Summary: इन गार्ड्निंग ट्रिक से अपने बगीचे को हरभरा बना सकते हैं
यह समय पौधों को आराम देने का नहीं, बल्कि उन्हें नए सिरे से तैयार करने का होता है। सही तकनीक अपनाकर आप ठंड के बाद भी अपने गमलों और क्यारियों में रंग और खुशबू बनाए रख सकते हैं।
Flowers Bloom after Winter: अक्सर यह माना जाता है कि सर्दियों के बाद बगीचे की रंगत फीकी पड़ जाती है। पत्ते झरने लगते हैं, मिट्टी ठंडी हो जाती है और फूलों का मौसम मानो खत्म-सा हो जाता है। लेकिन सच यह है कि अगर सही देखभाल और थोड़ी समझदारी अपनाई जाए, तो पतझड़ के मौसम में भी बगीचा फूलों से भरा रह सकता है। यह समय पौधों को आराम देने का नहीं, बल्कि उन्हें नए सिरे से तैयार करने का होता है। सही तकनीक अपनाकर आप ठंड के बाद भी अपने गमलों और क्यारियों में रंग और खुशबू बनाए रख सकते हैं। आइए इस लेख के माध्यम से जानते हैं कुछ ट्रिक।
मिट्टी को दोबारा ज़िंदा करें

सर्दियों के बाद मिट्टी अक्सर सख़्त और पोषक तत्वों से खाली हो जाती है। ऐसे में सबसे पहला काम है मिट्टी को दोबारा सक्रिय करना। इसके लिए पुराने गमलों की ऊपरी परत हटाकर उसमें वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद या पत्तियों की सड़ी खाद मिलाएं। इससे मिट्टी में हवा और नमी दोनों का संतुलन बनेगा, जो फूलों के लिए बेहद ज़रूरी होता है।
सही पौधों का चुनाव करें
पतझड़ में हर पौधा फूल नहीं देता, लेकिन कुछ ऐसे पौधे हैं जो इस मौसम में भी अच्छी तरह खिलते हैं। जैसे- गुलदाउदी, पेटूनिया, डायन्थस, पैंसी और कैलेंडुला। इन पौधों को हल्की धूप और ठंडी हवा पसंद होती है, जो पतझड़ में आसानी से मिल जाती है। मौसम के अनुसार पौधों का चयन करना भी एक बहुत ही समझदारी का काम है। सही पौधे हमेशा सही फूल देते हैं, यह फूलों की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
कटिंग और प्रूनिंग करें

ठंड के बाद पौधों की सूखी और कमज़ोर टहनियाँ काट देना बहुत ज़रूरी होता है। इसे प्रूनिंग कहा जाता है। इससे पौधे अपनी ऊर्जा नई शाखाओं और कलियों में लगाते हैं। ध्यान रखें कि कटिंग हमेशा साफ़ और तेज़ कैंची से करें, ताकि पौधे को चोट न पहुँचे और संक्रमण का खतरा न रहे। मतलब कटिंग के लिए भी आपको थोड़ी समझदारी बरतनी है।
पानी कम, लेकिन नियमित दें
पतझड़ में नमी ज़्यादा देर तक मिट्टी में बनी रहती है, इसलिए रोज़ाना भारी मात्रा में पानी देना नुकसानदायक हो सकता है। कोशिश करें कि मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर ही पानी दें। सुबह का समय सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इससे जड़ों को पर्याप्त नमी मिलती है और फंगल बीमारी का खतरा कम रहता है। मतलब सही और संतुलित मात्रा का विशेष ख़्याल रखना है।
माइक्रो न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल

पतझड़ में फूलों को ज़्यादा ताक़त की ज़रूरत होती है। इसके लिए 10–15 दिन में एक बार तरल खाद या समुद्री शैवाल आधारित खाद का इस्तेमाल करें। इससे पौधों को आयरन, मैग्नीशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व मिलते हैं, जो कलियों के बनने और फूलों के लंबे समय तक टिके रहने में मदद करते हैं।
अगर बगीचे को ध्यान से देखा जाए, तो हर मौसम एक नया अवसर लेकर आता है। पतझड़ कोई अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। थोड़ी देखभाल और सही तकनीक के साथ आप ठंड के बाद भी अपने बगीचे को फूलों से सजा सकते हैं, बस ज़रूरत है प्रकृति की लय को समझने की।
