भगवान शनिदेव न्याय प्रिय देवता हैं, जो बेहद शक्तिशाली देव हैं। शनिदेव लोगों के कर्मों के अनुसार उन्हें फल देते हैं। हिंदू शास्त्र के अनुसार शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा का दिन माना जाता है। इस दिन शनिदेव की पूजा.अर्चना करने से मनुष्य के जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। लोक प्रचलित मान्यता हैं कि व्यक्ति के सामाजिक जीवन को समृद्ध बनाने में उपहार भी एक बड़ा कारण होते हैं । वैसे तो किसी भी वस्तु को खरीद कर उसे भेंट करने का समय उसकी जरूरत पर निर्भर करता है । परंतु ज्योतिष शास्त्र में भी इसके कुछ नियम बताए गए हैं। ऐसा माना जाता है कि शनिवार के दिन अगर कुछ खास वस्तुएं किसी को उपहार के तौर पर भेंट की जाती हैं, तो कुंडली में शनि का बल कमजोर पड़ जाता है या यूं कहे कि कुंडली में शनि की अशुभता बढ़ने लगती है। साथ ही इन चीजों को भेंट करना शनिदेव को क्रोधित कर सकता है। आइए जानते हैं उन खास वस्तुओं के बारे में।

 

चमेली का इत्र

चमेली का इत्र कुछ लोग खूब पसंद करते हैं। मगर ज्योतिष के अनुसार शनिवार के दिन चमेली का इत्र यदि किसी व्यक्ति को भेंट दिया जाता है। तो इससे न सिर्फ वो व्यक्ति बीमार पड़ सकता है बल्कि उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

 

सफेद कपड़े का उपहार

शनिवार के दिन सफेद कपड़े का उपहार देने से परिवार में परेशानी आ सकती है। इसके अलावा पति.पत्नी के रिश्ते में भी तनाव पैदा हो सकता है।

 

धातु के बर्तन

हिंदू शास्त्रों के अनुसार शनिवार के दिन किसी व्यक्ति को धातु के बर्तन देने से शनिदेव क्रोधित होते हैं जिससे व्यापार में भारी नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है।

 

लाल वस्त्र भेंट 

शनिवार को किसी व्यक्ति को लाल वस्त्र भेंट करने से समाज में उसका मान.सम्मान कम हो जाता है। साथ ही रिश्तों में कड़वाहट आने का भी भय बना रहता है। 

 

चांदी के आभूषण 

शनिवार के दिन किसी को चांदी के आभूषण देने से परिवार में भारी आर्थिक तंगी आ सकती है।

 

रंग बिरंगी मिठाइयां

शनिवार के दिन इमरती या जलेबी जैसी नारंगी रंग की मिठाइयां भेट करने पर व्यक्ति के साथ दुर्घटनाओं के योग बनने लगते हैं ।

 

लाल स्याही वाली कलम 

शनिवार के दिन लाल स्याही वाला पैन खरीदकर उपहार देने से व्यक्ति अपयश का भागी बनती है ।

 

कैंची

लोहे या स्टील की कैंची किसी को उपहार देने से रिश्तेदारों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है।

 

हिंदू शास्त्र के अनुसार शनिदेव को कई नामों से जाना जाता है। कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, कृष्ण, रौद्रान्तक, यम, सौरि, शनैश्चर, मंद और पिप्पलाद जैसे दस नाम हैं। वह सूर्यदेव और छाया माता के पुत्र है, इसलिए इन्हें छायापुत्र भी कहा जाता है। शनिदेव न केवल कर्मफल दाता है बल्कि दंडाधिकारी भी हैं। ये व्यक्ति के बुरे कर्मों का फल देकर उन्हें दंड भी देते हैं। शनिदेव की उपस्थिति किसी के जीवन में अनुशासन, समय की पाबंदी और धार्मिकता को दर्शाती है।

 

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