Hindi Kahani: मैं अपनी पूजनीय दादाजी श्री युगल किशोर मिश्रा जो अब इस दुनिया में नहीं रहे जी को याद करते हुए उनकी एक छोटी सी बात जिसका जीवन में मूल्य बहुत ही बड़ा और सार्थक है।
जो हर एक पल जिंदगी जीने के लिए बेहद ही मोटिवेट करती आई है। उसे आप सभी लोगों से शेयर कर रही हूं।
दादा जी श्री युगल किशोर जिंदगी को बहुत ही बिंदास तरीके से जीते आए थे, उनका कहना था कि जिंदगी जिंदादिली का नाम है।
दादाजी हमेशा हम लोग से भी कहते रहते थे यह रंगमंच है यहां अपना—अपना किरदार सबको करके जाना है। तो क्यों ना हम कुछ बेहतर करके जाएं और अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाएं। कितनी भी विपरीत से विपरीत परिस्थिति आए उनका एक शब्द की ‘हम है ना कहना’ सभी कामों को आसान बना देता था।
वाकई सच में जब यह कोई कहने वाला हो तो बहुत ही हल्का सा जीवन हो जाता है। इस शब्द में इतनी अधिक ऊर्जा और ताकत है…….
आज वो तो नहीं हमारी जिंदगी में लेकिन उनकी दी हुई सीख, उनका उचित मार्गदर्शन, हमारे जीवन में जिंदादिली तो लाया ही जिसकी वजह से मैं भी जिंदगी को बिल्कुल बिंदास उन्हीं के अंदाज में जी रही हूं । साथ ही साथ मैं भी अपने बच्चे को हमेशा किसी भी विपरीत परिस्थिति में हौसला बढ़ाती हूँ। और उन्हीं के अंदाज में कहती हूं ‘मैं हूं ना’………।
