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लोक कथाएं
Namak or Pathar-Lok Kathae

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

नमक और पत्थर पानी में गोता खाते-खाते पानी में डूब गए थे। पत्थर तो पत्थर था परन्तु नमक पानी में गलने लग गया था। नमक को गलता देख पत्थर जोर-जोर से आवाज देने लगा।

‘गल गया, ओए…गल गया। ….नमक गल गया।’

उसे जोर से बोलता देखकर लोगों ने कहा- “तुम तो ठीक-ठाक हो, क्यों ऊंचे चिल्लाता है। अपनी जान देख, और शोर बन्द कर।”

पत्थर के मन में ठन-ठनक हुई। सब समझ कर वह चुप हो गया। वह जान गया था कि नमक गंगा गया गंगादास और जमुना गया जमुनादास है।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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