Short Story in Hindi- कुल तीन जने हैं बस…कितना अच्छा है न..अम्मा, पापा और बेटातुम फटाक से खाली हो जाती होगी।हूँ…… थोड़ी देर की निशब्द चुप्पी और फिर, एक लंबी खिलखिलाहट जो अपने खालीपन को लेकर है या गिनती में खुद के अदृश्य होने से।मुँह अँधेरे दिन की शुरुआत हो जाती है जब बूढ़े ससुर […]
Author Archives: मंजुला चौधरी
ये पानी-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: सब एक सी जिन्दगी जीते हैं, कुछ छुपते हैं, कुछ छुपाते हैं, कुछ हँसते हैं, कुछ हँसाते हैं , सलीका अगर रोने में भी शामिल हो तो, मुस्कुराने की वजह पूछते हैं सब……………….. तो क्या कहें?कि हम ऐसे ही हैं, जो आदतन हर कसक पर मुस्कुराते हैं, हर उस पल को जीते हैं, […]
सहारा—बुढ़ापे में साथी का साथ कितना जरूरी
Support Story: शारदा आंटी का फोन आया था कह रही थी अगर फुरसत में है,तो घर आजा,आज जी बहुत घबरा रहा है” मैनें भी तुरंत ही कहा “बस आधे घंटे में पहुंचती हूँ।” फटाफट काम खत्म किया और आॅटो लिया उस आधे घंटे के सफर में मन बचपन के गलियारों में घूम आया जब शारदा […]
अब तो खत्म करो ये जात पात का चलन- लघु कहानी
Caste System Story: प्रतिदिन मुंह अंधेरे सुबह सुबह माला आ जाती है बर्तन धोने। कभी साढ़े चार तो कभी पांच,बहुत झुंझलाहट भी होती है,मन नही करता की उठकर गेट खोलूं ।लेकिन फिर ये लगता है की वो भी तो काम करने निकली है,अब तक पांच घरों में बर्तन मांज चुकी होती है।सबसे अंत में मेरे […]
