A woman holding the hands of a young girl, both sitting on a couch, engaged in a serious and emotional conversation.
A mother gently comforts her daughter during a heartfelt moment.

summary: बच्चों में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट और पॉजिटिव एटीट्यूड कैसे विकसित करें

पेरेंट्स बच्चों को हार और जीत दोनों को संतुलित दृष्टिकोण से देखना सिखाएं। जिससे कि बच्चे हार से हताश न होकर उससे सीख लेकर और मजबूत बनें।

Overcome Defeat: यह जिंदगी है यहां अगर हम जीतते हैं तो कभी ना कभी किसी मौके पर हमें हार को भी स्वीकार करना होता है। हम यह बात भली भांति समझते हैं आखिर हम उम्र के उस दौर पर हैं जहां जिंदगी ने हमें बहुत कुछ सिखा और समझा दिया। लेकिन हमारे साथ रहने वाले हमारे बच्चे अपनी जीत पर तो बहुत एक्साइटेड हो जाते हैं लेकिन वो हारने के अनुभव को समझ नहीं पाते। इस आर्टिकल में हम आपके साथ कुछ बातें शेअर करेंगे जिससे वो ना केवल अपनी हार को डील कर उससे कुछ सीख भी पाएंगे।

हर चीज एक अनुभव है

आप अपने बच्चों को हार जीत के समीकरण में ना बांधें। आप उसे बताएं कि हर चीज कुछ ना कुछ सीख लेकर आती है। आपका किसी प्रतियोगिता में होने का उद्देश्य उस प्रतियोगिता को जीतना नहीं होता। बल्कि वो अनुभव होता है। जो आगे चलकर आपके लिए एक सुनहरी याद बनेगा। उसे बताएं कि वो जिस भी कंपटीशन में है उसमें उसे अपना सौ फीसदी देना है। जीतना और हारना तो एक प्रोसेस है बस।

प्रतियोगिता खुद से

ऐसा नहीं है कि हमें अपने बच्चों के अंदर प्रतियोगिता की भावना को डवलप नहीं करना है। आप बच्चों को बताएं कि आप खुद से होड़ करो। जो आप कल थे आज आप उससे बेहतर करो। बच्चा जब खुद से होड़ करेगा तो वो हर बार पिछली बार से बेहतर वर्जन में आपको नजर आएगा।

बात करें

A concerned father holding his young son's hands while having a serious conversation on a couch.
A father comforting his son during a heartfelt discussion at home.

हर समस्या का सबसे बड़ा हल होता है कि आप बात करें। आप देखें कि अगर बच्चा किसी कंपटीशन को देने के बाद खुद को उदास महसूस कर रहा है तो उससे बातचीत करें। उससे पूछें कि वो क्या महसूस कर रहा है। क्या वो यह महसूस कर रहा है कि दूसरा उससे बेहतर था या फिर वो वो नहीं कर पाया जिसकी उसे खुद से उम्मीद थी। जब आप उससे बात करेंगी तो ही उसके मन की बात सामने आ पाएगी। इससे आप उसकी भावनाएं आप सुलकर सुलझा पाएंगी।

यह नेगेटिव नहीं है

A sad child hides among couch cushions, seeking comfort and safety.
It is okay to be sad.

आप बच्चे से कहें कि हारना कोई नेगेटिव बात नहीं है। अगर वह इस वजह से खुद को थोड़ी देर के लिए ही सही लेकिन लो फील कर रहा है तो यह नॉर्मल है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह जीत के बाद भी तो एक्साइटेड होता है। लेकिन चाहे हार की फीलिंगहो या जीत की, दोनों को ही ज्यादा देर तक खुद पर हावी ना होने दें। बच्चे को समझाएं कि अगर आप हारोगे नहीं तो जीतने की उस फीलिंग को कैसे महसूस करोगे?

सबका अपना नॉर्मल है

अभी थोड़े समय पहले ही हमने आमिर खान की फिल्म देखी है सितारे जमीं पर। इस फिल्म का एंड सभी के लिए सीख है कि आप जैसा सोचते हो आपको वैसा ही नजर आता है। कहने को तो वो बच्चे स्पेशल थे। लेकिन उनका मानना था कि वो हारे नहीं जीते हैं। पहले से दूसरे नंबर पर। वो जीत को सेलिब्रेट कर रहे थे। उन्होंने चुना खुश होना।

बस आप भी अपने बच्चों को स्मार्टली इसी तरह टेकल करना सिखाएं। फिर देखिए नजरिया और नजारे कैसे बदलते हैं।