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सूरज मुखी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तराखण्ड: Hindi Short Story
Surajmukhi

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Hindi Short Story: पुराने समय में जब इस पृथ्वी में अग्नि न थी, तब सभी प्राणी मात्र ठण्ड से पीड़ित रहते थे। देवलोक से देवी-देवताओं व उनके बच्चे शीत का आनन्द लेने के लिये भूमण्डल में आया करते थे। एक दिन जब सूर्य की बेटी इस भू-मण्डल में आई थी तो उसने देखा कि सभी लोग एक ही दिशा की ओर भाग रहे थे। उसने लोगों से पूछा, ‘आप सब क्यों भागे जा रहे हैं, आपको किसका डर है?’ लोगों ने उसे उत्तर दिया ‘हम शीत बाधा से पीड़ित हैं, भागने से या दौड़ने से यह दूर हो जाता है।’ अपनी शीत बाधा को दूर करने के लिये ही हम इस प्रकार दौड़ रहे हैं। इन बातों को सुनकर उसे जोर से हंसी आ गई और कुछ देर तक सोचने-विचारने के बाद उन पर दया भी आ गई।

कुछ दिन बाद पुनः जब वह भू-मण्डल में आई तो उसने देखा कि एक स्त्री अपने अबोध बालक को बुरी तरह से पीट रही थी। सूर्य की पुत्री ने उससे पूछा, ‘तुम इसे बुरी तरह क्यों पीट रही हो?’ उस स्त्री ने उत्तर दिया? ‘इसे जाड़ा लग रहा है, पीटने से इसका जाड़ा दूर हो जायेगा।’ कुछ दूर और आगे जाने के बाद उसे एक मनुष्य दुबक कर झाड़ी के पीछे बैठा हुआ मिला। सूर्य की पुत्री ने उससे भी पूछा, ‘तुम इस तरह क्यों बैठे हो?’ उसने उत्तर दिया कि मुझे भयंकर शीत बाधा सता रही है। जाड़े के भय से यहां बैठा हूं और यहां पर मुझे कुछ कम जाड़ा महसूस हो रहा है।

सबको जाड़े से पीड़ित देखकर सूर्य की बेटी स्वर्ग से आग चुराकर लाई। अब सभी लोग आग सेकने लग गये। जिस समय वह आग चुराकर लाई, उस समय सूर्य गहरी नींद में सो रहा था। नींद खुलने पर उसने देखा कि धरती में आग जल रही है। वह क्रोध के मारे लाल होकर अपनी बेटी की खोज में भू-मण्डल में आया। उसकी लड़की भयभीत होकर तालाब में छिप गई। जब उसे अपनी पुत्री का कोई पता न लगा तो उसने अपनी किरणों से आग उगलना आरम्भ कर दिया। इससे सभी पक्षी एवं प्राणी दुःखी हो गये। नाले व तालाब सब सूख गये। तालाब के सूख जाने पर सूर्य की बेटी ने एक सुन्दर पुष्प का रूप धारण कर लिया। यह फूल सूर्य की भांति गोल होता है तथा सूर्य की ओर ही अपना मुंह किए रहता है इसीलिए लोग इसे सूरज मुखी कहते हैं।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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