Overview: ‘ लोचे’ के संग संगीत सफ़र शुरू
अभिनेता-निर्देशक कुणाल खेमू ने ‘लोचे’ के साथ संगीत में डेब्यू किया, जो ज़िंदगी की छोटी परेशानियों को हँसी और अपनापन के साथ पेश करता है।
Kunal Khemu Debut Song: मनोरंजन जगत के बहुमुखी कलाकार कुणाल खेमू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं है। अभिनय और निर्देशन में अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद अब वह संगीत की दुनिया के सफ़र पर निकल पड़े हैं। हाल ही में उन्होंने अपना पहला एकल गीत “लोचे” रिलीज़ किया, जो ज़िंदगी की छोटी-छोटी रुकावटों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में पेश करता है।
यह गाना युवाओं के दिलों को छूने के साथ-साथ हर उम्र के श्रोताओं को मुस्कुराने पर मजबूर करता है। इसके साथ ही अभिनेता को ‘मडगांव एक्सप्रेस’ के लिए एसडब्ल्यूए अवॉर्ड्स 2025 में सर्वश्रेष्ठ संवाद का अवॉर्ड मिला।
मडगांव एक्सप्रेस के लिए पहली बड़ी जीत
अभिनेता और फिल्ममेकर कुणाल खेमू ने एसडब्ल्यूए अवार्ड्स 2025 के छठे संस्करण में अपने करियर में बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने अपनी पहली निर्देशित फिल्म मडगांव एक्सप्रेस के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद का अवॉर्ड जीता। भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित पुरस्कारों में से एक यह अवॉर्ड खास है क्योंकि इसे पटकथा लेखक खुद चुनते हैं, जिससे यह कुणाल के लिए साथियों की ओर से मिली एक खास सराहना बन गई।
ज़िंदगी के लोचे बने गीत की प्रेरणा
“लोचे” का मतलब रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आने वाली वे छोटी-छोटी दिक्कतें हैं, जो सबसे गलत समय पर सामने आ जाती हैं। कुणाल ने इस गाने को खुद लिखा और गाया है। उन्होंने इसे इस तरह बनाया है कि सुनने वाले को लगे जैसे कोई करीबी दोस्त कंधे पर हाथ रखकर कह रहा हो, चिंता मत करो, ये सबके साथ होता है।
माइक्रोफोन पर लौटे कुणाल खेमू
“लोचे” की सबसे खास बात इसकी सादगी है। गीत में शांत लय, सरल बोल और बातचीत जैसा अंदाज़ है, जो कुणाल की स्क्रीन पर दिखने वाली सहजता और गर्मजोशी को दर्शाता है। इसमें उनकी पहचान वाली ह्यूमर भी है और एक गहरा सच भी।ज़िंदगी कभी भी पूरी तरह प्लान के मुताबिक नहीं चलती, और यही इसे रोचक बनाता है।
‘जीवन की उथल-पुथल के लिए एक मज़ेदार गीत’
कुणाल ने बताया, “लोचे सचमुच मेरी ज़िंदगी का एक हिस्सा है और मुझे लगता है कि बहुत से दूसरे लोग भी इसमें अपनी ज़िंदगी देखेंगे। यह उन छोटी-छोटी रोज़मर्रा की चीज़ों के बारे में है जो हमें भटकाती हैं, लेकिन ज़िंदगी को दिलचस्प भी बनाती हैं। मैं कोई आदर्श तस्वीर नहीं बनाना चाहता था। मैं तो केवल उस उलझन, पागलपन और सब कुछ न समझ पाने के मज़े के बारे में गाना चाहता था।”
संगीत में भी छलका अभिनय का अपनापन
यह पहला मौका नहीं है जब कुणाल ने अपनी आवाज़ से दर्शकों को खुश किया है। अपने निर्देशन की पहली फ़िल्म मडगांव एक्सप्रेस में उन्होंने “हम यहीं” गाने में भी अपनी आवाज़ दी थी। अब “लोचे” के साथ वह फिर से माइक पर लौट आए हैं। यह गाना फिलहाल उनके यूट्यूब चैनल पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है और युवा श्रोताओं से अच्छा रिस्पॉन्स पा रहा है। यह गाना खासतौर पर उन युवाओं के लिए रिलेटेबल है, जो 20s या 30s में अपने करियर और निजी जीवन के बीच बैलेंस बनाने की प्रयास कर रहे हैं।
कुणाल खेमू का वर्कफ्रंट
लोचे” के साथ कुणाल खेमू साबित करते हैं कि वे सिर्फ़ एक अभिनेता या फ़िल्म निर्माता से कहीं बढ़कर हैं। वे एक ऐसे कहानीकार हैं जो शैली के साथ प्रयोग करने से नहीं डरते। उन्होंने हाल ही में इंटरव्यू में कहा था कि वे नए प्रयोगों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं और आने वाले समय में अपने फैन्स को कई सरप्राइज देंगे।
