Persistent Stomach Pain: महिलाओं में बारबार होने वाला पेट दर्द अक्सर पीरियड्स, गैस या थकान का नाम देकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन हर बार पेट दर्द को सामान्य मान लेना सही नहीं होता। यह हार्मोनल असंतुलन, पाचन संबंधी गड़बड़ी या किसी स्त्री-रोग का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
महिलाओं से अक्सर पेट दर्द की शिकायत सुनी जाती है, जबकि अमूमन महिलाएं इसे मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। उनके सोच है कि यह पीरियड्स, तनाव या व्यस्त दिनचर्या की वजह से हो रहा है जबकि सच तो यह है कि पेट का यह दर्द किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि यदि समय रहते पेट दर्द की सही पहचान और इलाज न हो, तो यह स्थिति गंभीर रूप भी ले सकती है। आइए शालीमार बाग, नई दिल्ली स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के रोबोटिक्स, बैरिएट्रिक, लैप्रोस्कोपिक और जनरल सर्जरी विभाग
के निदेशक डॉ. पंकज शर्मा से जानते हैं बार-बार के पेट दर्द से जुड़ी हर जानकारी के बारे में-
महिलाएं क्यों नजरअंदाज करती हैं पेट दर्द
महिलाओं में पेट दर्द को सामान्य मानने के पीछे कई सामाजिक और जीवन शैली से जुड़े कारण हैं। इनमें निम्न मुख्य हैं- सांस्कृतिक परवरिश और आदत: बचपन से ही महिलाओं को दर्द सहने की आदत डाल दी जाती है।
पीरियड्स से भ्रम: पेट और श्रोणि की कई समस्याएं पीरियड्स यानी माहवारी से जुड़ी लगती हैं, इसलिए इसे सामान्य मान लिया जाता है।
व्यस्त जीवन: महिलाओं को घर, परिवार और काम के बीच खुद के लिए समय नहीं मिल पाता है, तो पेट दर्द की स्थिति में भी वे आराम नहीं करती हैं।
महिलाओं में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का ओवरलैप बहुत अधिक होता है। इसलिए कई बार महिलाएं यह समझ ही नहीं पातीं कि उनका दर्द सामान्य नहीं है, बल्कि जटिल भी हो सकता है।
पेट दर्द के पीछे छिपी 5 आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्याएं-

1.पित्त की पथरी: हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ना और खानपान की वजह से महिलाओं में पित्त की पथरी अधिक देखी जाती है। इसकी वजह से पेट के दाहिनी ओर तेज दर्द हो सकता है, खासकर तैलीय भोजन के सेवन के बाद। कई महिलाएं महीनों तक इस दर्द को गैस या एसिडिटी समझकर नजरअंदाज करती रहती हैं। ऐसे में अक्सर सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बन जाता है।
2.अपेंडिसाइटिस: महिलाओं में अपेंडिसाइटिस का दर्द पीरियड्स के दर्द जैसा महसूस हो सकता है। इसका निदान देर से होने पर फटा हुआ अपेंडिक्स जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए पेट में अचानक और तेज दर्द आने पर इसे हल्के में न लेने की सलाह दी जाती है।
3.एंडोमेट्रियोसिस: एंडोमेट्रियोसिस एक स्त्री रोग संबंधी समस्या है, लेकिन इसका दर्द अक्सर पाचन तंत्र की बीमारी जैसा महसूस होता है। कई बार इसे पहचानने और इलाज के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
4. अंडाशय की सिस्ट: पेट में हल्का फूला हुआ लगना या श्रोणि में दर्द को अमूमन पीरियड्स से जुड़ा समझा जाता है। लेकिन ओवेरियन टॉर्शन की वजह से भी पेट में दर्द हो सकता है, जिसके लिए तुरंत इलाज और सर्जरी की जरूरत होती है। दरअसल ओवेरियन टॉर्शन एक ऐसी मेडिकल स्थिति है, जिसमें अंडाशय यानी ओवरी अपने ही आसपास मुड़ जाता है, जिससे उसके साथ जुड़ी रक्त वाहिकाएं दब जाती हैं। इस वजह से अंडाशय में खून का प्रवाह रुक जाता है और पेट में दर्द की पैदा हो जाती है।
5.हर्निया: कुछ महिलाएं पेट या जांघ के पास उभरे हिस्से को मोटापा समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। मगर बिना इलाज वाला हर्निया आंतों को दबा या फंसा सकता है, जो मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है।
पेट में दर्द की समय पर पहचान क्यों है जरूरी

आधुनिक डायग्नॉस्टिक तकनीक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की मदद से कई गंभीर समस्याओं का जल्दी और कम दर्द के साथ इलाज संभव है। चाहे दर्द हल्का हो, तेज हो या बार-बार हो, इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि पेट में दर्द का समय रहते पता चल जाए तो इलाज सरल होता है
और जटिलताएं कम हो जाती हैं।
कब करें डॉक्टर से संपर्क

यदि आराम करने पर भी दर्द कम न हो, दर्द के साथ बुखार, उल्टी या सूजन हो, पाचन या मल त्याग में बदलाव आए, भोजन करने के बाद दर्द बढ़ जाए और रोजमर्रा की गतिविधियों में पेट दर्द की वजह से बाधा आने लगे तो यह जरूरी है कि आप तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। बारबार दर्द होने पर पेन किलर न लें और इसे सामान्य न मानें। एक साधारण अल्ट्रासाउंड या डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी गंभीर समस्या को जल्द पकड़ सकती है।
महिलाओं में पेट दर्द की अनदेखी के सामाजिक कारण
महिलाएं अक्सर अपने स्वास्थ्य को दूसरे पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के पीछे डाल देती हैं। कई बार उन्हें यह लगता है कि दर्द सहना ही सामान्य है। घर और ऑफिस की व्यस्त दिनचर्या, सामाजिक दबाव और पीरियड्स से जुड़े मिथक भी पेट दर्द को सामान्य समझने में योगदान
देते हैं।
पेट दर्द के लिए जीवनशैली में बदलाव है जरूरी
सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार से भी पेट दर्द और उससे जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सकता है। इसके लिए निम्न बदलाव जरूरी हैं-
संतुलित आहार: तैलीय और प्रोसेस्ड फूड से बचें।
नियमित व्यायाम: पेट की समस्या को
कम करने में हल्की एक्सरसाइज या योग की मदद ले सकते हैं।
तनाव कम करना: मानसिक तनाव से पेट और श्रोणि की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
पर्याप्त नींद: नींद की कमी पाचन तंत्र को प्रभावित करती है और इसकी वजह से पेट दर्द हो सकता है।
महिलाओं का शरीर जटिल और संवेदनशील है। पेट दर्द को सामान्य समझना कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के संकेत को नजरअंदाज करना हो सकता है। चाहे समस्या पित्त की पथरी हो,
अपेंडिसाइटिस, एंडोमेट्रियोसिस, अंडाशय की सिस्ट या हर्निया की, समय रहते पहचान और इलाज से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है।
“बार-बार दर्द होने पर पेन किलर न लें और इसे सामान्य न मानें। एक साधारण अल्ट्रासाउंड या डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी गंभीर समस्या को जल्द पकड़ सकती है।”
