Home Direction Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम, अघन्या कोण, दक्षिण-पश्चिम कोण, पश्चिम कोण और उत्तर पूर्व कोण का महत्व बताया गया है। घर का निर्माण करते समय वास्तु नियमों को अनदेखा करने से वास्तु दोष उत्पन्न होते हैं। जिससे व्यक्ति को जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र में घर की दिशाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। शास्त्रों में घर की सभी दिशाओं में दक्षिण दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि, इस दिशा में पितरों का वास होता है। दक्षिण दिशा से जुड़े कुछ नियम वास्तु शास्त्र में बताए गए हैं। घर में सुख-शांति और पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए इन नियमों का पालन करना आवश्यक है। तो चलिए पंडित इंद्रमणि घनस्याल से जानते हैं दक्षिण दिशा से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।
पितरों की दिशा होती है दक्षिण

वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण दिशा में पितृदेव निवास करते हैं। इस दिशा से जुड़ी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर इन बातों को अनदेख करते हैं तो घर में पितृ दोष उत्पन्न होता है। जिस वजह से घर में सुख-शांति नहीं रहती और आर्थिक उन्नति भी रुक जाती है। पितृ दोष के कारण कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पितृदोष दूर करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान

वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण दिशा पितृदेव के साथ साथ यम की दिशा भी मानी जाती है। ऐसे में इस बात का ध्यान रखें कि जब भी घर में पितरों की फोटो लगाए तो उसे उत्तर दिशा की तरफ लगानी चाहिए। वहीं, उसका मुंह दक्षिण दिशा में होना चाहिए। नियमों के अनुसार, कभी भी पितरों की फोटो बेडरूम या फिर ड्राइंग रूम में नहीं होनी चाहिए। इससे पितृदेव नाराज होते हैं जिससे परिवार पर कई तरह के संकट आ सकते हैं। घर में पितरों की एक से अधिक तस्वीर भी लगाना सही नहीं होता है। एक से अधिक तस्वीर लगाने से घर में पितृदोष उत्पन्न होता है और नकारात्मक ऊर्जा आने लगती है। रसोई घर और मंदिर में भी पितरों की तस्वीर लगाना अशुभ माना जाता है।
वहीं देवी देवताओं के साथ भी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए। पितरों की तस्वीर को लकड़ी के स्टैंड में रखना चाहिए। उसे लटका कर नहीं रखना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि घर में प्रवेश द्वार के सामने पितरों की तस्वीर ना लगी हो, इससे घर में नकारात्मकता आती है। शौचालय और स्नानघर के पास भी पितरों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए, इससे पितृ दोष उत्पन्न होता है। पितरों को समय समय पर याद करने से वे प्रसन्न रहते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्त होता है। जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
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