Vastu For Kitchen: हिंदू धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व होता है। घर का हर एक कोना बहुत महत्वपूर्ण होता है। घर के हर कोने के लिए वास्तु शास्त्र में कुछ ना कुछ नियम जरूर बताए गए हैं। आज हम खासतौर पर किचन से जुड़े नियमों के बारे में जानेंगे। किचन, घर का हृदय माना जाता है, जहां अन्नपूर्णा माता और अग्नि देवता का वास होता है। इस पवित्र स्थान में, वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी की दिशा का विशेष महत्व होता है। वास्तु के अनुसार, किचन में पानी की सही दिशा होनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के नियमों का ज्ञान न होने के कारण हम जाने अनजाने में घर के किचन में पानी गलत दिशा में रख देते हैं जिस वजह से घर में आर्थिक तंगी, बीमारी जैसी समस्या होने लगती है। वास्तु शास्त्र, घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने के लिए दिशाओं और स्थानों का महत्व बताता है। पानी, जीवन का आधार होने के नाते, वास्तु में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसलिए चलिए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन में पानी का स्थान किस दिशा में होना चाहिए।
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किचन में पानी रखने का सही स्थान
वास्तु शास्त्र में, दिशाओं का बड़ा महत्व होता है। इन दिशाओं का प्रभाव हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ता है, जिसमें धन, स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा भी शामिल हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, किचन में पानी की दिशा का धन और घर में उन्नति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। धन लाभ और उन्नति के लिए किचन में पानी की सही दिशा समझना बहुत जरुरी है। उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण भी कहा जाता है, धन और समृद्धि के देवता, कुबेर का प्रतिनिधित्व करती है। यह दिशा सबसे शुभ मानी जाती है, क्योंकि यहां पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। यह माना जाता है कि उत्तर-पूर्व दिशा में पानी रखने से घर में धन-दौलत का आगमन होता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इस दिशा में पानी रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह दिशा ग्रहों की शुभ ऊर्जाओं से भी जुड़ी है, जिससे मानसिक शांति और एकाग्रता में वृद्धि होती है। वास्तु के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा में पानी रखने से स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं और रोगों का नाश होता है। पूर्व दिशा सूर्योदय का प्रतिनिधित्व करती है, जो नई शुरुआत और विकास का प्रतीक है। यहां पानी रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे व्यापार में वृद्धि और करियर में उन्नति होती है।
इस दिशा में क्यों नहीं रखना चाहिए पानी
घर में पानी रखने के लिए भी दिशाओं का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। दक्षिण और पश्चिम दिशा को पानी रखने के लिए अशुभ माना जाता है, क्योंकि इन दिशाओं से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है। दक्षिण दिशा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। पानी और अग्नि एक दूसरे के विपरीत तत्व हैं, जिससे इन दिशाओं में पानी रखने से अग्नि और जल के बीच टकराव हो सकता है। यह धन संबंधी समस्याओं, घर में कलह-कलेश और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बन सकता है। पश्चिम दिशा सूर्यास्त का प्रतिनिधित्व करती है। यह दिशा सूर्य देवता से संबंधित है, जो दिन के अंत और अंधेरे का प्रतीक है। इस दिशा में पानी रखने से नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मकता का प्रवाह बढ़ सकता है। इससे धन की हानि, घर में नकारात्मकता और मानसिक तनाव हो सकता है।
इन बातों का भी रखें विशेष ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में टपकता नल शुभ नहीं माना जाता है। यह धन हानि और नकारात्मकता का प्रतीक है। चूंकि पानी धन का प्रतीक है, इसलिए टपकते नल से लगातार पानी का बहना धन की बर्बादी और आर्थिक नुकसान का संकेत देता है। इसके अलावा, टपकते नल से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे घर में अशांति, कलह-कलेश और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। लगातार टपकते नल से पानी का बहना धन की बर्बादी और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है टपकते नल से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जिससे घर में अशांति, कलह-कलेश और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
मुख्य द्वार घर का प्रवेश द्वार है, जहां से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा दोनों का प्रवेश होता है।वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर पानी का नल लगाना अशुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और घर के सदस्यों की उन्नति में बाधा आ सकती है। इससे घर में अशांति, कलह-कलेश और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
