Hindi Kahani: दो दिनों से आरव का कोई पता नहीं था उसकी मां कुसुम बेचैनी से उसका इंतजार कर रही थी। पहले उसने बताया कि उसे कंपनी की तरफ से इलाहाबाद जाना है।
बीते कुछ दिनों से आरव का स्वभाव कुछ बिगड़ा हुआ सा नजर आ रहा था– ना जाने क्यों?
या तो काम का प्रेशर होगा या फिर वयस्क होने वाली समझ, अपनी छोटी दोनों बहनों की शादी का दबाव।
कुसुम उसके बदलते हुए स्वभाव को देख भी रही थी और समझ भी रही थी ।
जवान हो चुके लड़के को कितना टोके। चाहती तो वह पूछ भी सकती थी मगर वह चुप ही रही। हो सकता है उसकी गर्लफ्रेंड छाया भी कोई वजह हो।
सब कुछ देखते सुनते हुए भी वह चुप ही रह रही थी।
कुसुम के पति विकास कुसुम को और उसके तीनों बच्चों को छोड़ दूसरी शादी कर लिया था।
बड़ी ही मुश्किल था वो दौर जिसे कुसुम ने बिता दिया था अपने सीने पर पत्थर रखकर और अपने अबोध बच्चों का चेहरा देखकर।
रोते बिलखते वह अपने तीनों बच्चों को लेकर अपनी मायके की देहरी पर आकर खड़ी हो गई थी “मां बस मुझे छत चाहिए कहां जाऊंगी मैं अपने तीनों बच्चों को लेकर!”
हालांकि विकास ने अपने कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ा था बल्कि उसे एक फ्लैट भी दे दिया था और गुजारे भत्ते के रूप में पैसे भी हर महीने भेजने लगा था।
थोड़े दिनों के बाद वह अपने तीनों बच्चों के साथ इस फ्लैट में शिफ्ट हो गई और पति की तरफ से मिले हुए पैसे से ही वह अपने बच्चों को पालने लगी ।
वह सिलाई कटाई में दक्ष थी। अपने घर के नीचे में ही उसने बुटीक खोल लिया और उसे चलाने लगी। कुछ और पैसे आ जाते थे। धीरे-धीरे उसका बुटीक चल निकला।
पिता का प्यार तो वह नहीं दे सकती थी मगर बहुत ही प्यार उड़ेलकर उसने अपने तीनों बच्चों को पालने लगी।
बड़ा बेटा आरव बहुत ही खुश मिजाज था और बहुत ही समझदार। जब वह पढ़ रहा था तब अपनी मां से कहता “मां आप चिंता मत करना। मैं आपकी सारी चिंताएं दूर कर दूंगा। पढ़ लिखकर मैं एक अच्छा अफसर बनूंगा और फिर अपनी दोनों बहनों की शादी ब्याह भी करूंगा। उन दोनों की शादी किए बगैर मैं अपनी शादी नहीं करने वाला। पहले उन्हें विदा करूंगा फिर अपनी शादी करूंगा।”
कुसुम की आंखें भर आतीं। भगवान से मन ही मन हजारों बार प्रार्थना करती “भले ही पति मेरा नहीं हो पाया मगर उसने बेटा तो मुझे सोने सा दिया!”
सब कुछ आहिस्ता आहिस्ता ठीक चल रहा था।बारहवीं के बाद आरव ने इंजीनियरिंग निकाल लिया था। जेईई में अच्छे रैंक लाने के कारण उसे सरकारी कॉलेज में स्कॉलरशिप में एडमिशन हो गया था। बहुत ही मामूली फीस पर उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई किया।पढ़ाई खत्म होने के साथ ही उसे कैंपस में नौकरी मिल गई।
कुसुम के सिर से सारी चिंताएं एकाएक मिट गई थीं।अब उसे लगता था आरव अपनी नौकरी से रिशु और इशू दोनों की शादी की जिम्मेदारी उठा लेगा। उसकी दोनों जुड़वां बेटियां भी धीरे-धीरे जवानी की दहलीज की ओर बढ़ ही रहीं थीं।
आरव भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी से निभा रहा था। सैलरी मिलते ही वह सारे पैसे अपनी मां के हाथ में दे देता था ।
“मां इसे रिशु के नाम पर एफडी कर देना कभी वह रिशु के नाम पर एफडी करवाता। कभी कोई योजना पत्र, कभी कुछ खरीद लेता।
इसी बीच उसकी दोस्ती छाया नाम की लड़की से हो गया था। वह उसके ही कंपनी में सहकर्मी थी। वह उसे पसंद भी करने लगा था। कुसुम को अपनी तरफ से वह बिल्कुल भी पसंद नहीं थी लेकिन वह आरव पसंद में ही खुश थी।
सब कुछ ठीक चल रहा था मगर तीन-चार महीने से न जाने आरव के दिमाग में क्या चल रहा था।
वह इलाहाबाद जाने के बहाने वहां से चला गया था। ना तो पहुंचने की कोई खबर दिया और ना ही वापस लौटने की!
कुसुम का मन घबरा रहा था। ऐसा तो नहीं कि विकास ने उसे बहलाफुसला कर अपनी तरफ कर लिया है।
वह हैरान परेशान जब तब उसे फोन कर रही थी मगर फोन भी अनरिचेबल आ रहा था।
उसे परेशान देखकर उसकी बड़ी बिटिया रिशु ने उससे पूछा “क्या हुआ मां, आप परेशान क्यों हैं ?”
“क्या करूं रिशु, देखो ना तुम्हारा भैया फोन ही नहीं उठा रहा! कह कर गया था दो दिन के लिए इलाहाबाद जा रहा हूं मगर ना तो पहुंचने की खबर!ना आने की खबर! कहां गया, क्या हुआ कुछ समझ में ही नहीं आ रहा?”
रिशु भी परेशान होकर अपने भाई को फोन करने लगी। मगर फोन अनरीचेबल आ रहा था। वह भी परेशान हो गई ।
“मां भैया आ जाएंगे आप चिंता मत करो!”
दो दिन और बीत गए ।”अब हमें पुलिस की मदद लेनी चाहिए मां!”
“मैं उसके किसी दोस्त से बात करके देखती हूं।पहले मुझे उसके कंपनी में जाकर बात करनी होगी।”
आरव छाया को छोड़कर अपने घर में ना तो किसी दोस्त को लेकर आता था और नहीं किसी दोस्त की चर्चा करता था इसलिए किसी को कुछ भी नहीं पता था कि वह कौन है? क्या है ?”
दोनों मां बेटी तैयार होकर आरव के ऑफिस पहुंच गई। वहां जाकर उन्होंने आरव के बारे में पूछताछ किया तो पता चला कि आरव तो को कंपनी ने इलाहाबाद तो भेजा ही नहीं था !!!
“फिर आरव कहां चला गया?”
“पता नहीं!!”
सब लोग हैरान थे। आरव कहां चला गया?
“आंटी परेशान न हों आप।हम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवा लेते हैं।”
“चिंता तो करना ही पड़ेगा बेटा!ये तो चिंताजनक बात है!”
हार-पारकर सबने ने पुलिस स्टेशन का दरवाजे खटखटाया। पुलिस भी हैरान थी।
इतना होनहार, समझदार नवयुवक ऐसा कैसे कर सकता है!
यहां तक कि उसकी गर्लफ्रेंड छाया को भी कुछ नहीं मालूम था कि आरव है कहां?
पुलिस ने अपनी तहकीकात जारी रखा ।
इस बीच पता चला कि कुछ महीनो से आरव और उसके कुछ दोस्त किसी “जीने दो!” नाम की संस्था से जुड़े हुए थे। जहां उच्चतर जीवन के बारे में बताया जाता था, तपस्या के बारे में बताया जाता था।
मानव जीवन कितना हेय है । इससे ऊपर उठने के लिए क्या-क्या करना चाहिए, यह सब बताया जा रहा था।
कुछ दिनों से आरव अपने दोस्त के साथ वहीं जाने लगा था और वहीं के बाद वह लापता हो गया था।
पुलिस ने छानबीन जारी रखी और ‘जीने दो’ संस्था पर छापा मारा। वहां का तथाकथित बाबा गिरफ्तार हो गया।
पुलिस ने उगलवाया तो उसने बताया पता चला मेडिटेशन के नाम पर वह बच्चों के दिमाग के साथ खिलवाड़ करता था। उन्हें अपने नशे की जाल में फंसा रहा था।
संस्था से आरव और ऐसे ही कुछ और नवयुवकों को नशे की हालत में बरामद कर लिया गया।
आरव भी अन्य लोगों के साथ कई दिनों तक अस्पताल और रिहैब केंद्र में रहने के बाद अब ठीक हो गया था।अब उसकी आंखें खुल चुकी थीं ।
“मुझे माफ कर दीजिए मां! मैं अपराध बोध से ग्रस्त हो गया था। आपके तमाम दुख-तकलीफ़ और मेरी दोनों बहनों की भावी जिंदगी मुझे परेशान करती रहती थी। पापा की गलतियां मुझे अपनी गलती लगती थी इसलिए मैं शांति की खोज में घर से भाग निकला था। मैं घर छोड़ देना चाहता था…!”आरव सिसकने लगा था।
“यह तो क्या कर रहा था बेटा! तू नहीं रहता तो हमारा क्या होता?” कुसुम और उसकी दोनों बेटियां फूट-फूटकर रो रही थीं।
“ कोई बात नहीं, जब जागो तब सवेरा!अपनी बूढ़ी होती मां और जवान बहनों का सहारा बन जाओ। यह भी एक तपस्या है बेटा। बल्कि यही सच्ची तपस्या है!!”पुलिस कमिश्नर आरव के कंधे थपथपाते हुए बोले।
“कैसी कैसी तपस्या!! कुसुम की दोनों आंखें बह रही थीं ।
“क्या करे आरव! बेचारा कभी बोल भी नहीं पाया खुलकर,रो भी नहीं पाया।वह भी तो एक इंसान है। जिंदगी ने उसे नफरत के अलावा दिया भी क्या है?”
“घर चलो बेटा! जैसे हम पहले खुशी-खुशी रहते थे वैसे ही फिर से रहेंगे। तुम्हारे बगैर घर सूना हो चुका है। उसे हरा भरा तुम ही कर सकोगे।”
कुसुम उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली।
आरव अपनी डबडबाई आंखों से कुसुम के दोनों हाथ पकड़ कर अपने चेहरा उसमें छुपा लिया।
