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गोपाल राय गाथा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Senapati Story
Gopal Rai Gatha

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Senapati Story: बहुत पहले कलचुरी वंशी राजा कल्याण राम रतनपुर के राजा थे। उनका पराक्रमी सेनापति गोपाल राय था। गोपाल राय बलशाली मल्ल और कुशल योद्धा होने के साथ-साथ ईमानदार तथा लोकप्रिय भी था। दिल्ली के बादशाह को उसके सिपहसलारों ने बताया कि गोपाल राय के रहने तक रतनपुर को अधीन नहीं किया जा सकता। बादशाह ने राजा कल्याण राम को भेंट करने के बहाने बुलाकर दिल्ली में गिरफ्तार कर कैद कर लिया। किसी तरह यह समाचार राजमाता को मिला तो उन्होंने गोपालराय को यह जिम्मा सौंपा कि वह राजा कल्याण राम को मुक्त कराकर लाए। कल्याण राम जानता था की लड़कर बादशाह से हार पाना मुमकिन नहीं और किसी तरह राजा को मुक्त करा भी लिया तो शाही सेना आक्रमण कर राज्य को तहस-नहस कर देगी, इसलिए युक्ति से काम लेना होगा कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

सोच-विचार कर गोपाल राय ने खुद दिल्ली जाने का फिसला लिया। दिल्ली पहुँचकर गोपालराय ने दरबार में बादशाह को उपहार भेंट किए। बादशाह जानता था कि गोपाल राय बलशाली मल्ल हैं, इसलिए उसने अपने दरबारी के मार्फत चुनौती पेश की कि गोपाल राय शाही हाथी को पछाड़कर अपना मल्ल होना सिद्ध करें। बादशाह को भरोसा था कि शाही हाथी गोपाल राय को रौंद डालेगा और अपना संबल टटने से निराश कल्याण राम मगलों की अधीनता स्वीकार कर सकेगा। गोपाल राय ने शाही चुनौती स्वीकार कर ली।

गोपाल राय और शाही हाथी का मुकाबला होने की पूर्व रात्रि में महावत ने हाथी को खूब नशा कराया ताकि वह गोपाल राय को बिना समय गँवाए कुचल कर मार डाले। गोपाल राय ने इस चाल का पहले ही अनुमान कर लिया और अपने वस्त्रों में मिर्ची का जहर मिला चूर्ण छिपा लिया। मुकाबला होने पर गोपाल राय हाथी की सूंड से बच-बचकर उसे छकाते रहे। मदमस्त हाथी क्रुद्ध होकर लपकता और गोपाल राय बिजली की-सी फुर्ती से खुद को बचाते। इस चूहा-बिल्ली के खेल में हाथी थकने लगा तो गोपाल राय दाँव बदलकर उछले और हठी पर जा बैठे। हाथी उन्हें गिरा पाए इसके पहले ही गोपाल राय ने विषैला मिर्ची चूर्ण हठी की आँख और मुँह में डाल दिया। आँखों में जलन होने से हाथी के लिए देख पाना संभव न रहा, जहर उसकी जीवन शक्ति छीन रहा था। सही मौका ताड़कर गोपालराय ने पूरी ताकत के साथ हाथी के मर्मस्थल पर ताबडतोड प्रहार कर दिए। कछ देर में हाथी बेहोश होकर गिर पड़ा। गोपालराय की जय-जयकार होने लगी।

बादशाह ने सबके सामने कॉल किया था कि शाही हाथी से जीतने पर गोपालराय के चाहे अनुसार कल्याण राम को रिहा कर दिया जायेगा। अपना सम्मान बचाने के लिए बादशाह ने कल्याण राम और गोपाल राय को अनेक उपहार देकर छोड़ दिया। कल्याण राम के साथ रतनपुर आकर गोपालराय राज-काज देखने लगे। उनसे जलन रखनेवाले दरबारी कल्याण साय के कान भरने लगे की वह राजा के स्थान पर खुद सत्ता पाना चाहता है। सशंकित राजा ने गोपाल राय की हत्या करवा दी। गोपाल राय ने अंतिम सांस तक षड्यंत्रकारियों से संघर्ष किया। दीवार गायक गोपाल राय की गाथा में गाते हैं कि वह पैर जमाकर इस तरह लड़ा की मर गया पर उसके पैर नहीं उखड़े, उसका एक पैर तथा सर रतनपुर के किले में पत्थर के हो गए जबकि धड़ मल्हारगढ़ में गिरा। मल्हारगढ़ में आज भी पुरातन ध्वंसावशेष मौजूद हैं। रतनपुर में महामाया मंदिर के सामने रतनपुर के किले के खंडहर हैं।

गोपाल राय की गाथा गाने वाले देवार लोकगायक गोपाल राय बिंझिया को अपना आदिपुरुष और खुद को उनका वंशज मानते हैं।

टीप – मध्यप्रदेश में विध्याचल पर्वत माला तथा नर्मदा नदी 60 करोड़ साल से अधिक समय होने के प्रमाण मिले हैं। विंध्याचल का नाम जन सामान्य ‘बिंध्या’ या ‘बिंझिया’ भी बोलते हैं। ‘बिंझिया’ में ‘वार’ प्रत्यय जोड़कर ‘बिंझवार’ शब्द बना है। बिंझवार जनजाति के लोग खुद को रतनपुर राज्य (पूर्व मध्यप्रदेश, अब छत्तीसगढ़) के पराक्रमी सेनापति गोपाल राय का वंशज मानते हैं। गोपाल राय की गाथा का गायन देवार जन आज भी उसी तरह करते हैं; जैसे बुंदेलखंड में अल्हैत आल्हा-ऊदल की गाथा गाते हैं।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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