मॉर्निंग वॉक: Morning Walk Story
Morning Walk Story

Morning Walk Story: मॉर्निंग वॉक की सलाह तो सभी देते है, कुछ तो सलाह देकर खुद मॉर्निंग वॉक पर नहीं जाते। मॉर्निंग वॉक के लिए एलोपैथी, होमियोपैथी, आयुर्वैदिक, यूनानी आदि किसी पैथी की सलाह की जरूरत नहीं है। सभी ने मॉर्निंग वॉक को मान्यता दे रखी है। हालांकि कई विरोधाभास भी है, कोई कहता है मात्र 30 मिनट तो  कोई 45 मिनट ही टहलो तो कोई कहता है तेज चाल चलो, तो कोई कहता है दौड़ भी लगाओ।
मॉर्निंग वॉक के फायदे को देखते हुए बगीचे में खूब भीड़ होने लगी तो नगर निगम ने ऑक्सिजन टैक्स लगा दिया। ऑक्सिजन टैक्स की दरें भी तय कर दी गई। एक दिन का दस रुपये और महीने भर के लिए पास बनाने की भी व्यवस्था कर दी, पर एक माह में कितना प्रवेष शुल्क लेना है, यह तय नही हुआ था। नगर निगम ने ऑक्सिजन टैक्स पर जीएसटी नहीं लगाकर हम मॉर्निंग वॉक करने वालों पर बहुत उपकार किया। इस बीच ऑक्सिजन टैक्स को लेकर शहर के जागरूक लोग और नेतागण जो इंतजार में ही रहते हैं कि कब आंदोलन करना है और हड़ताल पर बैठना है। ये सब ऑक्सिजन टैक्स के विरोध में नगर निगम के खिलाफ लामबंद हो गये। हालांकि ये आंदोलनकारी बगीचे में मॉर्निंग वॉक करने नहीं आते पर जनता के लिए सड़कों पर उतर आए हैं, जिसके चलते कुछ दिन पार्क बंद रहा। हड़ताल सफल रही, जिसका जश्न मनाया गया। नगर निगम ने मात्र सुबह 6 बजे से 10 बजे तक के लिए ऑक्सिजन टैक्स पर छूट प्रदान कर दी। लेकिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक आपको 10 रुपये प्रवेश शुल्क यानी ऑक्सिजन टैक्स देना ही होगा।
मॉर्निंग वॉक के लिए सबसे ज्यादा बुजुर्ग ही सचेत रहते हैं। मॉर्निंग वॉक और बुजुर्ग एक-दूसरे के पूरक हैं। मॉर्निंग वॉक का नाम आते ही बुजुर्गों की छवि ही सामने आ जाती है। इन बुजुर्गों में महिला-पुरुष दोनों ही होते हैं। मॉर्निंग वॉक करने के बाद ये सब बुजुर्ग अपने-अपने गु्रप में एक जगह एकत्रित होते हैं। सब मिलकर कुछ धनराशि चंदे के रूप में एकत्रित करते हैं और जिस दिन जिसका जन्मदिन होता है, उस दिन उसके लिए केक और गिफ्ट का इंतजाम किया जाता है। इनमें अधिकतर बुजुर्ग पेंशनभोगी होते हैं। इनके वार्तालाप में राजनीति, महंगाई, पारिवारिक घटनाएं, पेंशन में इजाफा, कार्यालयों की पुरानी यादें, सोने-चांदी के भाव से लेकर सब्जियों के भाव आपको मॉर्निंग वॉक में ही मिल जाएंगे।
मॉर्निंग वॉक के दौरान महिलाओं का वार्तालाप चरम पर होता है। महिलाएं अपने-अपने गु्रप में प्रतिदिन एक ही समय पर एकत्रित होकर मॉर्निंग वॉक करती हैं। आपको दूर से ही इनकी आवाजें आने लगेंगी। इनकी बातों का विषय सास-बहु, बेटा-बेटी और पति तो होता ही है साथ में पारिवारिक कलह, पड़ोसी की बुराई, पूजा-पाठ, त्यौहार आदि भी होता है। मॉर्निंग वॉक की महिलाओं का ग्रुप अपने सदस्यों का जन्मदिन भी साफ-सुथरे पार्क में मनाते हैं। जिस महिला का जन्मदिन होता है वह खूब तैयार होकर आती है, यानी आप पहचान सकते कि आज किस महिला का जन्मदिन है। जिस महिला का जन्मदिन है वह स्वयं केक लेकर आती है। पार्क के नोटिस बोर्ड ‘कृपया स्वच्छता बनाये रखें’ के नीचे ही केक काटने की औपचारिकता की जाती है। खूब हो-हल्ला और हंसी के साथ जन्मदिन मनाया जाता है। ग्रुप की सभी महिलाएं जिसका जन्मदिन है उसे उपहार प्रदान करती है। कचरा भी वहीं छोड़ दिया जाता है।
इस समय अमीर लोगों को महंगी-महंगी नस्ल के कुत्ते पालने का खूब शौक है। यह उनके स्टेट्स की बात है, क्या जमाना आ गया कुत्ते पालना भी एक स्टेट्स हो गया है। मॉर्निंग वॉक के दौरान डॉगी जो गंदगी करते हैं वो सबसे दु:खदायी है। 
युवाओं में मॉर्निंग वॉक करने में रूचि कम ही दिखाई देती है। युवा फैशन के तौर पर आधुनिक जिम ज्वाइंन करते हैं। उन्हें सुबह की ठंडी हवा आधुनिक जिम में एसी के माध्यम से मिल जाती है। कुछ लड़के-लड़कियां मॉर्निंग वॉक करते समय अपने प्रेमी-प्रेमिकाओं से मोबाइल पर बातें करते नजर आते हैं। ये लड़के-लड़कियां अपनी बातें गोपनीय रखनें के लिए हेडफोन का उपयोग करते हैं। इनके माता-पिता को लगता होगा अपने बच्चे अपनी सेहत के प्रति कितने जागरूक हैं कि नियमित मॉर्निंग वॉक के लिए निश्चित समय पर घर से निकल जाते हैं। मॉर्निंग वॉक करने के बाद कुछ युवा अपनी  एक्सरसाईज करते हुए वीडियो बनाते दिख जाएंगे। कुछ युवा योगा करते हुए वीडियो बनाते हैं और सोशल मीडिया पर डालते रहते हैं। कुछ युवा तो बगीचे की बैंच पर पसरकर मैसेज का आदान-प्रदान करते रहते क्योंकि उन्हें यहां नेटवर्क अच्छा मिलता है।
पार्क में मॉर्निंग वॉक पर जाएं। मोबाइल साथ में रखें, कब किस तरह की मेडिकल इमरजेंसी की आवश्यकता पड़ जाए। दिन भर घर पर अकेले रहने के बाद मॉर्निंग वॉक पर अपने मित्रों से मुलाकात होती है तो अच्छा लगता है। मॉर्निंग वॉक का कोई सदस्य बीमार है या हॉस्पिटल में एडमिट है, तो उसकी खोज खबर लेना जरूरी है। उनका मनोबल बढ़ाता है। आज जब परिवार साथ नहीं देता है तो ये मित्र मंडली ही आगे आकर सब देख लेती है।

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