summary: बच्चों की जिद को बदलें समझदारी में
बच्चों का जिद करना उनके स्वाभाविक विकास का हिस्सा है,। जिद को इग्नोर करना, शांत तरीके से बच्चे से संवाद करना, और स्मार्ट प्लानिंग के जरिए भविष्य में ऐसी स्थिति को टालना बेहतर उपाय हैं।
Child Stubbornness: बच्चे तो बच्चे होते है रुठना, हंसना, मनना और जिद करना उनके बचपन का एक हिस्सा होता है। बच्चे जब शरारतें करते हैं हमारी बातों को मानते हैं तो हमे बहुत अच्छा लगता है लेकिन यही बच्चे जब जिद पर आ जाते हैं तो इन्हें टेकल करना कई बार पेरेंट्स के लिए चुनौती बन जाता है। खासकर बच्चे जब बाजार में जिद करते हैं तो पेरेंट्स बहुत परेशान होकर उन्हें मारने पीटने भी लगते हैं। लेकिन मारना पीटना समस्या का हल नहीं है। जानते हैं कि अगर बच्चे बाजार में जिद करें तो कैसे करें उन्हें डील
इग्नोर करें
बच्चे हमसे एक कदम आगे होते हैं। उन्हें पता होता है कि अपनी कौन सी बात कब और कैसे बनवानी है। यही बात उनकी जिद पर भी सटीक बैठती है। अक्सर बाजार में वो अपनी पसंद की चीज को देखकर उसे मांगने लगते हैं। अगर उन्हें वो नहीं दिलवाई जाती तो वो गुस्सा होकर हाथ पैर पटकने लगते हैं। जिद का यह तरीका अपनी तरफ ध्यान खींचकर अपनी बात मनवाने का है। इसे डील करने का तरीका है आप जिद को इग्नोर करें।
आप भी करें स्मार्ट प्ले

कई बार बच्चे बहुत छोटी छोटी बातों और चीजों के लिए जिद करने लगते हैं। यह आपको समझना होगा कि आपको वो चीज उसे दिलवानी है या नहीं। अगर आपको लग रहा है कि बच्चा जो चीज मांग रहा है और वो उसके काम की है और आपको बजट में गुंजाईश भी है तो इसे उस चीज को आप बच्चे को लेकर दे सकते हैं। लेकिन आपको शुरुआती स्तर पर ही यह फैसला लेना है। एक बार अगर आप ना कह दी तो उसे जिद देखकर हां में ना बदलें। हां और ना का यह कंफ्यूजन बच्चे की जिद को और बढ़ाता है।
हाथ ना उठाएं
आपको पता होना चाहिए कि बच्चा जब अपनी जिद के एक लेवल पर होता है तो वह बात सुनने और उसे समझने की स्थिति में होता ही नहीं है। ऐसे मौके पर उसे डराना धमकाना, डांटना या उस पर हाथ उठाना कोई अच्छी बात नहीं है। आप यह सोचकर उसे डांटें डपटे नहीं कि वो पब्लिक प्लेस में तमाशा कर रहा है। आपको समझना होगा कि उस पर सभी के सामने चिल्लाकर आप भी एक सीन ही क्रिएट कर रहे हैं।
तो फिर क्या करें?
ऐसे में आपके मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि आखिर इस समस्या को डील कैसे करें। अगर बच्चा इग्नोर करने से भी नहीं मान रहा तो आप सबसे खुद को और बच्चे को एक ऐसी जगह पर ले जाएं जहां लोग कम हों। अब आप उसे चुप कराएं और रिलेक्स करें। फिर हाथों के ईशारों से उसे रिलेक्स करें और पूछें कि क्या हुआ? उसके चुप होने के बाद ही आप उसके साथ बातचीत शुरु करें। उससे कहें कि बात तभी सुनी जाएगी जब वो बिना रोए और चिल्लाए अपनी बात कहेगा। आपको उसी पल उसकी जिद खत्म होती दिखाई देगी।
अगली बार की तैयारी

मान लीजिए कि बच्चे ने इस बार जिद कर ली और आपने उसे अच्छे से डील कर लिया। लेकिन अगली बार यह स्थिति ना आए इसकी तैयारी पहले से कर लें। बच्चों को जब भी बाजार ले जाएं उनसे अपनी जरुरतों की एक लिस्ट बनाने को कहें। अगर वो बहुत छोटे हैं तो वे आपकी मदद से अपनी लिस्ट बना सकते हैं। आप भी अपनी एक लिस्ट बनाएं और उस लिस्ट के अनुसार शॉपिंग करें। जब अपनी लिस्ट देखकर शॉपिंग करना सीखेंगे तो जिद वो करेंगे ही नहीं।
