Overview: सिंगल मदर भी कर सकती हैं बेस्ट पेरेंटिंग, सुष्मिता सेन से सीखें ये गुण
सुष्मिता सेन की पेरेंटिंग स्टाइल सिखाती है कि सिंगल मदर होकर भी बच्चे की पेरेंटिंग पूरी मजबूती और प्यार से की जा सकती है।
Parenting Tips from Sushmita Sen: जब माता-पिता दोनों मिलकर बच्चे की परवरिश करते हैं तो उनके सामने कई तरह की समस्याएं और चुनौतियां आती हैं लेकिन सिंगल मदर के लिए ये चुनौतियां कहीं अधिक बढ़ जाती हैं। बच्चे की पढ़ाई और खाने पीने का खर्च, उसकी शादी और बच्चों के अतरंगे सवालों के जवाब सिंगल मदर को अकेले ही मैनेज करने पड़ते हैं। ऐसी ही एक बॉलीवुड अभिनेत्री हैं जिन्होंने सिंगल मदर के रूप में मिसाल कायम की है। जी हां, हम बात कर रहे हैं 1994 में मिस यूनिवर्स का खिजाब जीतने वाली सुष्मिता सेन की। हालांकि उन्होंने अपनी दोनों बेटिंयों को जन्म नहीं दिया लेकिन एक सगी मां से ज्यादा प्यार और स्नेह दिया है। सिंगल पेरेंटिंग के मामले में सुष्मिता से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। आइए, जानते हैं सुष्मिता सेन से पेरेंटिंग के कुछ खास टिप्स।
सिंगल पेरेंट अपने आप में है सशक्त

हर बच्चे को माता-पिता दोनों की जरूरत होती है। लेकिन यदि किसी कारणवश एक अभिभावक नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका परिवार अधूरा है। सुष्मिता का कहना है कि अकेले बच्चों की परवरिश करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह असंभव नहीं है। थोड़े प्रयास और प्यार से आप सब कुछ संभाल सकते हैं। सिंगल पेरेंट अपने आप में सशक्त होता है। वह सभी जिम्मेदारियां पूरी तरह से निभा सकता है।
जिंदगी को खुलकर जिएं
जीवन में जितना जरूरी अनुशासन होता है उतनी ही जरूरी है मस्ती। सुष्मिता का कहना है कि शुरूआत में वह बहुत स्ट्रिक्ट मां थीं, लेकिन समय के साथ उन्होंने बच्चों को ढील देना सीखा। वे अपनी बेटियों के स्कूल, खेल और अन्य गतिविधियों पर ध्यान देती हैं। बच्चों की मेहनत को प्रोत्साहित करने के लिए उनके लिए मजेदार हॉलिडे प्लान करती हैं। सही समय पर सख्ती और ढील का संतुलन बनाना पेरेंटिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
बच्चों से कुछ न छुपाएं
कई बार पेरेंट्स बच्चों की भलाई के लिए ही सही लेकिन उनसे कई बाते छुपाते हैं। बच्चे जिज्ञासु होते हैं और उनके दिमाग में ढेर सारे सवाल होते हैं। ऐसे में उन्हें गलत जानकारी देने या टालने के बजाय, सच्चाई को रचनात्मक तरीके से बताएं। सुष्मिता का कहना है कि उन्होंने बच्चों को सच्चाई से रूबरू कराया, जो उनकी जिज्ञासा को शांत करता है और विश्वास बनाए रखता है।
बच्चों को सपने देखने दें

हर बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर या शिक्षक बनने का सपना नहीं देखता। कुछ बच्चे कलाकार, यात्री या स्वतंत्र कार्य करना चाहते हैं। सुष्मिता का कहना है कि हर बच्चे में अलग खासियत होती है। उन्हें अपना रास्ता खुद बनाना आना चाहिए। अपने सपनों को याद रखो। बच्चों को इतनी आजादी दें कि वे अपनी राह चुन सकें और उनके सपनों का हमेशा समर्थन बनाए रख सकें।
आसान नहीं, लेकिन नामुमकिन भी नहीं
सुष्मिता का कहना है कि पेरेंटिंग कभी आसान नहीं होती। बच्चे को जन्म देना, उनकी परवरिश करना, पढ़ाना या उनके लिए लड़ना, सब में मेहनत लगती है। कई बार आप अपने फैसलों पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन बच्चे की मुस्कान आपको अहसास कराती है कि यह सब इसके लायक है। इसलिए सिंगल मदर को कभी भी ये नहीं सोचना चाहिए कि वह अकेले बच्चे को कैसे पालेगी। मां में बहुत शक्ति होती है वह नामुमकिन को मुमकिन बना सकती है।
