Hindi Motivational Kahani: एक गॉव में जगरूप नाम का एक छोटा मेहनत मजदूरी करने वाला किसान रहता था। वो  उसका एक बेटा दिनेश था। जगरूप अच्छी मूर्तियां बेचने का काम करता था।

लेकिन इधर कुछ दिनों से जगरूप को बुखार आ रहा था जिससे उसकी सेहत खराब हो गई थी। लेकिन घर में खर्च तो रोज है इसी लिए वह मूर्तियों को शहर में बेचने नहीं जा पाता था।                       घर पे पैसे की तंगी होने से जगरूप बाहर दरवाजे पर उदास बैठा था। दिनेश बाहर खेल कर घर आया तो उसने अपने पापा से पूछा –

दिनेश,  क्या बात है बापू तुम कुछ उदास बैठे हो?

जगरूप ,”क्या  बताऊं बेटा ये मूर्ति लेकर शहर जाना चाहता हूं लेकिन बीमारी के कारण इतना कमजोर हो गया हूं, कि हिम्मत ही नहीं है कहीं जाने की। लेकिन बिना पैसे के घर खर्च में बहुत दिक्कत हो रही है और मेरी दवा का भी खर्च है सी अलग

दिनेश, ” तो क्या हुआ पापा मुझे बताओ मैं इन्हें शहर में बेच आता हूं।

जगरूप, नहीं बेटा तू अभी बहुत छोटा है और शहर में बहुत से ठग घूमते रहते हैं तेरे जैसे बच्चे को देखेंगे तो वह सारी मूर्ति और पैसा लूट लेंगे।

दिनेश ,”पापा मेरा केवल नाम दिनेश है। आप एक बार आजमा कर तो देखो, मैं ये सारी मूर्ति बेच भी दूंगा और आपसे अच्छे दामों पर बेचूंगा।

दिनेश की मॉं,” नहीं नहीं छोटे से बच्चे को शहर नहीं भेज सकते। आप कहो मैं चली जाती हूं। लेकिन मैंने तो गॉव के बाहर का रास्ता भी नहीं देखा।

दिनेश,”मॉं तुम्हें याद है मैं एक बार पापा के साथ शहर गया था। मुझे रास्ता अच्छे से याद है। मुझे जाने दो।

दिनेश बहुत देर तक जिद करता रहा। आखिर जगरूप उसे शहर भेजने के लिये तैयार हो गया। क्योंकि नवरात्र का समय था पूरी मेहनत इसी समय बेची गई मूर्ति में लगी थी , फिर कोई मूर्ति खरीदेगा नहीं।

जगरूप ,”बेटा शहर जा तो रहा है। लेकिन मेरी तीन बातें याद रखना। तुझे कोई लूट नहीं सकेगा।

पहली बात,” अपनी मॉं से चार रोटी ले जाना जब भी भूख लगे तब तीन बार ये बात बोलना उसके बाद खाना वह बात है -‘‘एक खाउं, दो खाउं, तीन खाउं या चारों को खा जाउं।

दूसरी बात,” जब तू रात को किसी धर्मशाला में विश्राम करने के लिये रुके तो जो भी कमरा ले उसकी  (कुण्डी) अन्दर से लगा कर देख लेना। अगर कुंडी ठीक से न लगे तो अगली विश्राम गृह में चले जाना।

तीसरी बात,” जब भी किसी दुकान पर मूर्ति दिखाना और वो कीमत कम करने को बोले तो ऐसे बोलना – ‘‘पापा से पूछ कर आता हूं’’ यह कहकर वहां से निकल लेना। अगर दुकानदार रोके तो ठीक ,नहीं तो दूसरी दुकान पर चले जाना।

दिनेश ने सारी बातें ध्यान से सुनी और चार रोटी और एक प्याज लेकर झोले में भर कर शहर पहुंच जाता है।

शहर पहुंचते पहुंचते उसे शाम हो जाती है।

तभी उसके पीछे चार बदमाश लग जाते हैं। दिनेश इस सब से बेखबर एक अंधेरी गली से जाने लगता है।

पहला बदमाश, यह मौका अच्छा है इसे इस गली में पकड़ कर लूट लेते हैं जरूर इसके झोले में कीमती सामान होगा।

तीनो उसकी हां में हां मिलाते हैं। वे धीरे धीरे दिनेश की ओर बढ़ने लगते हैं। इधर दिनेश को भूख लगती है वह एक जगह बैठ जाता है, और खाने का झोला खोल लेता है – एक खाउं, दो खाउं, तीन खाउं या चारों को खाजाउं।

दिनेश की पीठ के पीछे कुछ दूर खड़े चारों बदमाश यह बात सुन लेते हैं।

दिनेश तीन बार तेज आवाज में यह बात बोलता है।

यह सुनकर चारों वहां से भाग जाते हैं। भोला बैखबर अपना खाना खा रहा था।

कुछ दूर जाकर दूसरा बदमाश बोलता है, अबे मरवा दिया था वो लड़का नहीं भूत था। हम चारों को खाने की बात कर रहा था, अच्छा हुआ भाग आये।

खाना खाकर दिनेश एक धर्मशाला में पहुंचता है। धर्मशाला का मालिक शातिर चोर था। वह दिनेश को कमरा दिखाता है। दिनेश देखता है कमरे में कुंडी नहीं है मतलब वह अंदर से बंद नहीं होगा।

धर्मशाला का मालिक,” बच्चे ये कमरा सबसे अच्छा है और इससे भी अच्छी बात है यह मुफ्त है। इसका कोई किराया नहीं है।

दिनेश,” मुझे ऐसा कमरा चाहिये जिसमें कुण्डी हो।

धर्मशाला का मालिक समझ जाता है कि यह बच्चा समझ गया कि रात को सोने के बाद कोई भी इसका माल चुरा लेगा। वह कहता है 

मालिक,” आगे बहुत सी धर्मशाला हैं। बहुत महंगी है यहां मुफ्त में मिल रही है तो नखरे कर रहा है। चल भाग यहां से।

दिनेश,” आगे एक धर्मशाला में कमरे की कुण्डी बंद करके देख लेता है और कमरा लेकर चैन से सो जाता है।

अगले दिन वह अपना झोला लेकर एक दुकान पर जाता है।

दुकानदार, तुम्हारी मूर्ति उतनी अच्छी भी नहीं हैं। जितने पैसे तुम मांग रहे हो मैं तो उसके आधे दूंगा।

दिनेश,” रुको पापाजी से पूछ कर आता हूं। वह उठ कर चल देता है।

दुकानदार,”अरे मैं तो समझ रहा था ये तो अकेला है इसके साथ इसका बाप भी है। सही दाम में दे रहा है खरीद लेता हूं। कहीं किसी और दुकानदार को मूर्ति न दे दे। सुनो लड़के सारी मूर्ति दे दोऔर पैसे ले लो।

दिनेश,” सारी मूर्ति बेच कर पैसे लेकर अपने घर आ जाता है।