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अपनेपन की महक-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Apnepan ki Mahak

अपनेपन की महक-सोमेश ने घर में घुसते ही सभी को आवाज लगाई ,चलो सभी सुगंधा (सोमेश की पत्नी ) नितिन ( बेटा ) नीति (बेटी) जल्दी इधर आ जाओ ।नए घर का नक्शा बनकर आ गया है, जिसको जो भी चेंज कराने हो अभी बता देना, एक बार नक्शा फाइनल हो गया तो फिर कुछ नहीं हो सकता।

सोमेश अपने पुराने घर को फिर से तुड़वा कर नए अंदाज में नया घर बनवाना चाहता था ,क्योंकि घर काफी पुराना हो गया था और मरम्मत मांग रहा था ,और बच्चे भी बड़े हो रहे थे,तो उनके हिसाब से भी घर को सेट कर आना था।

सुगंधा ने रसोई से आवाज लगाई आप तीनों देखिए ,मैं अभी दस  मिनट में आती हूं । नितिन और नीति बहुत खुश थे अपने बड़े-बड़े कमरों का नक्शे को देखकर ,चहक रहे थे । नीति ने कहा, पापा मुझे यहां स्टडी टेबल लगवाना है ,तो नितिन ने कहा मुझे म्यूजिक सिस्टम के लिए  बड़ी जगह चाहिए, इसी तरह दोनों अपनी फरमाइश अपने पापा को बताने लगे।

पुराने घर में पांच कमरे थे,जिनकी जगह अब नक्शे में चार बड़े कमरे थे ।उस नक्शे में, एक कमरा सोमेश- सुगंधा का, एक नीति का ,एक नितिन का,और एक गेस्ट रूम ।

इतने में ही सुगंधा आती है और नक्शा देखती है सोमेश और बच्चों से कहती है इसमें एक सदस्य का कमरा तो है ही नहीं सभी उसकी तरफ आश्चर्य से देखते हैं । बच्चों ने कहा किसका कमरा नहीं है मां?

सुगंधा ने कहा तुम्हारी मंजुला बुआ भी तो इस घर की सदस्य हैं, मां बाबूजी के बाद उन्हें ऐसा कतई नहीं लगना चाहिए कि वह इस घर की सदस्य नहीं है…

पर मां गेस्ट रूम तो है ना बुआ के लिए ,नीति ने कहा…

सुगंधा बोली क्या तुम चाहोगी कि शादी के बाद तुम्हें भी इस घर में गेस्ट समझा जाए , बेटियां कभी पराई नहीं होती, उन्हें शादी के बाद भी इतना ही अपनापन वह सम्मान मिलना चाहिए, जितना की शादी से पहले,सुगंधा ने प्यार से दोनों बच्चों को समझाया। इतना सुनकर सभी चुप हो गये…

सोमेश ने सभी की चुप्पी तोड़ते हुए कहा , तुम्हारी मां सही कहती है ,बुआ भी इसी घर की सदस्य है,और हमें रिश्तो_का _सम्मान करना चाहिए।

फिर क्या था,सभी ने नए सिरे से अपने कमरे थोड़े छोटे-छोटे कर बुआ की कमरे की भी जगह निकाल ली और और साथ ही बुआ के कमरे के साथ एक छोटे से, प्यारे से, पूजा घर की भी जगह निकाल ली, जो ठीक मां बाबूजी जी के कमरे की जगह पर ही था।

कुछ समय बाद घर के मुहूर्त पर जब बुआ घर आई,तो सबसे ज्यादा खुश आज मंजुला बुआ ही थी, क्योंकि आज  भी उन्हें इस घर में अपनेपन की महक जो आ रही थी,और अपने कमरे से जुड़े पूजा घर में उन्हें मां बाबूजी के होने का एहसास आज भी हो रहा था।

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