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निदान-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां बिहार
Nidaan-Balaman ki Kahaniya

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

भारत और वेस्टइंडीज के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था। ऋत्विक, जो कि अपने महाविद्यालय की क्रिकेट टीम का एक खिलाड़ी भी था, की आँखें टी.वी. स्क्रीन पर गड़ी हुई थीं। वह भारत की बॉलिंग और वेस्टइंडीज की बैटिंग बड़े गौर से देख रहा था। भारत की बॉलिंग और फील्डिंग पर वह बार-बार मोहित हुआ जा रहा था। उसे टीम के प्रत्येक सदस्य का तालमेल लुभा रहा था, तो वेस्टइंडीज की बिखरी-बिखरी बैटिंग पर वह भीतर-ही-भीतर क्रोधित हो रहा था…।

वेस्टइंडीज के लगातार चार खिलाड़ियों के आउट होते ही उसके मुँह से अकस्मात् निकला- “इस टीम की हार तो निश्चित है।”

बगल में बैठे उसके छोटे भाई ने कहा- “अभी तो बैटिंग हेतु उनके खिलाड़ी आने बाकी हैं भैया..। अभी से ही आप ऐसा कैसे कह सकते हैं?”

“छोटे! तू नहीं समझेगा। जहाँ बिखराव हो, वहाँ हार निश्चित है। भारत ने बॉलिंग एवं फील्डिंग की तरह ही यदि आपसी तालमेल से बैटिंग की, तो उनकी जीत सुनिश्चित है।”

“हाँ..ये तो है भैया!”

अपनी बात के साथ ही ऋत्विक के मन-मस्तिष्क में अंकित होने लगे… समाज में होने वाले नित्य-प्रतिदिन के आपसी लड़ाई-झगड़े…अभी वह इन मानसिक उलझनों में उलझ-सुलझ ही रहा था कि बाहर से सबसे छोटा भाई रोते हुए कमरे में आया- “भैया! मोहल्ले के हातिम और उसके भाई ने मिलकर मुझे पीटा है…।” इतना कह, रोते हुए वह अपने कमरे में चला गया।

उसके मुँह से अकस्मात् निकला- “अब मेरा कोई भाई या किसी और का भी भाई ऐसे रोते हुए घर नहीं आएगा। समाज में हम सब भाई आपस में प्यार-मोहब्बत से रहेंगे और एक मिसाल पेश करेंगे। हम कभी किसी से कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं करेंगे और किसी भी समस्या का समाधान मिल-जुलकर करेंगे।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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