Collage of eerie horror scenes with zombie-like figures and a possessed woman.
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Summary: मन पिशाच का ट्रेलर आउट! 33,000 रुपये में कैसे बना राही अनिल बर्वे का ये हॉरर फिल्म चमत्कार?

तुम्बाड़ के निर्देशक राही अनिल बर्वे की नई हॉरर फिल्म ‘मन पिशाच’ का ट्रेलर रिलीज़ हुआ। यह सिर्फ 33,000 रुपये में AI और फोटोशॉप की मदद से बनाई गई शून्य बजट की फिल्म है

2018 की सुपरहिट हॉरर फैंटेसी फिल्म ‘तुम्बाड‘ की सफलता के बाद, इसके निर्देशक राही अनिल बर्वे ने एक बार फिर दर्शकों को चौंकाने के लिए तैयार हो गए हैं। इस बार उनका प्रोजेक्ट है ‘मन पिशाच’, जो न केवल एक साइकोलॉजिकल-हॉरर फिल्म है, बल्कि इसे पूरी तरह से AI और फोटोशॉप की मदद से, लगभग शून्य बजट में बनाया गया है। फिल्म का ट्रेलर 14 मार्च जारी किया गया।

फिल्म की कहानी एक अकेले जूनियर अधिकारी सदाशिव राव के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे विभाग पुरातत्व के तहत हड़ामगांव नामक दूरदराज के गांव में भेजा जाता है। गांव में हाल ही में एक पहाड़ी धंसने के बाद एक अजीब पत्थर का गुंबद दिखाई दिया है।

सदाशिव राव जब सावित्री, एक युवा विधवा के घर में ठहरते हैं, तो वह गांव की विचित्र परंपराओं को महसूस करने लगते हैं रात के समय अपने आप बंद होने वाले दरवाजे, सुनसान गलियां, और उन रहस्यों की चुप्पी जो गांव वाले कभी नहीं खोलते। धीरे-धीरे, राव को यह एहसास होता है कि पहाड़ी के नीचे और गांववालों के भीतर कुछ बेहद डरावना और खतरनाक छुपा हुआ है।

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राही अनिल बर्वे ने इस फिल्म को केवल 33,000 रुपये के बजट में तैयार किया है। फिल्म 80 मिनट लंबी है और इसमें केवल दो अभिनेता यानिया भारद्वाज और दीपक डामले शामिल हैं।

फिल्म की तैयारी में इस्तेमाल किए गए साधन भी बेहद सीमित लेकिन रचनात्मक थे। इसमें 60 पेज की पटकथा, हाथ से तैयार की गई स्टोरीबोर्ड्स, आईफोन से रिकॉर्डिंग, फोटोशॉप और जेनरेटिव AI, और आफ्टर इफेक्ट्स का उपयोग किया गया। राही ने कहा, “यह एक शून्य बजट प्रयोग है। अगर इससे कोई एक कलाकार प्रेरित होकर कुछ भी, बिल्कुल बिना संसाधनों के बना पाए और इस यात्रा का आनंद ले, तो यही मेरे लिए सफलता है।”

फिल्म की पटकथा ज़ाई गुलमोहर ने AI की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए लिखी। संवादों पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय, फिल्म में दृश्यों, मौन और आवाज़ के माध्यम से कहानी को उभारा गया है। प्रत्येक शॉट पहले कागज पर स्केच किया गया ताकि AI की सीमाओं को पार करते हुए दृश्य सुसंगत बने और समय, पैसा तथा संसाधनों की बचत हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI केवल एक उपकरण है, और इसकी वास्तविक शक्ति मानव रचनात्मकता, योजना और अभिनय के निर्देशन पर निर्भर करती है।

फिल्म की शूटिंग में चार महीने लगे, जिसमें प्रत्येक शॉट पर विस्तार से ध्यान दिया गया। राही ने कहा कि जल्दी में AI कमांड देने के बजाय, उन्होंने हर फ्रेम में मानव अनुभव और संवेदनाओं को उतारा।

मन पिशाच का यूट्यूब पर 18 मार्च को प्रीमियर होने वाला है। यह फिल्म नए दौर के कलाकारों और फिल्ममेकर्स के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है कि कहानी और रचनात्मकता ही असली शक्ति हैं, चाहे बजट कितना भी छोटा क्यों न हो। राही अनिल बर्वे का यह प्रयोग दर्शकों के लिए एक अनूठा हॉरर अनुभव लेकर आएगा और यह साबित करेगा कि AI सिर्फ टूल है, इंसानी दृष्टिकोण ही कहानी को जीवंत बनाता है।

राधिका शर्मा को प्रिंट मीडिया, प्रूफ रीडिंग और अनुवाद कार्यों में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। हिंदी और अंग्रेज़ी भाषा पर अच्छी पकड़ रखती हैं। लेखन और पेंटिंग में गहरी रुचि है। लाइफस्टाइल, हेल्थ, कुकिंग, धर्म और महिला विषयों पर काम...