किस उम्र में बच्चों का कान छिदवाना चाहिए? जानिए सेफ्टी टिप्स: Ear Piercing of Babies
Best Time for Ear Piercing of Babies

किस उम्र में बच्चों का कान छिदलाना चाहिए? जानिए सेफ्टी टिप्स

Best time for ear piercing of babies: कान समय पर छिदवाना सही होता है, ताकि बच्चे अपने कान की अच्छे से देखभाल कर सकें। आइए जानते हैं कान छिदवाने की सही उम्र क्या है?

Ear Piercing of Babies: भारत में ही नहीं, दुनियाभर के कई हिस्सों में कान-नाक छिदवाने की परंपरा है। भारत के कई हिस्सों में कम उम्र में ही बच्चों के कान या नाक छिदवाए जाते हैं। अक्सर लोगों को यह पता नहीं होता है कि किस उम्र में कान-नाक छिदवाना सही होता है। कुछ बच्चों को ईयर पियर्सिंग कराने के बाद कान में इंफेक्‍शन हो जाता है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए बच्चों की पियर्सिंग कराने से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि आखिर बच्चों की किस उम्र में कान-नाक छिदलावा सही होता है?

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Ear Piercing of Babies
Baby Piercing

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्‍स के मुताबिक, बच्चों के कान छिदवाने की कोई उम्र तय नहीं की गई है। पियर्सिंग कराते समय अगर आप साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं, तो इससे इन्फेक्शन का खतरा कम हो सकता है।

हालांकि, भारत के कई क्षेत्रो में जन्म के तुरंत बाद ही बच्चों के कान छिदवा देते हैं, जिसकी वजह से बच्चों को काफी परेशानी हो सकती हैं। मेडिकल एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चों की पियर्सिंग तब करानी चाहिए, जब वे अपने कान की खुद देखभाल कर सकें। हर बच्चे की समझदार होने की उम्र अलग-अलग होती है, इसलिए कान छिदवाने की सही उम्र को निर्धारित नहीं किया गया है। जन्म के तुरंत बाद ईयर पियर्सिंग न कराएं, कोशिश करें कि 2 साल के बाद ही बच्चों की पियर्सिंग कराएं।

Ear Piercing
Baby Ear Piercing Right Time

कान या नाक छिदवाने के बाद घाव को भरने में करीब 4 से 6 महीने लग जाते हैं। इसलिए इस दौरान बच्चों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है, ताकि इन्फेक्शन के खतरों से बचाव किया जा सके। जैसे-

सप्ताह में कम से कम 1 से 2 बार कान को अच्छे से चेक करें, ताकि किसी तरह का कीटाणु या गंदगी न हो। अगर ऐसा हो तो इसे तुरंत साफ करें।

कान को हाथ लगाने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से क्लीन कर लें। गीले हाथों से कान को न छुएं, इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

कान छिदवाने के लगभग 20 से 25 दिनों के अंदर कम से कम 2 से 3 बार कीटाणुओं की सफाई करें, ताकि बैक्टीरिया न पनप सके।

पियर्सिंग के बाद धूल-मिट्टी से कान को दूर रखें, इससे कान में बैक्टीरिया कम पनपते हैं।

निक्की मिश्रा पिछले 8 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लिख रही हैं। उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी यूनिवर्सिटी से इकनॉमिक्स में एमए और भारतीय विद्या भवन से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की है। लिखना उनके लिए सिर्फ एक प्रोफेशन...