Do not hesitate to speak openly about your sexual problems
Do not hesitate to speak openly about your sexual problems

Sexual Health Talk: जब भी यौन स्वास्थ्य की बात होती है, तो पुरुषों के सेक्शुअल हेल्थ डिसऑर्डर्स पर ज्यादा चर्चा होती है, लेकिन महिलाओं में होने वाली सेक्शुअल समस्याएं अब भी समाज में चुह्रश्वपी के पर्दे में छुपी रहती हैं। सेक्स केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन की भी जरूरत है।

किसी महिला को यौन रोग तब होता है जब वह किसी साइकोसोशल यानी मनोसामाजिक या ऑर्गैनिक यानी जैविक कारण से आनंददायक सेक्स नहीं कर पाती है। यह मुख्यत: चार प्रकार का होता है1.
1.इच्छा विकार: जब किसी महिला को अपने पार्टनर के साथ सेक्सुअल इंटीमेसी की
इच्छा नहीं होती।

2.उत्तेजना विकार: जब किसी महिला को अपने साथी द्वारा सेक्शुअली उत्तेजना पाने में
कठिनाई होती है।

3.कामोत्तेजना विकार: सेक्स के दौरान कठिनाई, असमर्थता या दर्द।

4.यौन पीड़ा विकार: सेक्स के दौरान या बाद में दर्द।

कई महिलाओं को अपने रिश्ते में किसी-नि कसी मोड़ पर सेक्स करने में समस्या होती है। यह अस्थायी हो सकता है, कुछ दिनों तक रह सकता है या वजह के आधार पर लंबे समय तक बना रह सकता है। यदि किसी को भी ऐसी कोई समस्या हो रही है, तो उन्हें जल्द से जल्द अपने एंड्रोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए ताकि यह समस्या आपके रिश्तों को प्रभावित न करने लगे।

शारीरिक स्वास्थ्य: शरीर से संबंधित कोई भी स्वास्थ्य समस्या किसी महिला को सेक्स की इच्छा से रोक सकती है। वह दर्द में हो सकती है, उसे थकान हो सकती है या बस वह इसके लिए तैयार नहीं हो
सकती है। यदि वह अपनी किसी स्वास्थ्य समस्या के लिए दवाइयां ले रही है, तो इसकी वजह से भी उसका लिबिडो प्रभावित हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य: एंजायटी या डिप्रेशन की वजह से कई महिलाएं सेक्स में रुचि
लेना बंद कर देती हैं।

पारस्परिक संबंध: अच्छे और हेल्दी सेक्स के लिए यह जरूरी है कि दोनों साथी के बीच एक अच्छा और भरोसेमंद रिश्ता हो। यदि किसी एक का भी भरोसा टूटता है, तो यह सेक्स को इन्जॉय करने
की उनकी क्षमता को प्रभावित करता है।

सामाजिक परिस्थितियां: अगर महिला अपने काम में बहुत व्यस्त है और थकी हुई घर आती है, तो उसका सेक्स का मन ही नहीं करेगा। स्ट्रेस भी लिबिडो को कम कर सकता है। बच्चे का जन्म सेक्शुअल रिश्ते में बाधा डाल सकता है, क्योंकि महिला बच्चे की देखभाल की वजह से थक जाती है।

सेक्शुअल डिसफंक्शन का मैनेजमेंट यदि किसी का सेक्स करने का मन नहीं कर रहा है या वह इसे इन्जॉय नहीं कर पा रहे हैं, तो डॉक्टर के पास जाना जरूरी है। वह आपके इतिहास और कारण जानने के लिए आपकी जांच करेगा। यह समझना बेहद जरूरी है कि दोनों पार्टनर के लिए सेक्शुअल काउन्सलिंग उपयोगी है। अपनी रूटीन में बदलाव लाने और अलग-अलग पोजीशन ट्राई करके सेक्स को और दिलचस्प बनाने की कोशिश की जा सकती है। वजाइनल क्रीम या ल्यूब्रिकेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिकतर महिलाओं को, खासकर उम्र बढ़ने के साथ, संभोग शुरू करने से पहले ज्यादा उत्तेजना और फोरह्रश्वले की जरूरत होती है। अधिकतर महिलाओं को संभोग के दौरान नहीं बल्कि सिर्फ योनि प्रवेश से ही ऑर्गैज्म मिल जाता है। ऑर्गैज्म पाने के लिए उन्हें अपने पार्टनर द्वारा अपने निह्रश्वपल और क्लिटोरिस को उत्तेजित करने की जरूरत पड़ सकती है।
इसमें वाइब्रेटर मदद कर सकते हैं। मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन या ऑरल सेक्स यानी मुख मैथुन जैसी अन्य सेक्शुअल एक्टिविटीज भी ट्राई किए जा सकते हैं।

सेक्स के दौरान दर्द का कारण पेल्विस यानी श्रोणि में सूजन हो सकती है। सेक्स के दौरान दर्द के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए अपने डॉक्टर से बात करें। वह दर्द का कारण जानने और आपके लिए सही इलाज बताने में आपकी मदद कर सकते हैं।
डिस्पेरुनिया योनि में प्रवेश या संभोग की कोशिश या पूरा होने के दौरान होने वाला दर्द है।
वैजिनिस्मस वजाइना में प्रवेश की कोशिश के दौरान वजाइना यानी योनि के आस पास होने वाला एक रिफ्लेक्सिव टाइटनिंग है। अगर आपको मेनोपॉज हो चुका है या आपका गर्भाशय या अंडाशय निकाल दिया गया है,
तो एस्ट्रोजन हार्मोन लेने से सेक्शुअल समस्याओं में मदद मिल सकती है। अगर आप पहले से एस्ट्रोजन नहीं ले रही हैं, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।

Sexual Health Talk-menopause
menopause

1. रात में पसीना आना, हॉट फ्लैशेज और नींद आने में दिक्कत।
2. अचानक मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन और दिमाग में धुंधलापन।
3. वजाइना का सूखना, दर्द भरा संभोग, लिबिडो में कमी।

4.वजन बढ़ना, सुस्ती और बालों का झड़ना। हॉट फ्लैशेज, मूड में बदलाव और वजाइना के सूखने से निपटने के लिए सबसे अच्छे उपायों में से एक हार्मोन रिह्रश्वलेसमेंट थेरेपी है। स्स्क्रढ्ढह्य, गैबापेंटिन
जैसे गैर हार्मोनल विकल्प और जीवनशैली में बदलाव उनके लिए सही हैं, जो हार्मोन चुनने में सक्षम नहीं होते हैं। एस्ट्रोजन क्रीम या ल्यूब्रिकेंट जैसे वजाइनल लोकल इलाज लोगों को आराम और इंटीमेसी अपनाने में मददगार होते हैं। रेगुलर फिजिकल एक्टिविटीज, कैल्शियम से भरपूर डाइट और माइंडफुलनेस भी मदद करते हैं।

बड़े शहरों में मेनोपॉज मैनेजमेंट एक एक्सपर्ट क्लिनिक में किया जाता है, जिसमें व्यक्तिगत मेनोपॉज सपोर्ट के साथ हार्मोनल और साइकोसोशल यानी मनोसामाजिक सहायता और हड्डियों के
स्वास्थ्य, दिल संबंधी जोखिम और हार्मोनल स्थिति की जांच शामिल होती है। मेनोपॉज का मतलब अंत नहीं, बल्कि एक रीसेट करना है। सही गाइडेंस और प्रोत्साहन मिलने पर महिलाएं इसका
सामना शक्ति और नए आत्मविश्वास के साथ कर सकती हैं।

सेक्शुअल डिसफंक्शन एक आम लेकिन अनदेखी समस्या है, जिससे लाखों महिलाएं जूझ रही हैं। इसे छुपाने की बजाय स्वीकार करना और इलाज की दिशा में कदम बढ़ाना न केवल शारीरिक
बल्कि मानसिक और वैवाहिक जीवन को भी बेहतर बना सकता है। जब महिलाएं अपने शरीर और इच्छाओं को समझने और स्वीकार करने लगती हैं,
तभी वे संपूर्ण रूप से स्वस्थ और सशक्त बनती हैं।

(लेखक कॉस्मेटिक सर्जन एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सुअल मेडिसिन स्पेशलिस्ट हैं।)

मेनोपॉज को हिन्दी में रजोनिवृत्ति कहते हैं, जो किसी भी महिला को 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच आता है और तब महिला अपनी प्रजनन क्षमता खो देती है। इसका निदान तब किया जाता है जब लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते हैं, और यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की नैचुरल
कमी के कारण होता है।

menopause
menopause

“सेक्स के दौरान दर्द का कारण पेल्विस यानी श्रोणि में सूजन हो सकती है। सेक्स के दौरान दर्द के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए अपने डॉक्टर से बात करें।”