मेरे लिए तो वह अच्छा खासा परमानेंट सर दर्द है और इस लॉक डाउन पीरियड में तो वह बाकायदा माइग्रेन साबित हो रहे हैं। 

अब यही देखिए न कि हम तो 4 हफ्ते से घर में बैठे भिन्ना रहे हैं, लेकिन वह, वह इस लाक डाउन पीरियड में भी जाने कैसे हर दूसरे-तीसरे दिन आ धमकते हैं। अब कल ही की बात ले लीजिए, हम चाय-वाय पी कर जरा अखबार उलट ही रहे थे, कि वह आ धमके और आते ही बोले,  ‘यार यह लाक डाउन वाला कांसेप्ट पहले किसी के दिमाग में क्यों नहीं आया। सच कहता हूं अगर आजादी के बाद सरकार के दिमाग में आ गया होता, तो हमारे देश की तस्वीर ही कुछ और होती।’

मैं सचमुच चक्कर में पड़ गया, ‘आजादी के बाद, मतलब, मैं समझा नहीं’ मेरा पूरा चेहरा सवालिया निशान बन गया।

‘अरे जब देश के बड़े-बड़े नेता नहीं समझ पाए तो तुम्हें क्या समझ में आएगा। खैर मैं समझाता हूं। देखो, इन 4 हफ्तों में देश कितना बदल गया है। कभी सोचा है। चोरी-चकारी, लूटमार की ऐसी तैसी हो गई। रिश्वत, काला बाजार किसी को याद ही नहीं आ रहा है। 

50-50 लाख वाली शादियां दिमाग से ही गायब हैं। प्रदूषण का भट्टा बैठ गया। ईव टीजिंग छोड़ो रेप और मर्डर के साथ-साथ एक्सीडेंट, डकैती वगैरा-वगैरा की खबरें अखबार के कोनों में भी मुश्किल से नजर आ रही हैं। चाइना की झालर से लेकर बिल्डिंग मेटेरियल की प्रशंसा में जमीन आसमान एक कर देने वाले लोग अब चाइना की दिशा से भी मुंह घुमाए बैठे हैं।

अब सोचो अगर आजादी के बाद हमारे नेता लोग 3 महीने में एक बार ज्यादा नहीं अगर एक हफ्ते के लाक डाउन को नेशनल पॉलिसी में शामिल कर लेते तो सचमुच देश में राम राज्य आ गया होता। खैर तब न सही अब सही, मेरे ख्याल से हमारे माननीय मोदी जी को इसे नेशनल पॉलिसी में शामिल कर लेना चाहिए। वैसे भी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह कोरोना तो अभी जाने वाला नहीं है, हमें इसी के साथ जीना है।

यानी यह बिल्कुल हमारी जिंदगी की सबसे अजीब घटना शादी की तरह है।  इसे यूं समझो कि शादी के बाद पहले हम बीवी को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं, फिर जल्दी ही हमारी समझ में यह सच्चाई आ जाती है, कि हम बेशक खुद को कितना भी बड़ा तीस मार खां समझते हो, लेकिन बीवी को कंट्रोल करना हमारे बूते से बाहर की बात है। फिर हम बीवी के साथ रहने की आदत डाल लेते हैं। तो अब जब कोरोना के साथ रहने की आदत हमें डाल ही लेनी है तो जैसे बीवी के मेकअप का खर्चा उठाना हमारी मजबूरी हो जाती है, वैसे ही 4-6 हफ्ते बाद कम से कम 1 हफ्ते का लाक डाउन भी हमें लागू करना ही पड़ेगा।

वैसे भी एक बात के लिए तो दूल्हा बनने को तैयार बैठे होने वाले पतियों को इस कोरोना को धन्यवाद देना ही चाहिए कि अब शादी के बाद पत्नियों का मुंह ज्यादातर बंद ही रहेगा, क्योंकि मास्क लगाना अब मजबूरी है। अच्छा चलता हूं।’ कहकर वे तो उठ कर चले गए, लेकिन मैं काफी देर तक बैठा यही सोचता रहा, कि कहीं सचमुच मिस्टर पॉजिटिव का आइडिया हमारी वर्तमान सरकार को भी समझ में आ गया तो भविष्य की तस्वीर क्या होगी।

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