यदि बच्‍चा दे हर बात पर उल्‍टा जवाब, तो पेरेंट्स करें ये काम: Parenting Advice
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Kids Behaviour Advice: उम्र के साथ बच्‍चे के व्‍यवहार, बोली और रहन-सहन में अंतर आने लगता है। खासकर टीनेज में आते-आते बच्‍चे पेरेंट्स को उल्‍टे जवाब भी देने लगते हैं। शुरुआत में पेंरेट्स बच्‍चे की इस गलती को नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन आगे चलकर यही आदत बच्‍चे को बदतमीज बना सकती है। बच्‍चों के ऐसा व्‍यवहार करने के कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है कि बच्‍चा अपनी बात या विचार पेरेंट्स तक सही ढंग से पहुंचा नहीं पा रहा या फिर बच्‍चा पेरेंट्स के प्‍यार से वंचित हैं। बच्‍चे का ऐसा व्‍यवहार पेरेंट्स के लिए शॉकिंग हो सकता है लेकिन इसके पीछे की वजह जानना बेहद जरूरी है। यदि आपका बच्‍चा भी देने लगा है उल्टा जवाब तो आप ये कारगर टिप्‍स अपना सकते हैं।

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क्‍यों देते हैं बच्‍चे उल्‍टा जवाब

पेरेंट्स बनें समझदार
attention seeker

अटेंशन सीकर

बच्‍चे बचपन से ही अटेंशन सीकर होते हैं। वह अपने पेरेंट्स का ध्‍यान आकर्षित करने के लिए ऐसी हरकत करते हैं जिससे वह हमेशा अपने पेरेंट्स के चहेते बने रहते हैं। कई बार पेरेंट्स का अटेंशन पाने के लिए बच्‍चे उल्‍टा जवाब देने लगते हैं।

जिज्ञासा

आजकल बच्‍चों को हर चीज जानने की ललक होती है। वह पेरेंट्स से हर बात का जवाब जानना चाहते हैं। जवाब न मिलने पर खीजते हैं और पेरेंट्स को उल्‍टा जवाब देने लगते हैं।

स्‍वतंत्र होना

टीनेज में बच्‍चे खुद को बड़ा मानने लगते हैं। वह खुद को पेरेंट्स से अधिक अनुभवी और होशियार समझने लगते हैं। वह चाहते हैं कि पेरेंट्स उन्‍हें अकेला छोड़ दें या हर बात पर रोका-टोकी न करें। जब पेरेंट्स बच्‍चे को उसकी मनमानी नहीं करने देते तो वह पेरेंट्स को उल्‍टा जवाब देने लगते हैं।

जिद्दी स्‍वभाव

कई बार अपनी बात मनवाने के लिए भी पेरेंट्स को उल्‍टा जवाब दे देते हैं। बच्‍चा ऐसा व्‍यवहार जिद्दी स्‍वभाव के कारण करता है। टीनेज में बच्‍चे बचपन की अपेक्षा अधिक जिद्दी हो जाते हैं।

पेरेंट्स अपनाएं ये टिप्‍स

पेरेंट्स बनें समझदार
Parents should adopt these tips

बच्‍चे को समझें

टीनेज में बच्‍चे के व्‍यवहार को समझना बेहद मुश्किल होता है। आप अपने बच्‍चे की समस्‍याओं को समझने का प्रयास करें। वह किस बात पर उल्‍टा जवाब देता है ये जानें फिर किसी नजीते पर पहुंचे।

रिएक्‍ट न करें

जब बच्‍चा आपकी बात का उल्‍टा जवाब देता है तो आप कुछ देर के लिए रिएक्‍ट न करें। यदि आप बच्‍चे की बात पर रिएक्‍ट करेंगे तो बच्‍चा और अधिक अग्रेसिव हो सकता है। कभी-कभी मूडी और जिद्दी बच्‍चे के लिए मौन रहना ही सबसे अच्‍छा इलाज है।

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कम्‍यूनिकेट करें

आजकल पेरेंट्स घर-परिवार और ऑफिस की जिम्‍मेदारियों के चलते बच्‍चे को पर्याप्‍त समय नहीं दे पाते। ऐसे में बच्‍चे के मन में कई बातें और सवाल दब जाते हैं जिन्‍हें वह पेरेंट्स से पूछ नहीं पाते। ऐसी स्थिति में बच्‍चे कई बार अपनी बात चिल्‍लाकर या उल्‍टा जवाब देकर रखते हैं। इसलिए पेरेंट्स को दिन में कुछ समय फैमिली और बच्‍चे के लिए निकालना चाहिए। जिसमें आप बच्‍चे से खुलकर बात करें।

सजा दें

जब बच्‍चा उल्‍टा जवाब देने लग जाए तो पेरेंट्स का फर्ज है कि वह बच्‍चे को सजा दें। सजा का मतलब ये नहीं कि आप बच्‍चे को मारे या चिल्‍लाएं। बल्कि कुछ देर के लिए बच्‍चे से बात करना बंद कर दें या दूरी बना लें। पेरेंट्स का न बोलना बच्‍चे को गिल्‍टी महसूस करा सकता है। यकीन मानिए इससे पेरेंट्स और बच्‍चे के बीच का बॉन्‍ड बेहद मजबूत हो सकता है।