Mytho Story: प्राचीन काल की बात है, जब देवता और असुरों के बीच अनंत युद्ध हुआ करते थे। देवताओं की रक्षा के लिए कई दिव्य योद्धा जन्म लेते थे, और उन्हीं में से एक थी—कालरात्रि।
एक महाशक्तिशाली योद्धा, जिसे स्वयं माँ काली का वरदान प्राप्त था। लेकिन उसकी किस्मत में केवल युद्ध नहीं, बल्कि एक श्रापित प्रेम भी लिखा था।कालरात्रि का जन्म हिमालय की गुफाओं में हुआ था। जन्म से ही उसमें अद्भुत शक्तियाँ थीं—उसकी आँखों से अग्नि निकलती थी, उसकी तलवार से काल भी भय खाता था।
देवताओं ने उसे असुरों के नाश के लिए भेजा। उसने अनेक युद्ध लड़े, अनेक असुरों को समाप्त किया। लेकिन फिर उसकी मुलाकात महाकेतु से हुई—एक असुर राजकुमार, जो अपनी प्रजाति से अलग था।
महाकेतु बलशाली था, लेकिन निर्दयी नहीं। उसकी आँखों में क्रूरता की जगह एक गहरी करुणा थी। जब कालरात्रि ने उसे पहली बार देखा, तो उसके मन में अजीब हलचल हुई।
“मैं तुम्हें मारने आई हूँ,” कालरात्रि ने तलवार तानकर कहा।
“लेकिन मैं मरना नहीं चाहता,” महाकेतु मुस्कुराया, “मैं तुम्हारे साथ जीना चाहता हूँ।”
कालरात्रि और महाकेतु की मुलाकातें बढ़ती गईं। दोनों का प्रेम स्वर्ग और पाताल की सीमाओं को तोड़ने लगा। लेकिन यह प्रेम देवताओं और असुरों को स्वीकार नहीं था।
देवराज इंद्र ने जब यह सुना, तो वे क्रोधित हो गए। उन्होंने कालरात्रि को श्राप दिया—”अगर तुमने अपने प्रेम को अपनाया, तो तुम हमेशा के लिए एक असुरिणी बन जाओगी!”

कालरात्रि के सामने कठिन निर्णय था—अपनी दिव्यता को बचाए या अपने प्रेम को।
देवताओं और असुरों के बीच अंतिम युद्ध का समय आ गया। कालरात्रि को देवताओं की ओर से लड़ना था, और महाकेतु को असुरों की ओर से।
“तुम तलवार उठाओगी?” महाकेतु ने पूछा।
“अगर मैं नहीं उठाऊँगी, तो देवता मुझे नष्ट कर देंगे।”
युद्ध हुआ। भयंकर संग्राम। अंत में, कालरात्रि को वही करना पड़ा जिसके लिए वह बनी थी—उसने अपनी तलवार महाकेतु के सीने में उतार दी।
महाकेतु ने मरते-मरते कहा, “तुम्हारी जीत हुई या हार, यह सोच लेना…”
महाकेतु की मृत्यु के बाद कालरात्रि ने देवताओं का साथ छोड़ दिया। वह हिमालय की गुफाओं में लौट गई, जहाँ वह वर्षों तक ध्यान में लीन रही।
कहते हैं कि जब पूर्णिमा की रात आती है, तो हिमालय की वादियों में कोई महिला करुणा से भरी एक वेदना भरी आवाज़ में रोती है। लोग कहते हैं कि वह कालरात्रि की आत्मा है, जो अब भी अपने प्रेम के लिए विलाप कर रही है।
