Funny Stories for Kids: हिंदी की श्यामला मैडम क्लास में जो कुछ पूछतीं, निक्का सबसे पहले जवाब देता । उसका जवाब अकसर सही होता था । कई बार तो पूरी क्लास में एक वही सही जवाब देता था । इस कारण श्यामला मैडम निक्का से बहुत खुश थीं । कभी-कभी उसकी पीठ भी थपथपा देती थीं ।
निक्का को भी श्यामला मैडम बहुत अच्छी लगती थीं । जो भी वे पढ़ातीं, उसे झट याद हो जाता था । कभी-कभी वह सोचता था, ‘श्यामला मैडम जितने प्यार से पढ़ाती हैं, अगर सारे टीचर ऐसे ही पढ़ाएँ, तो कितना अच्छा होगा ।’ एक दिन मैडम ने क्लास के सारे बच्चों से कहा, “आप लोग अपने मन से
एक निबंध लिखकर लाइए । उस निबंध का शीर्षक मैं बता देती हूँ– ‘बारिश का एक दिन ।’ अपने जीवन का कोई दिन याद कीजिए, जब आपने बारिश का भरपूर आनंद लिया हो । फिर उसके बारे में खुद लिखिए । किसी की मदद मत लीजिए ।”
अगले दिन मैडम ने सारे बच्चों की काॅपियाँ जाँचीं । पर ज़्यादातर बच्चों ने खुद लिखने के बजाय किसी किताब से वर्षा ऋतु वाला निबंध टीपकर लिख दिया था । कुछ बच्चों ने मम्मी -पापा की मदद ली । जो कुछ मम्मी -पापा ने बताया, उसी को सुलेख में अपनी काॅपी पर लिख लिया । पर मैडम ने ध्यान से पढ़ा , तो सबकी चालाकी पकड़ी गई ।
पूरी क्लास में केवल आठ-दस बच्चों ने ही खुद सोचकर निबंध लिखा था । पर उनके निबंधों में बहुत गलति याँ थीं । लिखने का तरीका भी अच्छा नहीं था । पर जब मैडम ने निक्का का निबंध पढ़ना शुरू किया, तो उनका मन प्रसन्न हो गया । उन्होंने एक बार प्यार से निक्का की ओर देखा, फिर बड़े ध्यान से उसका निबंध पढ़ने लगीं ।
निक्का ने एक बारिश के दिन की सच्ची कहानी लिखी थी । जब बारिश आई तो वह स्कूल से पैदल घर आ रहा था । साथ में बस्ता । पर अब क्या करे निक्का ? ‘अगर बस्ता भीग गया तो बहुत गड़बड़ हो जाएगी । कहीं सारी काॅपी-किताबें खराब हो गईं तो ?’ सोचकर निक्का परेशान । ऐसे में बस्ते को भीगने से बचाते हुए उसने स्कूल से घर तक की यात्रा कैसे की, यह पूरी कहानी निक्का ने
ज्यों की त्यों बड़े संदुर ढंग से लिख दी थी ।
रास्ते में कई जगह इतना पानी भर गया था कि निक्का को लगा, वह जमीन पर नहीं चल रहा, बल्कि नदी के बीच से जा रहा है । पर ऐसे में भी उसने बस्ते को भीगने नहीं दिया । खुद तो भीगा, लेकिन बस्ते को बचा लिया ।
फिर घर पहुँचते ही नहा-धोकर उसने मम्मी के बनाए गरम-गरम चीले खाए । ऊपर से अदरक वाली चाय पी । निक्का ने इसका भी मजेदार वर्णन किया था और लिखा था, “गरम चीले तो मैंने पहले भी कई बार खाए थे, पर उस दिन बारिश में भीगने के बाद घर पहुँचकर जब मैंने गरम चीले खाए, तो
लगा कि इनका स्वाद सौ गुना बढ़ गया था ।”
फिर शाम के समय बारिश रुकने पर निक्का दोस्तों के साथ खेलने निकला तो कैसा मजा आया, इसका भी उसने खूब रस लेकर वर्णन किया था । रात को पापा के दोस्त लल्लन बाबू आए, जो एक गाँव में टीचर हैं । आते ही बोले, “भाई, बारिश के दिनों में आल्हा गाने का आनंद ही कुछ और है ।”
उनकी बात सुनकर निक्का के पापा ने अड़ो स-पड़ो स के कुछ दोस्तों को भी बुला लिया । उस दिन सबने मि लकर लल्लन बाबू का गाया आल्हा सुना तो सबकी तबीयत फड़क गई ।…
मैडम निक्का का निबंध पढ़ती जा रही थीं और खुश होकर कहती जा रही थीं, “वाह-वाह-वाह…वाह निक्का , वाह !” सारे बच्चे हैरानी से मैडम को देख रहे थे । फिर बाद में मैडम ने पूरी क्लास को निक्का का लिखा निबंध पढ़कर सुनाया तो सारे बच्चे हैरान रह गए । खशु होकर मडै म ने निक्का को एक संदुर-सा फूल दिया, लिली का फूल । बोलीं, “निक्का , यह फूल अनमोल है । तुम्हारे लिए इससे बढ़ि या इनाम कोई और नहीं हो सकता था ।”
निक्का खुश था । घर आकर उसने मम्मी -पापा, दीदी, सबको मैडम का दिया वह संदुर फूल दिखाया । सभी ने कहा, ‘संदुर…वाकई संदुर !’ लिली का वह संदुर फूल कुछ दिनों तक निक्का के बैग में पड़ा रहा । फिर धीरे-धीरे मुरझा गया । पर लिली का वह दूधिया सफेद फूल इतना अनोखा था
कि निक्का के ध्यान से उतरता ही नहीं था । निक्का के दोस्त मीका के घर के लॉन में लिली के कई पौधे थे । जब निक्का ने उससे लिली के बारे में खूब बातें कीं, तो वह बोला, “तुम्हें लिली बहुत पसंद है, तो लिली का एक पौधा तुम अपने घर में भी लगा लो न । बारिश में बहुत जल्दी लगेगा ।”
मीका ने निक्का को लिली का एक संदुर सा पौधा दिया । निक्का ने लि ली का वह पौधा अपने घर के लॉन में लगाया । कुछ रोज बाद उसमें फूल आए । इतने संदुर फूल कि निक्का खुशी से नाच उठा ।
फिर कुछ दिन बाद की बात है, श्या मला मैडम का जन्मदिन था । निक्का अपने घर के लॉन से लि ली का फूल तोड़कर ले गया और मैडम को देते हुए बोला, “आपको हमारी पूरी क्ला स की ओर से जन्मदिन की शुभकामनाएँ !” श्यामला मैडम खुश होकर बोलीं, “अरे वाह, निक्का ! शायद तुम नहीं
जानते कि तुमने मुझे कि तनी खुशी दी है ! यह मेरा फेरवरेट फूल है, लि ली !” “मुझे पता है मैडम !” निक्का मुसकराया ।
“तुम्हें…! तुम्हें कैसे पता ?” मैडम हैरान । “आप शायद भूल गईं, कुछ रोज पहले मेरे एक निबंध पर खुश होकर आपने मुझे लिली का फूल ही तो दिया था ।” निक्का बोला, “मैंने उसे बहुत दिनों तक सँभालकर बैग में रखा । फिर मीका से लेकर अपने घर के लॉन में लिली का पौधा भी लगा लिया । लिली का फूल बैग में रखे-रखे मुरझा गया था, पर पौधे में तो हर बार नए-नए फूल आते हैं, हर बार ताजा खुशबू बिखराते हैं ।”
निक्का की बात सुनकर श्यामला मैडम की आँखों में चमक आ गई । खुश होकर बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, “निक्का , तुम वाकई समझदार हो । इसीलिए तुम्हारी बातें इतनी अच्छी लगती हैं । देखना, तुम जीवन में बहुत आगे बढ़ोगे ।”
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
