Wow beetroot, great!
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Funny Stories for Kids: चुकंदर की बात चलते ही निक्का के होंठों पर यह गाना आ जाता है, ‘वाह चुकंदर, बल्ले-बल्ले !’ और होंठों पर मुसकान चली आती है । निक्का ने अभी तक चुकंदर देखा तो नहीं था, पर चुकंदर नाम उसे बड़ा अच्छा लगता था । इतना अच्छा कि उसने चुकंदर पर एक गाना भी बना लिया
और कभी-कभी मस्ती से भरकर गाया करता था –

आह चुकंदर, बल्ले-बल्ले,
वाह चुकंदर, बल्ले-बल्ले ।
आ जा भाई, घर के अंदर,
वरना खा जाएगा बंदर !
घर के अंदर चला चुकंदर,
घर के बाहर रह गया बंदर ।
खूब हँसा फिर वाह चुकंदर,
बोला बंदर, आह चुकंदर !

फिर एक दिन की बात । निक्का को उस दिन चुकंदर तो नहीं दिखा, पर चुकंदर की चटनी जरूर मि ली खाने को ! हुआ यह कि क्ला स में टिंकू लेकर आया था चुकंदर की चटनी । निक्का ने खाई तो उसे बहुत अच्छी लगी ।
टिंकू बोला, “निक्का , कैसी लगी चटनी ?” फि र खुद ही बोला, “क्यों न अच्छी लगेगी ? यह तो चुकंदर की चटनी है, चुकंदर की !”

निक्का ने पूछा, “खाली चुकंदर ही है, कुछ और नहीं ?” टिंकू बोला, “है क्यों नहीं, पर साथ में चुकंदर भी है । और चुकंदर चीज ही ऐसी है कि कुछ न पूछो । मेरी मम्मी कहती है, चटनी में चुकंदर पड़ जाता है तो जान आ जाती है ।”
“हाँ, बात तो ठीक है ।” निक्का बोला, “चुकंदर का कोई जवाब नहीं ।
फिर उसका नाम ही कितना संदुर है । तभी तो मैंने चकुंदर पर एक गाना भी बना
लिया है ।”
“गाना, तूने…?”टिंकू को बड़ी हैरानी हुई ।
“हाँ, भई हाँ !” निक्का बोला, “बड़ा ही मजेदार गाना है । सुनोगे ?”
“हाँ-हाँ, सुनाओ ना ।” टिंकू बोला । लंच टाइम था । इसलि ए गाने की बात सुनकर क्ला स के और बच्चे भी इकट्ठे हो गए । और निक्का ने मजे-मजे में सुना दिया यह प्यारा सा गाना –

आह चुकंदर, बल्ले-बल्ले,
वाह चुकंदर, बल्ले-बल्ले ।
आ जा भाई, घर के अंदर,
वरना खा जाएगा बंदर !
घर के अंदर चला चुकंदर,
घर के बाहर रह गया बंदर ।
खूब हँसा फि र वाह चुकंदर,
बोला बंदर, आह चुकंदर

सुनकर सारे बच्चे खूब हँसे । खूब हँसे । वे भी निक्का की तरह झूम-झूमकर गा रहे थे –

आह चुकंदर, बल्ले-बल्ले,
वाह चुकंदर, बल्ले-बल्ले ।…

अगला पीरियड हिंदी की श्या मला मैडम का था । मैडम क्ला स में आईं, तो बच्चों को खुशी से चहकते देखकर बोलीं, “आज क्या बात है ? तुम लोग बड़े खुश लग रहे हो ।”

“मैडम, हम निक्का से चुकंदर का गाना सुन रहे थे । निक्का ने बड़ा ही संदुर गाना बनाया है चुकंदर का !”
सुनकर श्यामला मैडम को भी उत्सुकता हुई । बोलीं, “अच्छा ! फिर तो मैं भी जरूर सुनना चाहूँगी । जरा सुनाओ तो निक्का ।”
इस पर निक्का ने फिर उसी तरह झूमकर ‘आह चुकंदर, बल्ले-बल्ले’ वाला गाना सुनाया, तो मैडम हँस पड़ीं । बोलीं, “कमाल है । निक्का ने तो बहुत अच्छा गाना बना लिया । वाकई चुकंदर है ही ऐसी कमाल की चीज ।…और हमारा निक्का , उसका तो जवाब ही नहीं !” सुनकर सारे बच्चों ने खूब तालियाँ बजाईं । हर कोई निक्का की तारीफ कर रहा था ।

निक्का सोच रहा था, ‘अरे सब मेरी तारीफ कर रहे हैं, पर मैंने तो आज तक चुकंदर देखा ही नहीं । आज ही घर जाकर मम्मी से कहूँगा, कि वे सब्जी मंडी से चुकंदर लेकर आएँ ।’
*
स्कूल से घर आकर निक्का ने मम्मी से कहा, “मम्मी -मम्मी , चुकंदर क्या होता है ?”
मम्मी ने बताया, “बेटे, जैसे और फल-सब्जियाँ होती हैं, ऐसे ही चुकंदर भी है । चुकंदर की चटनी बहुत अच्छी लगती है । यों भी बड़े फायदे हैं इसके । यह बड़ा पाचक है, भूख बढ़ा ता है । खून की लाली बढ़ाता है । फिर इसमें बहुत से विटामिन भी हैं ।”
“अरे वाह, मम्मी , फिर तो आप भी बनाना चुकंदर की चटनी । आज टिंकू लाया था, पर उसने तो मुझे बिल्कुल जरा सी दी ।” मम्मी हँसीं । बोलीं, “अरे बुद्धू, चटनी तो जरा सी ही खाई जाती है । क्या
तुझे अच्छी लगी चुकंदर की चटनी ?”
“हाँ मम्मी , बहो…त…बहोत !” निक्का ने होंठों पर जीभ फि राते हुए कहा ।

“ठीक है, फिर जल्दी ही तेरे लि ए बनाऊँगी चुकंदर की चटनी । उसके लिए जरा सब्जी मंडी जाकर चुकंदर लाना होगा ।” मम्मी बोलीं ।
अगले दिन मम्मी सब्जी मंडी गईं और चुकंदर लेकर आईं । निक्का ने चुकंदर देखा तो खूब हँसा । बोला, “यह तो वाकई बड़ा नायाब है । और शक्ल तो ऐसी है जैसे हाथ से नचाने वाला काठ का लट्टू । क्यों मम्मी , ठीक है ना ?” मम्मी हँस पड़ीं । बोलीं, “अब मैं क्या कहूँ ? तुझे तो बड़ी अजीब-अजीब
बातें सूझती हैं ।”
मम्मी ने चुकंदर की चटनी बनाई, तो निक्का ने खूब मजे में खाई । चटनी वाकई बहुत अच्छी बनी थी । खूब स्वादिस्ट । निक्का बोला, “मम्मी , मेरी हिंदी की मैडम बता रही थीं कि चुकंदर में बहुत सारे गुण होते हैं । इसलिए बच्चों को जरूर खाना चाहि ए । अब तुम चुकंदर की चटनी जरूर बनाया करो ।”
मम्मी हँसकर बोलीं, “ठीक है । मेरे निक्का को पसंद है तो मैं क्यों नहीं बनाऊँगी ?”

फिर कुछ दिन बाद की बात है । निक्का अपने कमरे में बैठा होमवर्क कर रहा था, तभी एक लाल-लाल, गोल-गोल सी चीज घूमती-घूमती उसके पास आई । आते ही खूब जोर-जोर से उछलने लगी । देखकर निक्का बुरी तरह चौंका । उसे उसकी शक्ल चुकंदर जैसी लगी । पर फिर सोचा, ‘भला चुकंदर ऐसा डांस कैसे दिखा सकता है ?’
“तुम…तुम कौन हो ?” उसने बड़ी हैरानी से पूछा ।
“पहले मेरा नाच देखो !” कहकर वह छोटी सी गोल चीज और भी तेजी से गोल-गोल घूमने और नाचने लगी । खूब बड़े से लट्टू की तरह । ऐसा बढ़िया नाच देखकर निक्का खूब खुश हुआ । वह मजे में तालियाँ बजाने लगा । जैसे-जैसे चुकंदर के घूमने की गति बढ़ती जाती, निक्का की खुशी भी ।

“देखो, मैंने तुम्हें खुश और ताजा कर दिया न !” उस गोल-गोल नाचती हुई चीज ने हँसते हुए कहा, “तुमने शायद मुझे पहचाना नहीं । पर अब अच्छी तरह पहचान लो । मैं हूँ चुकंदर, लाल चुकंदर ! अब आगे कभी भूलना मत !” “अरे वाह, तुम हो चुकंदर, लाल चुकंदर !…पर तुम तो गेंद की तरह नाच
रहे हो । अभी कल ही तो मैंने खाई है तुम्हा री चटनी…!”
“हाँ-हाँ, ठीक कह रहे हो तुम । पर मैं गेंद की तरह नाच भी तो सकता हूँ । और मेरी चटनी तो खूब बढ़ि या बनती ही है । कुछ लोग जूस भी पीते हैं, पीकर तगड़े हो जाते हैं । मुझे पहचान लो अच्छी तरह ।”
निक्का हँसकर बोला, “पर चुकंदर, तुमने अपनी एक तारीफ नहीं बताई कि तुम नाटककार भी बड़े अच्छे हो । तुमने मुझे तो चकरा ही दिया अपने अनोखे नाच से । बाप रे बाप, क्या खूब नाचते हो तुम ! सामने वाले को अपने नाटक में उलझा लेते हो !”
सुनकर चुकंदर हँसने लगा, तो साथ-साथ निक्का भी तालियाँ पीटकर हँसने लगा । फि र चुकंदर बोला, “अच्छा निक्का , अब मैं चला !” और वह चला गया—राम जाने कहाँ ! पर निक्का को वह दुनिया-जहान की ढेर सारी खुशि याँ दे गया था । इसीलिए चुकंदर का नाम आते ही निक्का हँसने लगता है, खिल-खिल…खिलर-खिलर-खिलर !

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ