Hindi Love Story: ऑनलाइन के इस युग में कोविड के लॉक डाउन के बाद से हजारों लेखक लेखिकाओं और कवि कवियित्रियों का जन्म हुआ यह सच ही है। इनके लिए भी आनलाइन मंच वरदान साबित हुए।
इनमें से कुछ में तो शायद यह प्रतिभा जन्म से ही रही थी जिसे निखारा इंटरनेट के माध्यम से “ऑनलाइन इन मंचों ने। इसी का फायदा उठाते हुए कुछ मनचले लड़के भी लड़कियां बनकर लड़कियों से दोस्ती कर रहे हैं। फेसबुक इंस्टाग्राम वाट्सऐप जैसी सोशल साइट्स पर तो यह आम बात थी पर अब साहित्य जगत में भी यह आम ही हो गई है।
एक दिन एक साहित्यिक ऐप पर शशि जिसे लिखने पढ़ने का शौक ही उस मंच तक ले आया था वहां एक लेखिका की रचना पढ़ने के बाद समीक्षा करते वक्त एक समीक्षा ने उस आई डी खंगालने के लिए विवश कर दिया था।
‘आखिर कौन है यह जिसने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया?’
जब शशि ने वो समीक्षा पढ़ी जिसमें लिखा था…
‘आप प्रेम कविता लिखा कीजिए यह सब क्या लिखतीं हैं। सिर्फ प्रेम प्रेम और प्रेम पर ही अपनी कलम को गति दीजिए और हाँ आप अपनी प्रोफाइल फोटो ओरिजनल डालिए। यह आलतू फालतू बेकार सी फोटो क्यों डाल रखी है? हटा दीजिए ऐसी फोटो और अब जब भी आपकी नई रचना आएगी तो ध्यान रखिएगा मेरी बात।’
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ना जाने इस समीक्षा में क्या था कि शशि खुद को रोक ही नहीं पाई और इस व्यक्ति विशेष के बारे में जानने की उत्सुकता हो गई उसे।
,,और जब उसने वो आई डी खोलकर देखी तो स्तब्ध रह गई वो प्रोफाइल फोटो देखकर और उसके नीचे परिचय की दो पंक्तियां पढ़कर। उसके हाथ से फोन गिरते-गिरते बचा।
‘हे भगवान ये कौन है?’
कोई लड़की कभी अपनी या किसी भी लड़की की ऐसी अर्द्धनग्न और काम उत्तेजना से भरी तस्वीर अपनी प्रोफाइल में डाल ही नहीं सकती।
गुलाबी साड़ी में अपने वक्ष स्थल का प्रर्दशन करते हुए एक बहुत ही अश्लील घटिया औरत लग रही थी।
कोई लेखिका या कवियत्री ऐसी हो ही नहीं सकती। परिचय में जो पंक्ति लिखी थी…
‘मुझे भी पढ़ लेना रकीबों मैं अपनी वासना का मंजर लिखती हूं।’
अंशिका सिन्हा’अंशु’
फोटो के नीचे यही नाम लिखा था।
शशि ने उस प्रोफाइल पर प्रकाशित सभी कहानियां और कविताएं देखनी शुरू की तो देखा कि वो सब बहुत ही अश्लील थी जो शायद ही कोई लेखिका लिख सकती है।
प्रेम का अर्थ अश्लीलता फैलाना तो नहीं है। ऐसे लोगों को कैसे आई डी बनाने देते हैं यह साहित्यिक ऐप। इन पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
शशि को यह आइ डी देखते ही ऐसा लगा जैसे कोई लड़का किसी लड़की को बदनाम करने या उसे ब्लैक मेल करने के लिए ऐसा कर रहा है। अपनी कल्पना में एक तरफ तो वो उस लड़की के दर्द को भी महसूस कर रही थी जिसे पता ही नहीं है कि उसके नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है और उसे बदनाम किया जा रहा है।
,,और दूसरी तरफ उसे लग रहा था कि
हो सकता है इस लड़के ने प्यार में धोखा खाया हो जिस लड़की के नाम की यह आइ डी है उसने इस लड़के से प्यार के नाम पर बेवफाई की हो और किसी दूसरे से शादी कर ली हो। उसी का बदला वो ले रहा हो।
पर यह तो सरासर गलत है। ऐसा तो नहीं करना चाहिए किसी भी लड़की के साथ। शशि विचार मंथन में लगी हुई थी।
आजकल प्यार में धोखा खाया पुरुष या तो उस लड़की पर तेजाब फेंक कर उसका चेहरा बर्बाद कर देता है या अपने ही दोस्तों से उसका बलात्कार करवाकर उसकी जिंदगी बर्बाद कर देता है।
शशि रात भर उसी आई डी के बारे में सोचती रही और नींद उससे कोसों दूर थी। वो अपनी अधूरी कहानी भी पूरी नहीं कर पा रही थी और ना ही कुछ लिख पा रही थी क्योंकि उसके जेहन में सिर्फ और सिर्फ एक वही नाम, फोटो और वो दो पंक्तियां घूम रहीं थीं। उसे पूरा विश्वास हो गया था कि यह आई डी फेक ही है। उसने निश्चय किया कि अपने अन्य साहित्यिक मित्र जो इसी प्लेटफार्म से जुड़े हैं उन्हें आगाह कराने के लिए कुछ लिखेगी। यह बहुत जरूरी है कि इस आइ डी की असलियत सबके सामने आए।
उसने मन में आए भावों को एक कविता के रूप में लिख डाला जिसमें उसने ‘मैं स्त्री हूं’ विषय पर कुछ ऐसा लिखा कि भगवान उन सभी पुरुषों को स्त्री ही बना दें जो पुरुष होने के बावजूद स्त्री नाम से सोशल साइट्स और साहित्यक मंच से जुड़ जाते हैं। एक स्त्री जिन शारिरिक कष्टों से गुजरती हैं वो भी गुज़रे। मासिक धर्म और गर्भधारण में होने वाले सभी तकलीफ़ उन्हें भी मिले। फिर वो यह भी भूल जाएं कि वो पुरुष हैं या स्त्री।
शशि का अशांत मन अपने मन के भावों को लिखकर प्रकाशित करने के बाद थोड़ा शांत हुआ और उसे लगा लोग उसकी बात समझेंगे पर वो कहां जानती थी कि उसकी जिंदगी में भूचाल आने वाला है। इस बात से पूर्णतः अंजान वो अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए एक और कविता का सहारा ले लिख गई थी वो सब जो उसके साथ साथ दूसरी कई लेखिकाओं के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता था।
उस फेक आई डी वाले ने उसकी दोनों कविताओं पर अभद्र कमेंट तो किए ही और शुरू हो गया शब्दों का युद्ध। शब्द बाण और फिर अग्नि बाण नाम से कविता शशि को इंगित कर इस तरह लिखी कि शशि के सीने में जैसे तीरों की बौछार कर दी। कई महीने उसने किसी भी साहित्यिक मंच पर जाना ही छोड़ दिया वो अवसाद की शिकार होने लगी।
एक दिन उसी ऐप के मैसेज बॉक्स जब उसने पढ़ा कि ‘तुझको क्यों लगता है कि मैं लड़की नहीं लड़का हूं। देखना चाहोगी मैं कौन हूं तो वाट्सएप नम्बर भेज जल्दी से। बहुत भी दिलचस्पी ले रही हो मुझ में। मुझे भी देखना है तुझे कि तू कैसी दिखती है। मेरे काम की है या नहीं । तूने बस ऐसे ही मेरे बारे में बकवास लिखना शुरू कर दिया है।’
उसके बाद लगातार उस आई डी से शशि को मैसेज करने लगा वो लड़का।
शशि के खिलाफ एक तरफ तो सभी लेखिकाओं को भड़काया और दूसरी तरफ उनसे दोस्ती का हाथ बढ़ाया। जो शशि समझ पा रही थी वो किसी को क्यों नहीं दिख रहा था। कई लेखिकाएं उसके बहकावे में आकर उसे अपना नम्बर तक दे बैठीं। फिर वो उनसे वाट्सएप पर लड़की के रूप में ही पहले तो साहित्य से जुड़ी बातें करता फिर अश्लील बातें करता और अश्लील तस्वीरें भेजता। जब सच्चाई का पता चलता तो वो उस नम्बर को ब्लॉक कर देतीं। वो फिर अपने दूसरे सिम से परेशान करना शुरू करता।
उसकी हिंदी बहुत अच्छी थी ऐसा सभी नए लेखक लेखिकाओं का मानना था। वो शुद्ध हिन्दी के कठिन शब्दों का प्रयोग करता जिससे मंच से जुड़े सभी पुरुष लेखक तो उसकी तरफ आकर्षित होते ही थे और लेखिकाएं भी उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पातीं थी। बहुत दिनों तक यह खेल चलता ही रहा।
शशि की ही एक सखी बनी थी राधिका जो उसे दीदी कहती थी और चैट बॉक्स में उससे मैसेज किया करती और उसकी रचनाओं की तारीफ करती।
राधिका भी अंशिका सिन्हा ‘अंशु’ नाम वाले उस लड़के जिसका असली नाम अविनाश सिन्हा था, के झांसे में बुरी तरह फंस गई थी । अपने पति और तीन साल के बेटे को छोड़ कर वो उसकी बातों में आ गई थी उसकी असलियत जानकर भी।
उसने उसे अपनी बातों में इस तरह फंसाया कि वो अपना सब कुछ छोड़कर उसके प्यार में पागल हो बैठी।
अविनाश ने उसे जब बताया कि, ‘वो मजबूरी में आकर ही अपनी पहचान बदल कर उस मंच पर लिख रहा है क्योंकि उसकी तीन आई डी को उस एप ने ब्लॉक कर दिया है। उसे अपने वो उपन्यास जिसे दुनिया अश्लील कहती हैं उसे हर हाल में छपवाना है। पढ़ना तो कई लोग चाहते हैं और वो जानता है कि कई पाठक हैं उसके जो अपनी पहचान नहीं देना चाहते इसलिए कभी उसकी कहानी पर समीक्षा नहीं करतें पर उसकी लिखी वो सभी अश्लील कहानियां बड़े चाव से अकेले में पढ़ते हैं।
और उनमें महिलाएं भी शामिल होती हैं जो अपनी वासना को ऐसी कहानियां पढ़कर शांत करती हैं। वो लिखेगा और उन सब पाठकों के दिल में अपनी जगह जरूर बनाएगा बस यह शशि जैसी कुछ लेखिकाएं उसका भांडा फोड़ करने में लगी रहती हैं। तुम उससे दोस्ती छोड़ दो अगर मुझसे प्यार करती हो। तुम्हारा पति भी तुम्हारी जिस्मानी जरुरतें पूरी नहीं कर सकता जैसे मैं कर सकता हूं। ‘
राधिका कुछ महीने तो बहुत खुश थी उसके साथ। उसने शशि से बात करना भी छोड़ दिया था पर एक रात अविनाश ने उसे नशे की हालत में अपने दोस्तों के साथ बालात्कार कर बेच दिया एक वैश्यालय में।
वो बड़ी मुश्किल से वहां से जान बचाकर भागी और
एक सुबह राधिका ने शशि को फोन किया…
‘ दीदी मेरा सब कुछ लूट लिया उस अंशु ने। मैं कहीं की नहीं रही अब घर भी वापस नहीं जा सकती। मेरे पास आत्महत्या के सिवाय कोई दूसरा चारा नहीं है।’
‘संभालो अपने आप को राधिका। यह वही अंशु है ना जिसकी फेक आई डी पर तुम पागल हो गई थी। मैंने
कई बार समझाने की कोशिश की लेकिन मेरे समझाने का उल्टा ही असर हुआ तुम पर। तुम्हें इस तरह अपना घर परिवार छोड़कर वासना के पुजारी के पीछे नहीं जाना चाहिए था। अब जब गलती हो ही गई तुमसे तो आत्महत्या करके दूसरी गलती मत करो। एक राधिका मरेगी तो उस अंशु जैसे वासना के पुजारियों के लिए हजार राधिकाएं जन्म लेंगी। तुम्हें उसे सबक सिखाना चाहिए जाओ पहले उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करो फिर कलम की ताकत देखो।’
शशि ने साल भर बाद फिर से लिखना शुरू किया और शहर के अखबार में छपने के लिए वो दोनों कविताएं तो डाली ही जिसमें फेक आई डी से सतर्क रहने के लिए लिखा था जो अगले ही दिन अखबार में प्रकाशित हो गया और एक लेख जिसमें अविनाश जैसे फेंक आई डी वालों का नाश करने के संबंध में लिखा था प्रकाशित हुआ।
अविनाश को जेल हुई और राधिका उसके चंगुल से मुक्त हो अपने परिवार के पास सुरक्षित पहुंच गई।
शशि की कलम ने तलवार का काम किया और साहित्य के नाम पर अश्लीलता और वासना को फ़ैलाने वालों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी।
