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जब भाई-बहन बन जाएं एक दूसरे के दुश्मन: Sibling Fight
Sibling Fight

Sibling Fight: हंसते खेलते और यहां से वहां दौड़ते भागते बच्चे मां-बाप के मन को भाते हैं। मगर कई बार बच्चों के मन में बैठने वाली छोटी-छोटी बातें बड़ी परेशानियों का कारण बन सकती है। बच्चों का मन बेहद कोमल होता है। अगर कोई उन्हें बार-बार डांटे और उनके सामने दूसरे बच्चों को ज्यादा प्यार दे, तो बच्चे इस बात को आसानी से नोटिस कर लेते हैं। जो कई बार दूसरे बच्चों के प्रति उनके व्यवहार से झलकने लगता है। पेरेंट्स इस बात को समझ नहीं पाते कि उनका ये आचरण बच्चों को मन ही मन परेशान कर रहा है, जिससे आगे चलकर सिब्लिंगस ही एक दूसरे के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार करने लगते हैं। आइए जानते हैं कि वो कौन सी ऐसी गलतियां है, जो बच्चों में आपसी मनमुटाव का कारण बनती हैं।

एक बच्चे की ओर ज्यादा झुकाव

जब भाई-बहन बन जाएं एक दूसरे के दुश्मन: Sibling Fight
leaning toward a child

पेरेंट्स को अपने दोनों की बच्चे प्यारे लगते हैं। मगर चाहते न चाहते हुए भी छोटा बच्चा हमेशा माता-पिता का ज्यादा लाडला कहा जाता है। हर बात में जब हम छोटे बच्चे को ज्यादा अहमियत और सुरक्षा देते हैं, तो बड़ा बच्चा खुद को पेरेंट्स से दूर समझने लगता है। उसे लगने लगता है कि मम्मी-पापा मुझे प्यार नहीं करते। धीरे-धीरे वो छोटे बच्चे से खेलना बंद कर देता है और फिर उसे कई बार नुकसान पहुंचाने की भी कोशिश करता है। ऐसे में पेरेंट्स को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि जब दोनों बच्चे एक साथ बैठे हैं, तो दोनों से ही समान व्यावहार करें। ऐसा करने से सिब्लिंग राइवेलरी अपने आप खत्म हो जाएगी।

एक के लिए शॉपिंग करना

बाजार जाते ही हम बच्चों के लिए कुछ न कुछ जरूर खरीदते हैं। मगर कई बार हम बिना किसी मंशा के जरूरत के हिसाब से किसी एक बच्चे के लिए कोई सामान खरीद कर लाते हैं, जिससे दूसरा बच्चा नाराज हो जाता है। उसे लगता है कि माता-पिता सिर्फ उसी के लिए खरीददारी करते हैं और मुझे भूल जाते हैं। वे अब हर बार इस बात को नोटिस करने लगता है। ऐसा ही नहीं कई बार उसे बराबर सामान न मिलने के कारण वो अपने भाई या बहन के सामान को गुस्से में तोड़ डालते हैं। इस तरह से दोनों में एक दूसरे के प्रति नफरत पैदा होने लगती है और धीरे-धीरे वे दुश्मन बन जाते हैं।

भाई बहन में से किसी एक की सबके सामने तारीफ करना

कई बार घर में आने वाले मेहमानों के सामने हम जहां एक बच्चे की तारीफों के पुल बांधने लगते हैं, तो दूसरे की कमियां गिनाते नहीं थकते। ऐसे में बढ़ता हुआ बच्चा अब अंदर ही अंदर गिल्ट फील करने लगता है और अपने आप को अपने भाई या बहन की तुलना में खुद को कम आंकने लगता है। ये गलतफहमी दोनों बच्चों के मध्य मतभेद का कारण साबित हो सकती है।

हर काम में एक बच्चे को ही आगे रखना

अक्सर ये सभी घरों में सुनने को मिलता है कि राजू तो सभी काम कर लेता है, मगर सोनू हर काम से कतराता है। अब अगर कोई पेरेंट्स से ये पूछे कि आपने कब और बितनी बार सोनू पर किसी काम के लिए विश्वास जताया है, तो उनके पास आपको कई बहाने मिल जाएंगे। मगर असलियत यही है कि हम किसी एक बच्चे को ही सारे मौके देते चले जाते हैं, जिससे दूसरा बच्चा खुद को पिछड़ा हुआ महसूस करने लगता है। उसे लगने लगता है कि मेरे अंदर कुछ न कुछ कमी जरूर है, जो पेरेंट्स हर वक्त मुझे पीछे की ओर धकेलते हैं। पेरेंट्स का इस तरह का सुलूक बच्चे के मन को झंझोर देता है और दूसरे बच्चे के प्रति उसके मन में नफरत पैदा कर देता है। 

एक बच्चे को ही सभी अधिकार दे देना

जब भाई-बहन बन जाएं एक दूसरे के दुश्मन: Sibling Fight
give all rights to a child

ऐसा करना सरासर गलत होता है, जहां एक बच्चे को अपने सारे फैसले लेने का अधिकर है और वहीं दूसरा बच्चा अपने हर निर्णय के लिए मां बाप का चेहरा देखता रहता है कि कब उसे परमिशन मिलेगी। ये सबसे बड़ा मतभेद है, जो पेरेंटस बच्चों के मध्य करते हैं। वे भूल जाते हैं कि दोनों बच्चे उनके अपने है और दोनों को ही अपने डिसीजन लेने का पूरा अधिकार है। मगर दोनों में होने वाले इस प्रकार के भेदभाव से बच्चों में आपसी प्यार पनपने की बजाया अब एक बच्चा दूसरे बच्चे पर अपना स्वमित्व समझने लगता है। उसको लगने लगता है कि मेरा भाई या बहन हर काम के लिए मुझ पर ही निर्भर है, जिससे बच्चों में एक दूसरे के प्रति इज्जत कम होती चली जाती है और नतीजन आपसी मनमुटाव पनपने लगता है, जो सिब्लिंग फाइट का कारण साबित होता है।

दो बच्चों के मध्य इस प्रकार का व्यवहार कई बार एक बच्चे में जहां आत्मविश्वास को खत्म करने काम करता है, तो दूसरे बच्चे को जिद्दी और मनमौजी बना देता है। क्योंकि वे जानता है कि माता-पिता उसकी किसी बात को नहीं टालते हैं, जिससे वो दिन-ब-दिन बिगड़ने लगता है। उसका व्यवहार देखकर कई बार माता पिता को अपनी गलत का एहसास तो होता है। मगर वे अब कुछ नहीं कर पाते हैं। ऐसे में पेरेंटस को चाहिए कि वे अपने दोनों बच्चों से समान रूप से व्यवहार करें, दोनों के प्रति ही अपना विश्वास जताएं। अगर एक बच्चा किसी काम में पीछे है, तो जाहिर है कि उसमें कोई अन्य खूबी जरूर होगी। पेरेंट्स का काम है कि वे बच्चों को तराशने का काम करें और उन्हें प्रतिभाशाली बनाएं, ताकि वे आगे बढ़कर अपने लिए एक मार्ग प्रशस्त कर सकें और सिब्लिंग राईवेलरी जैसी परेशानी से भी मुक्त हो सकें।

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