do aangan
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Hindi Best Story: आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका सभी को इंतजार था। समर, रजनी को मां जी के साथ हॉस्पिटल लेकर पहुंच गया।

आज सुबह से ही रजनी बहुत व्यस्त है। घर की चादरें बदलने के बाद वो अब ड्रॉइंग रूम में आकर सोफे के कवर बदलने लगी, वैसे तो सफाई का काम पिछले चार दिनों से लगातार ही चल रहा है, मगर आज तो उसके हाथों में गजब की फुर्ती आ गई थी। ये सारी तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि
आज उसकी छोटी और इकलौती ननद सीमा आने वाली है। ननद-भाभी में खूब जमती है, दो सहेलियों की तरह दोनों साथ हंसती-बोलती हैं इसलिए रजनी को सीमा के पीहर आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। रजनी की सास और पति समर इन ननद-भाभी के ह्रश्वयार को देख-देख कर बस
निहाल हुए जाते हैं। सीमा इस बार खास कारण से मायके आ रही है, रजनी कुछ दिनों बाद दूसरी बार मां बनने वाली है। रजनी के जब पहली बार बेटा हुआ था तो भी सीमा ने उसकी देखभाल की थी और
इस बार भी उसने मां और भाभी को आश्वस्त कर दिया है कि वो सब कुछ संभाल लेगी। सीमा ने हंसते खिल-खिलाते घर में कदम रखा और सीधा मां के गले लग गई। दोनों की आंखे भीग गई, मां-बेटी का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल है।

चाय पीने के बाद ननद-भाभी बहुत देर तक बातें करती रहीं। घर में सबको पता था ये सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है। खाने का समय हुआ तो मांजी ने आवाज लगाई, ‘भई! आज खाना भी बनेगा या बातों से ही पेट भरने का इरादा है!’ ‘मम्मी जी बस अभी पांच मिनट में खाना लगाती हूं!’ रजनी यह कहते हुए रसोई की तरफ चल दी। सीमा भी उसके पीछे-पीछे रसोई में पहुंच गई। भाभी छोड़ो मैं बनाती हूं’ सीमा ने गैस ऑन करते हुए कहा। ‘नहीं सीमा आज रहने दो, तुम सफर से थककर आई हो। सोफे पर जाकर आराम से बैठो, मैं गरम-गरम रोटी बनाती हूं तुम जाकर खाना खाओ। मैंने आज सारी तुम्हारी पसंद की चीजें बनाई हैं।’ रजनी ने सीमा को समझाते हुए कहा। ‘भाभी मैं इतनी भी थकी हुई नहीं हूं, वैसे भी आराम की जरूरत मुझसे ज्यादा आपको है।

पर चलो आज मैं आपकी बात मान लेती हूं लेकिन कल से पूरी रसोई मेरे हवाले करनी होगी। सीमा बच्चों की तरह मचलते हुए बोली तो रजनी हंस दी। अगले कुछ पलों में ही सीमा ने रसोई की बागडोर अपने हाथ में ले ली। सुबह की वॉक से लेकर रात को सोते समय दूध के गिलास तक सीमा को रजनी की हर चीज का पूरा ध्यान रहता। रजनी के पति ने हंसते हुए कहा, ‘जब से सीमा आई है हम तो चैन की नींद सोते है, रजनी चाहे खुद दवाई खाना भूल जाए मगर सीमा को सब याद रहता है। हमारी तो सारी पंचाताएं ही खत्म हो गई।’ ‘कैसी बात करते हो छोटी बहन है वो आपकी और उस पर सारी जिम्मेदारी डालकर निश्चिन्त हो रहे हो।’ रजनी ने टोका।

‘अब मुझे लगता है कि वो मेरी कम और तुम्हारी बहन ज्यादा हो गई है। देखो अपनी हर बात अब वो मुझसे पहले तुम्हें बताती है, देखो बाजार भी वो अब तुम्हारे ही साथ जाती है। हमारी तो इसे अब याद ही नहीं आती।’ शिकायती लहजे में जवाब आया। आप भी बात को कहां से कहां ले गए वो सबसे पहले आपकी ही बहन है तभी तो मेरा उससे रिश्ता बना है’ रजनी ने जवाब दिया। ‘अरे! मैं तो मजाक कर रहा था वैसे तुम दोनों की दोस्ती मेरे मन को बहुत सुकून देती है’ समर मुस्कुराते हुए बोला।
आने वाले रविवार को रजनी की गोद भराई की रस्म है सीमा आजकल उसी की तैयारी में व्यस्त है वैसे तो ये रस्म सातवें महीने में ही हो जाती मगर रजनी ने मना कर कर दिया था कि जब सीमा आएगी उसके सामने ही करेंगे इसलिए ये रस्म अब हो रही है।

सीमा ने अपने हाथों से सारा घर बहुत सुंदर सजाया है। रजनी को तैयार भी उसी ने किया था। किसी भी स्त्री के जीवन में मां बनना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। अनोखी आभा से उसका पूरा व्यक्तित्व
निखर जाता है, चेहरे की रौनक ही निराली होती है। रजनी के खुबसूरत चेहरे की सभी लोग तारीफ कर रहे थे। सारा कार्यक्रम बहुत अच्छी तरह संपन्न हुआ मेहमान वापस लौट गए। अब घर में
बस ताईजी रह गई थीं। घर-परिवार में सबसे बड़ी होने के नाते सभी उन्हें पूरा मान-सम्मान देते थे रजनी की सास ने उनसे पहले ही रुक कर जाने का अनुरोध किया था क्योंकि इस बार उनका आना बहुत दिनों बाद हुआ था। सारा काम समाप्त होने के बाद ताईजी ने चाय पीने की इच्छा जाहिर की तो सीमा रसोई की तरफ चल दी। कुछ देर बाद सभी लोग साथ बैठकर चाय पी रहे थे। ताईजी सीमा से उसकी सुसराल के विषय में बातचीत कर रही थीं।
‘तुझे घर-परिवार तो सब अच्छा ही मिला है।’ ताईजी ने संतुष्ट भाव से कहा। ‘बस आपका आशीर्वाद है ताईजी सभी लोग बहुत अच्छे हैं मेरे परिवार में।’ सीमा ने जवाब दिया। ‘भगवान अगर तेरी भी गोद में एक नन्हामुन्ना दे देते तो कितना अच्छा होता।’ ताईजी ने जैसे मन की बात कह दी। अब तक का खुशनुमा माहौल अचानक भारी हो गया। सीमा की आंखों में आंसू छलक आए रजनी ने सीमा को उदास देखा
तो उसका मन भी दुखी हो गया। उसने बात संभालते हुए कहा, ‘सही कहा ताईजी, देखना एक दिन सीमा दीदी की गोद में बाल-गोपाल जरूर खेलेगा।’ सीमा ने हैरत से भाभी की तरफ देखा और उठकर चली गई रजनी की सास भी उसकी ओर आश्चर्य से देख रही थी मगर उसने नजरों-नजरों में समझा दिया कि ताईजी के सामने यह कहना जरूरी था। दरअसल बात ये है कि शादी के करीब साल भर बाद सीमा अपने पति के साथ पहाड़ों में घूमने गई थी, वहां से लौटते समय उनकी बस का एक्सीडेंट हो गया था। दोनों को बहुत गहरी चोंटे आई थीं, समय के साथ दोनों ठीक तो हो गए। लेकिन उस दुर्घटना में सीमा में अपनी मां बनने की क्षमता को खो दिया था। डॉक्टर ने साफ कह दिया था कि वह अब कभी भी मां नही बन सकेगी। घर का हर सदस्य यह सच जानता था इसलिए उस दिन के बाद से सीमा के सामने कोई भी बच्चे के बारे में बात नहीं करता था। सब लोग इस
बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि सीमा के लिए इस दुख के साथ जीना बहुत मुश्किल है। इसलिए उसके सामने इस विषय में बात ही ना हो लेकिन आज ताईजी ने वही बात दुबारा छेड़ कर मानो दबे हुए घाव को फिर से ताजा कर दिया। अगले दिन ताईजी तो अपने घर लौट गईं लेकिन सीमा के मन
और चेहरे की उदासी सभी को दुखी कर रही थी।

रजनी ने सीमा से कहा, ‘दीदी आज कोई अच्छी-सी मूवी देखने चलते हैं। मैंने थिएटर में बहुत दिन से नहीं देखी, फिर आगे तो बच्चों के साथ जाना और भी मुश्किल होगा। पता नहीं फिर कब देखने को मिले। मैं इनसे बात करती हूं। इंटरवेल में क्या-क्या खाना है सोच लेना!’ रजनी हंसते हुए कमरे से बाहर चली गई। सीमा सब समझ रही थी रजनी के दिमाग में मूवी जाने का आईडिया अचानक नहीं
आया है वो बस वह उसे खुश करने के लिए ही ये सब कर रही है। सीमा अच्छी तरह जानती है कि उसकी भाभी और भैया दोनों उसे कभी भी दुखी नहीं देख सकते। सीमा ने बस यही सोचकर अपने दिल को तसल्ली दी और अपना गम भुलाकर रसोई की तरफ चल दी। भैया-भाभी और सीमा तीनों शाम को मूवी चले गए। मां ने जाने से मना कर दिया और रजनी का बेटा भी दादी के पास रुक
गाया।
पिक्चर बहुत अच्छी थी, तीनों ने बाद में खाना भी बाहर ही खाया। घर लौटते समय समर ने सीमा से पूछा, ‘आईसक्रीम खानी क्या?’ ‘बिलकुल…’ रजनी और सीमा दोनों साथ बोलीं।

‘ठीक है! तुम लोग यहीं रुको मैं लेकर आता हूं।’ समर ने कहा, घर पहुंचने तक सीमा खिलखिला रही थी। यानी रजनी और समर की तरकीब काम कर गई थी। दोनों को यही लगा कि वे उसका दर्द मिटा नहीं सकते तो थोड़ी देर के लिए ही सही उसके गम को कम करने की कोशिश तो कर सकते हैं।
समय के साथ दिन जल्दी-जल्दी गुजरने लगे थे, अब रजनी की डिलीवरी कभी भी हो सकती थी। मां जी रजनी का खास खयाल रखती थीं।

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आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका सभी को इंतजार था। समर, रजनी को मां जी के साथ हॉस्पिटल लेकर पहुंच गया। रजनी एक बेटे की मां पहले से थी और इस बार उसने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। सभी लोग बहुत खुश थे। मां जी और समर तो बस बेटियों का चेहरा देख- देख कर निहाल हुए जा रहे थे, तभी सीमा भी भतीजे को लेकर हॉस्पिटल पहुंच गई। रजनी को गले लगाकर बधाई दी। रजनी ने सीमा को अपने पास बैठा लिया, समर ने एक नवजात बच्ची को सीमा की गोद में दे दिया। ‘सीमा देखो अब तुम्हारी गोद भी सूनी नहीं रही। आज से ये तुम्हारी बेटी और तुम इसकी मां हो!’ रजनी ने सीमा से कहा।

‘भाभी आप यह क्या कह रहे हो ये तो आपकी बेटी है।’ सीमा ने कहा ‘मेरी नहीं आज से ये तुम्हारी बेटी है। तुम्हारा दुख हमें भी दुखी करता है, तुम इस घर की बेटी हो और अगर घर की बेटी का आंगन सूना हो तो दूसरे आंगन की खुशियां भी फीकी हो जाती हैं। आज से ये तुम्हारी बेटी है, दोनों घरों के आंगन में किलकारी सुनाई देगी। तभी तो हम सब खुश रह सकेंगे।’ रजनी ने सीमा को प्यार से गले लगा लिया। ‘भाभी आपका ये अहसान मैं कभी नहीं उतार सकूंगी। आपने मेरी सूनी गोद भरने के लिए इतना बड़ा त्याग किया। आप बहुत अच्छी हो आप जैसा तो कोई हो ही नहीं सकता।’ सीमा अब सुबकने लगी थी।

‘पगली तू रोने क्यों लगी ये तो खुश होने का समय है। खुशी के मौके पर भी कोई रोता है क्या? चल अब चुप हो जा और अपने आंसू पोछ ले।’ समर ने सीमा को चुप कराया।
‘सीमा दीदी मैंनें वही किया जो मुझे और आपके भैया को ठीक लगा मुझे पहले दिन पता चल गया था कि मैं इस बार जुड़वां बच्चों की मां बनने जा रही हूं। तभी मैंने निर्णय कर लिया था कि इन दोनों बच्चों से दो घर आबाद हो सकते हैं। हमने आपको ये बात इसलिए नहीं बताई क्योंकि हम चाहते थे कि पहले डिलीवरी ठीक-ठाक हो जाए फिर इस खुशी को आपके हवाले करेंगे। हम बस आपको खुश देखना चाहते हैं।’ रजनी ने सीमा को सारी बात समझाई। सीमा की जिंदगी की इतनी बड़ी कमी
इस तरह पूरी होगी उसे जरा भी अंदाजा नहीं था। उसकी गोद में सोई नन्हीं सी गुड़िया ने मानो उसे नया जीवन दे दिया हो।

करीब दो महीने बाद जब सीमा ससुराल लौट रही थी तो उसकी विदाई वैसे ही की गई जैसे बच्चे के जन्म के बाद पीहर आई बेटी की होती है। मां जी की नजरों में अपनी बहू के लिए प्यार तो हमेशा से ही था लेकिन अब कुछ ज्यादा ही प्यार करने लगी थीं वो रजनी को, आखिरकार उसके करण बेटी का आंगन और गोद दोनों ही खुशियों से भर गई थी। उनकी बहू ने वो काम कर दिखाया
था जो हर कोई नहीं कर सकता। आज उनके दोनों बच्चों के घर नन्हीं कलियां गुलजार थीं।