Motivational Story in Hindi: सुबह के नौ बज रहे थे और सासु मां आज पहले से ही उठ चुकीं थीं।
और मन ही मन में प्लान कर रही थीं कि कैसे बहू को जताऊं कि आज तुम देर से सोकर उठ रही हो उन्होंने ये दिखाया कि वो सुबह-सुबह भजन गा रही हैं “उठ जाग मुसाफिर भोर भई अब रैन कहां जो सोवत है ,जो सोवत है वो खोवत है…….।
अब बहू समझ तो गई ही थी कि ये भजन नहीं है ये तो मुझे सुनाने के लिए ही गा रहीं हैं।
सो बहू ने भी गुनगुना कर ही उत्तर देना ठीक समझा ” इट्स माय लाइफ……।
मैं चाहे ये करू मैं चाहे वो करूं मेरी मर्जी………।
अब तो सासू मां को समझ आ ही गया था कि ये मुझे ही सुना रही है सो उन्होंने इस बार अपने गीत को थोड़ा भावुकता का टच मारते हुए व्यंग्य करना चाहा ” सुख के सब साथी दुख में ना कोई……….।
तो इधर बहुरानी भी समझ गई कि ये इमोशनल पंच है।तो उसने भी अपने गीत की शैली को चेंज कर दिया और उसने सास और ननद को दोनों को टारगेट बनाकर अपने गीत गुनगुनाने शुरू किए “तूने दिल के रकीबों संग मेरे हो दिल पे चलाई छुरियां……।”सब्जियां भी कट ही गई इस गीत के सहारे।
अब सासू मां ने भी अपने सुर में परिवर्तन कर दूसरे गानें पर जाना ठीक समझा “दुनियां में हम आएं हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा”।
बहू को लगा कि ये इमोशनल कार्ड है सो उसने भी इमोशनल कार्ड से ही उत्तर देना चाहा “जीना है तो हंस के जियो जीवन में इक पल भी रोना ना हंसना ही तो है जिंदगी ,रो रो के जीवन ये खोना ना”।
अब तो सासू मां के लिए भी चैलैंजिंग हो गया था कि अब कौन सा ऐसा गीत है जिससे मैं अपने को मजबूती प्रदान करूं। तो उन्होंने वापस भजन द्वारा ही व्यंग्य तीर छोड़ा”कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं बाद अमृत पिलाने का क्या फायदा “।
बहू ने भी सुर-ताल को मिलाते हुए जताना चाहा कि मैं किसी से कम थोड़े न हूं।और रसोईं के काम और अपने स्वर को गति प्रदान करते हुए गीत के मुकाबले को
आगे बढ़ाया” बिजली गिराने मैं हूं आई कहते हैं मुझको हवा हवाई”। इतना भड़काऊ गीत सुनकर तो एक बार सासुमां को थोड़ी सी बेचैनी हुई उनको भगवान याद आने लगे “भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना अबतक तो निभाया है,आगे भी निभा देना”।इस बार उन्होंने इस भजन से ये जताया जैसे कि ये बहू बहुत तेज आई है।
अब बहू ने मौका देखकर यही जताना चाहा कि सास कौन सी बहुत सीधी साधी हैं”सास गारी देवे ननद चुटकी लेवे ससुराल गेंदा फूल….।
एक के बाद एक म्यूजिकल दांव पेंच चले ही जारहे थे।
बस ऐसे समय बीतता रहा पर हार कोई नहीं मानने वाला था तब तक घर के पुरुषों के आफिस से लौटनें का समय हो गया।बेटे को आफिस से आया देख सास ने और इधर बहू ने भी अपने पति को थका हुआ देखकर दोनों ने ही माहौल को ठीक करने की पहल की और संयोग से इस बार दोनों ने एक ही गीत गाया जो दोनों को ही प्रिय था जिसे वो खुशनुमा पलों में एक साथ बैठकर चाय पीते हुए गुनगुना पड़ती थीं “ये तेरा घर ये मेरा घर किसी को देखना हो गर तो पहले आके मांग ले तेरी नज़र मेरी नज़र”।
इस तरह इस संगीतमयी प्रतियोगिता का शुभ समापन हो चुका था।
सास-बहू की म्यूजिकल नोक झोंक-गृहलक्ष्मी की कहानियां
