बच्चों को दें अच्छे संस्कार-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Baccho ko de Ache Sanskar

Hindi Kahani: हर माता पिता अपने बच्चे से बहुत अधिक प्रेम करते हैं। अभिभावक हमेशा चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ और सुखी रहे। बच्चे की खुशियों के लिए वह उनकी लगभग सभी मांगें भी पूरी करना चाहते हैं। इसके अलावा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते हैं।

लेकिन अक्सर माता पिता बच्चे के प्रेम में कुछ ऐसी गलतियां कर जाते हैं, जो बच्चे के व्यवहार पर दुष्प्रभाव डालता है। बच्चे के पालन पोषण के दौरान उनकी हर जरूरत को पूरा करने के साथ ही बड़ी छोटी मांगों को पूरा करना, उनकी गलतियों को नजरअंदाज करना, उनके जिद्दी और गुस्सैल रवैए को बिना रोक टोक अपना लेने से बच्चा बिगड़ने लगता है और उसका भविष्य भी खराब होने लगता है।

ऐसे में माता पिता को चाहिए कि वह बचपन से बच्चे को संस्कार और अनुशासन सिखाएं, ताकि बच्चा एक आदर्श इंसान, अच्छा बेटा और सफल नागरिक बन सके। बच्चे अगर अपने मन मुताबिक कार्य करना चाहते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं लेकिन छोटी उम्र में उन्हें सही गलत का पता नहीं होता। ऐसे में मन मर्जी से किया हुआ कार्य गलत राह पर भी ले जा सकता है।

इसलिए माता पिता को बच्चों में शुरुआत से पूछकर कार्य करने की आदत डलवानी चाहिए। बच्चों को संस्कार सिखाने के लिए सबसे जरूरी है कि उन्हें बड़ों और अपने से छोटों का सम्मान करना सिखाएं।
बच्चा अपने माता पिता का प्यार किसी दूसरे से साझा नहीं करना चाहिए। कम उम्र में जब बच्चे का छोटा या बड़ा भाई- बहन या दूसरे बच्चों के साथ उन्हें रखा जाता है, तो वह अपने माता पिता को दूसरे बच्चे से लाड प्यार करते देख चिढ़ते हैं। इसके अलावा घर पर दो या दो से अधिक हमउम्र बच्चों की लड़ाई की एक वजह भी यही होती है कि वह एक दूसरे से अपनी चीजें साझा नहीं करना चाहते। ऐसे में बच्चे को शेयरिंग सिखाएं। दूसरे से अपनी चीजें बांटना, कुछ खाने पीने से पहले दूसरों से पूछना और स्वार्थ न दिखाना, यह सब बच्चों में अच्छे संस्कार के गुण बनते हैं।

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