How can I please Shani Dev at home?
दिन की शुरूआत ईश्वर की आराधना से होती है। हमारे समाज में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। अधिकतर घरों में पूजा का एक विशेष स्थल बनाया जाता है। जहां परम पिता परमात्मा की भक्ति के साथ उन्हें दिन के मुताबिक भोग और प्रसाद भी चढ़ाए जाते हैं। अगर धार्मिक ग्रथों की बात करें, तो कुछ ऐसे देवी ेवता भी है, जिनकी तस्वीरें यां मूर्तियों को घर में रखना वर्जित माना जाता है। इन्हीं में से एक शनिदेव की प्रतिमा भी है। ऐसा माना जाता है कि उन्हें अपने पत्नी से श्राप मिला था। जी हां उनकी पत्नी ने उनसे रूष्ठ होकर ये श्राप दिया था कि अगर वो किसी को भी देखेंगे, तो वो नष्ट हो जाएगा। ऐसे में उनकी दृष्टि से बचने के लिए घर में उनकी फोटो यां तस्वीर रखना वर्जित माना जाता है। शनिदेव की पूजा के लिए मंदिरों में जाकर उनकी अराधना की जा सकती है। साथ इस बात को हमेशा जहन में रखें कि अगर आप शनिदेव की पूजा कर रहे हैं, तो उनके मुख की बजाय हमेशा चरणों की ओर अपनी दृष्टि बनाए रखें। इसके अलावा उनकी भक्ति के वक्त
 ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीपतये शनयो रविस्र वन्तुनः मंत्र का निरंतर जाप करें।
शनिवार के उपाय
शनिवार के दिन उपवास रखकर शनिदेव की अराधना करने से आप शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं। इससे न सिर्फ शनिदेव खुश होंगें बल्कि आपकी कुंडली में भी शनि ग्रह कमज़ोर नहीं रहेगा। इस दिन सेवा भाव से किया गया दान पुण्य विशेष फलदायक साबित हेता है। इस दिन कई लोग काले रंग की चीजें जैसे दाल और कपड़े इत्यादि दान में देते हैं। इस बात का विशेष तौर पर ख्याल रखें कि अगर आप शनिवार का व्रत कर रही हैं, तो इस दिन किसी भी बुरी चीज़ के सेवन से बचें। इसके अलावा शनिदेव की पूजा अर्चना आपको कई दुष्ट चीजों से भी बचाने का प्रयास करती है। अगर आप साढ़ेसती से गुज़र रहे हैं, तो शनिदेव का नियमित उपवास और विधि विधान से की गई पूजा अर्चना आपके कष्टों को दूर करती हैं।  
इस तरह से करें शनिदेव की पूजा 
सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर लें। इसके बाद एक लकड़ी की तिपाही यां कोई भी घर में उपलब्ध पट्टा लेकर उसपर लाल कपड़े को बिछाएं। अब इस तिपाही पर आप शनिदेव की प्रतिमा यां तस्वीर के समान एक सुपारी को पंचामृत से स्नसन करवाने के बाद उस स्थान रखें और फिर सुपारी के दोनों ओर घी के दीप प्रज्जवलित कर दें। इसके बाद अब सुपारी पर अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम व काजल लगाकर नीले फूल चढ़ाएं। इसके बाद इमरती और तेल में तले अन्य पकवानों का भोग लगवाएं। इसके साथ ही शनिदेव को श्रीफल और अन्य फल भी अवश्य चढ़ाएं। पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद शनिमंत्र का जाप करें।  
जानिए उन देवताओं की मूर्तियों के बारे में, जिन्हें घर में रखना है वर्जित 
राहुण्केतु की मूर्ति
नटराज की मूर्ति
भैरव की मूर्ति