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आतंकी हमला
Terrorist Attack-Balman ki Kahaniya

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

राम जन्मभूमि परिसर में आतंकी हमले के विरोध में आज बिहार बंद था। सुबह से ही घर में पड़ा-पड़ा वह ऊब चुका था। दोपहर बाद जब वह घर से बाहर निकला तो सोचा कुछ मित्रों से भेंट-मुलाकात की जाये।

रास्ते में ही भाई बलवंत जी का मकान पड़ता था। वे जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के मंत्री भी थे तो पाँव उन्हीं के दरवाजे पर जा टिके। दरवाजे के ऊपर बाई ओर लगे कॉलबेल को दबाया। अंदर घंटी बजने लगी। कुछ ही पल में अंदर से किसी की आवाज आई-

“कौन? कौन हैं?”

“जी मैं हूँ! बलवंत जी से मिलना था…!”

तभी दरवाजा खुला। एक नवयुवती ने सवालिया नजरों से घूरते हुए पूछा”आप…? आप कौन हैं… और किनसे मिलना है?”

“बेटा! मेरा नाम प्रेम किशन है। बलवंत जी से मिलना था। हम लोग एक साथ साहित्यिक कार्य करते हैं। क्या वे घर पर हैं?”

“ओह! अच्छा-अच्छा, आप को दादा जी से मिलना है? वे तो अभी घर पर नहीं हैं! कुछ देर पहले ही निकले हैं। आने में देरी होगी…।”

उनकी प्रतीक्षा में वहाँ ठहरना मैंने उचित नहीं समझा और उससे कहा”ठीक है बेटा! मैं फिर कभी आ जाऊंगा। हाँ, तब तक एक काम करें! उनका टेलीफोन नंबर एक कागज पर लिखकर दे दें! मैं उन्हीं से बात कर लूंगा!”

“ठीक है।” कहकर वह अंदर चली गई और एक कागज में नंबर लिख कर देने लगी। तभी उसने मुझसे कहा- “अंकल! आप भी अपना नाम और नंबर लिखवा दें! दादा जी के आने पर उन्हें दे दूंगी।”

मैंने कहा- “ठीक है, लिखिए…चौबीस तेईस पाँच बेरानवे…।” मैं बोल रहा था।

वह लिखने का उपक्रम कर रही थी, पर लिख नहीं पा रही थी।

मैंने पुनः पूछा- “लिख लिया क्या?”

वह जैसे झेंपते हुए बोली- “नहीं अंकल जी! समझ नहीं पाई। एक बार फिर से बोलिए न! और हाँ, अंग्रेजी में बोलिएगा!”

तभी मैंने थोड़ा स्पष्ट करने के ख्याल से पूछा-

“क्या आपको हिन्दी नहीं आती या समझने में कोई परेशानी हो रही है? अभी कौन-सी क्लास में पढ़ती हैं?”

वह जैसे लजाते हुए बोली- “अंकल जी, बी.एस-सी पार्ट-टू में!”

उसकी बातों से मैं सकते में आ गया और सोचने लगा कि आखिर आतंकी हमला किसे कहें? उसे, जो राम जन्मभूमि में हुआ…या इसे, जो घरों में घुसकर हमारी भाषा और संस्कृति पर किया जा रहा है?

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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