Daulat Aai Maut Lai Hindi Novel | Grehlakshmi
daulat aai maut lai by james hadley chase दौलत आई मौत लाई (The World is in My Pocket)

फ्रैडा के साथ जौनी ठीक साढ़े सात बजे स्टोर में मौजूद था।

‘फोन उधर है।’ फ्रैडा ने अपनी उंगली के संकेत से उसे बताया। वह फोन की ओर बढ़ गया। तभी उसने देखा, परदे के पीछे से एक ठिगना, मोटा-सा आदमी प्रगट हो रहा था। बूथ का दरवाजा बंद करके उसने बक्से में सिक्के डाले और सैमी के अपार्टमेंट स्थित फोन का नम्बर घुमा दिया।

कुछ ही समय बाद सैमी का नींद भरा स्वर लाइन पर उभरा।

दौलत आई मौत लाई नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- भाग-1

‘कौन बोल रहा है?’

‘सैमी। मैं जौनी बोल रहा हूं।’

सैमी के मुंह से निःश्वास भरने का स्वर उसे स्पष्ट सुनाई दिया।

‘सैमी उधर क्या हो रहा है?’ जौनी ने पूछा।

‘मिस्टर जौनी।’ सैमी का डरा हुआ स्वर उभरा – ‘मैंने पहले भी आपसे कहा था और फिर कहना चाहता हूं कि मुझसे बात मत करो। वर्ना मैं भी मुसीबत में फंस जाऊंगा।’

‘बेकार की बातें मत करो सैमी-याद है न। तुम मेरे दोस्त हो। मुझे बताओ कि वे लोग क्या कर रहे हैं।’

‘मैं कसम खाकर कहता हूं मिस्टर जौनी कि मैं कुछ नहीं जानता’

‘मैं तुमसे कुछ काम कराना चाहता हूं सैमी।’

‘मैं पहले ही बहुत कुछ कर चुका हूं मिस्टर जौनी। तुम मेरी सारी रकम चुरा ले गये और यहां क्लोय मुझ पर पैसे देने के लिए दबाव डाल रही है। लेकिन उसे देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं है – ‘मेरा भाई…।’

‘बकवास मत करो सैमी -मैं तुम्हारा धन लौटाने का वायदा कर चुका हूं, अब गौर से सुनो। ग्रेहाउंड बस स्टेशन देखा है न तुमने?’

‘हां!’

मसीनो के दफ्तर पहुंचने के बाद तुम वहां जाओ और एक अखबार खरीदकर आसपास ही घूमते रहो। मैं जानना चाहता हूं कि मसीनो के आदमी उसकी निगरानी तो नहीं कर रहे। समझ गये न सैमी।’

‘वे अवश्य निगरानी कर रहे हैं मिस्टर जौनी। यह तो मुझे पता नहीं कि उनका इरादा क्या है मगर रात मैं वहां सिगरेट खरीदने के लिए गया था तब टोनी और अर्नी वहीं मंडरा रहे थे।

‘इसका मतलब है’ – जौनी ने सोचा -मसीनो को पूरा-पूरा संदेह हो चुका है कि रकम उन्हीं लॉकरों में है।

‘ओ.के. सैमी। अब तुम अपनी रकम की चिन्ता मत करो। मैं जल्दी ही भिजवा दूंगा।’

जौनी ने संबंध विच्छेद कर दिया।

कुछ क्षण खड़ा-खड़ा वह टेलीफोन के बक्से को घूरता हुआ विभिन्न विचारों में फंसा रहा। फिर बूथ का दरवाजा खोलकर बाहर आ गया।

‘जौनी। आओ – साल्वेडर से मिलो।’ काउंटर पर खड़ी फ्रैडा ने चहकते हुए कहा।

काउंटर पर खड़े मोटे, ठिगने आदमी ने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।

‘तुमसे मिलकर खुशी हुई।’ वह मुस्कराते हुए बोला, ‘आश्चर्य की बात है। मिसेज फ्रैडा ने आज से पहले कभी नहीं बताया कि उनका कोई सौतेला भाई भी है।’

हाथ मिलाते समय जौनी की तेज नजरों ने एकदम भांप लिया, लगभग साठ वर्षीय यह ठिगना देखने में भले ही सज्जन और हंसमुख हो, मगर असलियत में वह नम्बरी हरामी था।

जौनी ने कहा – ‘मुझे मियामी में कुछ काम है। यहां से गुजर रहा था तो मैंने सोचा, क्यों न फ्रैडा से भी मिलता चलूं। स्टोर तो बहुत अच्छा है तुम्हारा।’

‘थैंक्स मिस्टर जौनी।’ उसने अपनी छोटी-छोटी चमकीली आंखों को इधर-उधर नचाते हुए कहा।

‘मुझे दो पौंड बीकन और एक दर्जन अंडे दे दो।’ फ्रैडा उनकी बातों में दखल देती हुई बोली।

‘अभी देता हूं’ साल्वेडर यह कहता हुआ दूसरे काउंटर की ओर बढ़ गया। जौनी और फ्रैडा की नजरें मिलीं किन्तु दोनों में से बोला कोई नहीं।

दस मिनट बाद वे स्टोर से बाहर निकल आये।

साल्वेडर उन्हें जाते देखता रहा। उसके चेहरे पर छाये नम्रता के भाव धीरे- धीरे विलुप्त होने लगे और छोटी-छोटी चमकीली आंखों में कठोरता उत्पन्न हो गई। काउंटर के नीचे से उसने फ्लोरिडा टाइम्स की कल की प्रति निकाली और विज्ञापन वाला कॉलम खोल लिया। ‘क्या तुमने इस आदमी को देखा है’ काफी देर तक वह विज्ञापन को घूरता रहा फिर एक पैंसिल से विज्ञापन में छपे जौनी के फोटो को देखता रहा और फिर संतुष्ट होकर टेलीफोन बूथ में जा घुसा। उसने सिक्के डाले और विज्ञापन में लिखे नम्बर को डायल कर दिया।

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किसी का गुर्राता हुआ स्वर लाइन में उभरा।

‘ब्रूनो स्पीकिंग फ्रॉम लिटिल क्रीक।’

साल्वेडर फोन पर बोला -‘यहां एक आदमी आया हुआ है जो अपने आपको जौनी बताता है। उसकी शक्ल हू-ब-हू जौनी वियान्डा से मिलती है?’

‘कौन है वह?’ उधर से पूछा गया।

साल्वेडर ने विस्तार से उसे समझाया।

‘अगर वह उसे अपना सौतेला भाई बताती है तो क्या वह उसका सौतेला भाई नहीं हो सकता?’ उधर से पूछा गया।

साल्वेडर ने बताया – ‘दरअसल फ्रैडा का पति सही मायनों में मर्द नहीं है और वह अपनी काम वासना की पूर्ति के लिए उसे कुछ भी बता सकती है। मैं दावे से कह सकता हूं कि पति की कमी को वह इस आदमी द्वारा पूरा करती है।’

‘ठीक है – मैं किसी न किसी को अवश्य भेज दूंगा। सैकड़ों की तादाद में संदेहास्पद व्यक्ति हमारे सामने हैं जिन्हें हमने चैक करना है। फिर भी मैं किसी न किसी को उसे चैक करने के लिए अवश्य भेज दूंगा।’

‘कब भेजोगे?’

‘यह मैं कैसे बता सकता हूं। जब भी कोई आदमी फ्री हो जाएगा, उसे तुरंत रवाना कर दूंगा’

‘यदि यही शख्स आपका इच्छित व्यक्ति निकला, तो इनाम मुझे मिलेगा न।’

‘हां श्योर। बशर्ते कि यही व्यक्ति हमारे विज्ञापन में प्रकाशित व्यक्ति हुआ तो।’ उधर से उत्तर दिया गया और फोन का संबंध कट कर दिया गया।

दौलत आई मौत लाई भाग-23 दिनांक 10 Mar.2022 समय 08:00 बजे रात प्रकाशित होगा

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