“नहीं सर ,पहले नेग”

“अच्छा ठीक है “,कह कर मोतीलाल में पांच सौ का नोट निकालकर नर्स की तरफ बढ़ा दिया ।

“आइए “,कहकर नर्स ने पांच सौ का नोट अपने पर्स के हवाले किया।

 वार्ड में और कोई नहीं था ।नर्स भी उसे अंदर छोड़कर “,सर एक मिनट में आ रही हूं ।बच्चे की मां सो गई है, उसे मत जगाइएगा ।बच्चे को बस देख लीजिएगा। गोद में अभी मत लीजिएगा।” कह कर पता नहीं कहां चली गई ।मालती के चेहरे पर कमजोरी के साथ साथ प्रसन्नता खेल रही थी ,लेकिन उसकी आंखें बंद थीं।बच्चा उसके बगल में ही लेटा हुआ था ।ना चाहते हुए भी उसके हाथ बच्चे की तरफ बढ़ गए।

 अरे यह क्या बच्चे का एक पांव का पंजा तो था ही नहीं ।उसका सर घूम गया। इतने दिन इंतजार के बाद मालती की गोद भरी भी तो ऐसे बच्चे से, मोतीलाल को लगा कि उसके पैरों में ताकत ही नहीं है ।वह हताश सा कुर्सी पर बैठ गया, तभी उसे लगा कि बगल वाली कुर्सी पर भी कोई बैठा हुआ है ।उसने प्रश्नवाचक नजरों से उसकी ओर देखा ।

“आप”, मोतीलाल उसे पहचान नहीं पाया 

“मैं तुम्हारा कुल देवता”, बगल वाली कुर्सी पर बैठे आदमी का चेहरा चमकने लगा।

” कुलदेवता “

“हां ,रोज तुम मेरी ही तो पूजा करते हो। तुम्हारी इच्छा जानकर मैंने ही ईश्वर से तुम्हें पुत्र देने की प्रार्थना की थी और देखो मेरी बात ईश्वर ने मान ली ।”

“किन शब्दों में क्या कहूं आपसे। आप तो सब जानते हैं। भावबिह्वल होने से मोतीलाल का गला भर आया ।

“नहीं -नहीं ,कुछ मत कहो। मैं तुम पर प्रसन्न हूं,तभी तो”

” लेकिन प्रभु! बच्चे का एक पांव का पंजा” मोतीलाल के स्वर में अचानक करुणा फूट पड़ी ।

” अरे हां, मैंने अभी-अभी देखा था और फिर मैंने ईश्वर से पूछा भी। ईश्वर ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने चित्रगुप्त जी से बात की। उन्होंने बताया कि उनके यहां भी एट्टी- ट्वेनटी का रूल चल रहा है।”

” मैं समझा नहीं”, मोतीलाल को सचमुच कुछ समझ में नहीं आया।

 अरे सीधी सी  बात है ,ईश्वर के यहां से तो प्राणी ठीक-ठाक ही भेजा जाता है, लेकिन चित्रगुप्त जी के यहां कमीशन में उसका टुएन्टी परसेन्ट भाग काट कर रख लेते हैं ।अब तुम तो भाग्यशाली हो कि बच्चे का एक पैर का पंजा ही रक्खा। मान लो एक आंख या एक कान रख लेते तब I “

 “अरे सुबह के आठ कब के बज गए ।ऑफिस नहीं जाना है क्या ।और यह तू पसीने में क्यों नहाया हुआ है। तबीयत तो ठीक है ना “कहते हुए  अम्मा ने  मोतीलाल को  झिंझोड़ा  ।  तो मोतीलाल को एक झटका सा लगा।

सचमुच उसका सारा शरीर पसीने से नहाया हुआ था ।मतलब यह सारा केवल एक सपना था।  मोतीलाल ने एक लंबी सांस ली”अम्मा! मालती कहां है “

“अरे वह अस्पताल जाने की तैयारी कर रही है ।भगवान चाहेगा तो आज ही खुशखबरी मिल जाएगी। 12 साल बाद इस घर में किसी की किलकारियां गूंजेंगी ।अच्छा तू तो ऑफिस जा देख नौ भी बज गए ।मालती की चिंता छोड़। मैं सब संभाल लूंगी ।”

मोतीलाल की निगाह घड़ी पर पड़ी। वास्तव में नौ तो कब के बज चुके थे और 10:00 बजे आज ऑफिस में टेंडर खुलना था ।वह लगभग भागता हुआ सा बाथरूम में घुसा और जल्दी-जल्दी एक कप चाय और दो बिस्किट पेट में डालकर” अम्मा मैं नाश्ता आफिस में कर लूंगा “कहता हुआ गेट से बाहर निकल गया ।आफिस पहुंचते-पहुंचते भी दस मिनट देर हो ही गई ।

“साहब !बड़े साहब तीन बार पूछ चुके हैं “उसके घुसते ही चपरासी ने सलाम ठोका।

 “ठीक है “,कहता हुआ वह टेबल पर जा बैठा ।

उसके बैठने की देर थी कि फोन घनघना उठा ।

“हलो”

” जी”

” मोतीलाल जी ,जी मैं काबरा एंड सन्स से ।

“हां बोलिए”

” सर !आज हमने भी टेंडर डाला है ।देख लीजिएगा ।आपका टुएन्टी परसेंट पक्का है।”

 “हां , हां देख लूंगा “कहते हुए उसने फोन रख दिया।

 टेंडर के लिए आई सारी फाइलें मेज पर ही पड़ी हुई थीं।

उसने एक बार सारी फाइलों को एक-एक करके पलटा और काबरा एंड संस की फाइल पर क्रास का निशान लगाकर “पप्पू !एक चाय ले आना”, कहते हुए उसे डस्टबिन में डाल दिया।

 यह भी पढ़ें –अडिग फैसला – गृहलक्ष्मी कहानियां

-आपको यह कहानी कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही आप अपनी कहानियां भी हमें ई-मेल कर सकते हैं-Editor@grehlakshmi.com

-डायमंड पॉकेट बुक्स की अन्य रोचक कहानियों और प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं को खरीदने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://bit.ly/39Vn1ji