कथा-कहानी

फोन उठाते हैं तो हस्बैंड  जाते हैं। चलो भैया फोन का टाइम है। अब तो तुम्हारी मम्मी किसी की नहीं सुनेगी। इंसान हैं आखिर हमें भी बुरा लग जाता है और जब वह काम करती है तब क्यों नहीं उनका ध्यान जाता?

क्योंकि उनका तो तब फोन देखने का टाइम होता है। आजकल फोन में इतना ग्रुप हैफेसबुक सभी को चाहिए होता है। फोनलेकिन आज एकता ने ठान लिया था कि कोई फोन नहीं उठाएगी  फोन को देखेगी। लॉक डाउन का समय है। वैसे भी काम तो बढ़ा हुआ ही हैवह तो टाइम निकाल कर अपने मन का लिखने के लिए और अब कुछ पढ़ने के लिए फोन देख लेती है। फोन की घंटी काफी टाइम से बज रही थी। तो पतिदेव ने कहा, ‘फोन बज रहा हैउठा क्यों नहीं रही हो?

एकता ने सोच लिया, ‘आज तुम को सबक सिखाना ही होगा। एकता ने कहा, ‘नहीं मैं नहीं उठाऊंगीआपने फोन दिया आप ही रखोफिर सारा दिन ताना सुनाते रहते हो कि फोन देखती रहती है। दूसरी सासु मां बन गई हो आप तो

फोन बजबज कर कट गया। एकता ने देखा भी नहीं किसका था। फिर पति के मोबाइल पर घंटी बजी। एकता समझ गई कि किसी रिलेटिव का फोन हैक्योंकि मेरे फोन  उठाने पर उन्होंने उधर फोन कर दियाफोन उठाकर पतिदेव बड़े सलीके से बात कर रहे थे। ‘हां जीहां जीअभी वह नहा रही हैमैं बात करवा दूंगा। फोन रखते ही बोले, ‘तुम्हारी मम्मी का फोन था। उनसे तो बात कर लो।’

नहींमैं कल कर लूंगीआज मैं किसी से बात नहीं करूंगी! 

अरेवह परेशान हो रही थी कि कोई परेशानी तो नहीं। फोन क्यों नहीं कियाआज मैंने बोल दिया थोड़ी देर में करूंगा… कर लेना बात। तभी थोड़ी देर में नंद रानी का फोन  गया। फोन एकता ने साइलेंट पर कर दिया कि आज कोई फोन नहीं उठाना है। फिर उन्होंने भी हस्बैंड के फोन पर फोन किया कि एकता का फोन नहीं मिल रहा हैउससे कुछ पूछना था। हां दीदीक्या पूछना थामैं बता दूंगा वह अभी नहा रही है। मतलब मैं सारा दिन नहाती रही टाइम कोई भी। यह नहीं देखने का दूसरा बंदा क्या सोच रहा होगा कि किस टाइम नहा रही है। हांउन्होंने कहामुझे कुछ पूछना थाबताओ दीदीमैं पूछ कर बताता हूं। फिर दीदी ने कोई रेसिपी पूछी। मुझसे पूछ कर तब कहा कि मैं व्हाट्सएप कर दूंगा। फिर मुझसे पूछ कर व्हाट्सएप कर दिया।

हे भगवान। तुम्हारे फोन  लेने की मेरे को सजा मिल रही है। मेरे को सब को जवाब देना पड़ेगा। अपना फोन उठाओ और बात करो।’

नहीं नहीं… आज तो मैंने मना कर दिया। मैं नहीं करूंगी।’

ठीक है शाम तक कर लेना। काम में एकता भी भूल जाती है फोन करना। शाम को मम्मी का फिर से फोन आता है। उसने तो आज अपना फोन साइलेंट पर कर दिया था। फिर पतिदेव के फोन पर मम्मी ने फोन किया, ‘कैसे जमाई जीवहां पर सब ठीक तो है। एकता ने फोन नहीं किया। आपने बात नहीं कराई। अब एक हाथ में फोन लेकर और दूसरे हाथ से माफी मांगते हुए हस्बैंड बोले, ‘प्लीज बात कर लो तुम्हारी मम्मी परेशान हो रही है। मैं भी विजय मुस्कान के साथ बोली, ‘हां बात तो कर लूंगी और यह तुम्हारी मम्मी क्या होता हैहां नहीं तो और फोन पर मैं सारा दिन गपशप ही नहीं करती। फोन भी आज की जरूरत की चीज हैइसलिए जरूरी चीजों पर ही मैं ध्यान देती हूं। अच्छा मैडमआगे से हम नहीं कहेंगे और क्या माफ करो। फोन  दिया और एकता मम्मी से बातों में बिजी हो गई। 

आज फोन हर व्यक्ति की जरूरत बन गया है। कैसी लगी आपको यह हल्कीसी नोकझोंककमेंट में जरूर बताएं। क्या कभी फोन को लेकर आपके साथ कोई घटना हुईकमेंट में बताएं

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