story: रोशनी की बेरुखी के बाद भी निशांत का प्यार मरा नहीं। वह पिछले हफ्ते मिलने आया मगर वह अपने पुराने आशिक के पास लौट चुकी थी यह जानकर वह टूट गया। भरोसा टूटता है तो इंसान कहां आपे में रह जाता है। काश! उस जमाने में भी ऐसा कोई ऐप होता […]
मां का वो पहला थप्पड़
जमाने में दस बातें सुनाई थी,
फिर भी मां अधिक समय नाराज ना रह पाई थी
धोखा देना तो एक आर्ट है जी! – हास्य व्यंग
Funny Story in Hindi: धरती पर कुछ लोग बेहद अजीब होते हैं अपनी हर नाकामी का ठीकरा दूसरों के सर पर फोड़ना चाहते हैं । खुद की कमी बेवकूफी तो उन्हें कभी दिखाई नहीं देती। हां लेकिन दूसरों की काबिलियत पर उंगली उठाते रहते हैं । अपनी चालाकी तो विकास और दूसरों की चालाकी धोखा […]
जड़-लघु कहानी
Moral Kahani: सौंदर्य की प्रतिमूर्ति स्वंय को सर्वगुण सम्पन्न समझने वाली लेखा जी का मानना था कि दुनिया की किसी भी उपलब्धि और सफलता पर सिर्फ उनका ही अधिकार हो सकता है। स्वयं को स्थापित करने की होड़ में वे किसी भी हद को पार कर लेती थी साम दाम दंड भेद की इस कला […]
ये पानी-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: सब एक सी जिन्दगी जीते हैं, कुछ छुपते हैं, कुछ छुपाते हैं, कुछ हँसते हैं, कुछ हँसाते हैं , सलीका अगर रोने में भी शामिल हो तो, मुस्कुराने की वजह पूछते हैं सब……………….. तो क्या कहें?कि हम ऐसे ही हैं, जो आदतन हर कसक पर मुस्कुराते हैं, हर उस पल को जीते हैं, […]
