मेरी इच्छा के अनुसार मेरी शादी व्यापारी घर में न करके एक सर्विस वाले माहौल में की गई। पतिदेव भी सर्विस में थे।  शादी होकर जब मैं पहुंची तो बहुत सुंदर तरीके से मेरा स्वागत हुआ। ‘जिंदगी की शुरुआत का चांद जब अपनी दस्तक देने को आया’ तो परंपरागत मुझे मेरी जिठानी जी ने कमरे में पहुंचाया। उनके हाथ में फल-मिठाई से भरी ट्रे थी। साथ-साथ ननद रानी भी एक ट्रे में चाय का थर्मस व कप लिए हमारे साथ-साथ ही कमरे में पहुंची और बोलीं, ‘भाभी आज शाम से भैया के सिर में दर्द है, आज गरमी भी तो बहुत है। भैया आएंगे तो ये गोली व चाय जरूर दे दीजिए। अभी तो दोस्तों के साथ बैठे हैं।’ जैसे ही पतिदेव आए, थोड़ी देर तो मैं भी चुप रही, पर अचानक चाय के थर्मस पर नजर गई तो तुरंत चाय कप में डाल उनकी तरफ बढ़ाते हुए बोली, ‘भैया जी चाय!’ आदतन मेरे मुंह से भैया जी निकल गया, लेकिन ये तपाक से बोले, ‘लाइए बहन जी, धन्यवाद।’ उनके इतना कहते ही मुझे अपने शब्द याद आए और… मैं शर्म से लाल हो गई। बाद में हम दोनों बहुत देर तक हंसते रहे।

दिल के डॉक्टर से शादी

पेशे से मैं एक डेंटिस्ट थी, इसलिए मम्मी-पापा की दिली ख्वाइश थी कि मेरी शादी भी एक डॉक्टर लड़के से हो। इस बीच कई रिश्ते आए, परंतु मैं मुंबई में पली-बढ़ी थी, इसलिए पिताजी मुझे किसी और शहर में देना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि मेरा जीवन साथी डॉक्टर हो और हम मिल- जुलकर मुंबई में ही अपना क्लीनिक चलाएं। लेकिन मेरी किस्मत लिखी थी, जबलपुर डेंटल एसोसिएशन के डीन डॉक्टर रमेश चंद्र शुक्ल के छोटे बेटे अजय शुक्ल के साथ, दो दिन की पारिवारिक औपचारिकताओं के साथ हमारा रिश्ता तय हो गया। मेरे भावी पति अजय जी एक बहुत बड़े हृदय विशेषज्ञ थे। मुझे मन ही मन हंसी आ रही थी कि पापा अपने लिए डेंटिस्ट जमाई तो ढूंढ नहीं सके, लेकिन मेरे लिए डेंटिस्ट ससुर जी उन्होंने जरूर ढूंढ़ दिया है। 5 मई को हमारी शादी हुई, इतनी गर्मी थी उस समय कि कुछ खाने-पीने का दिल ही नहीं कर रहा था और 6 जून को रिसेप्शन भी था, इसलिए मैं कुछ ज्यादा ही थकी-थकी और परेशान थी।

आज रात हमारी पहली मुला$कात थी, मैं सज- धज कर कमरे में अजय जी का इंतजार करने लगी लेकिन इस बीच मुझे बहुत जोर की भूख लगी, मैंने कुछ देर तक तो अजय जी के आने का इंतजार किया फिर सोचा कि दोस्तों में बैठे होंगे जनाब इतनी जल्दी नहीं आयेंगे। मैंने अपना बैग खोला और लेस चिप्स के कुछ पैकेट्स निकाले, एक लंबा घूंघट डाल कर मैं पलंग पर बैठ गई और आहिस्ता-आहिस्ता चिप्स  खाने लगी। भूख के मारे कब दो पैकेट खा लिए पता ही नहीं चला। अब तो जोर की प्यास लगी हुई थी। पानी पीने के लिए जैसे ही घूंघट उठाया तो सामने अजय जी बैठे हुए थे, हाथों में कोल्डड्रिंक्स पकड़े हुए, मुझे कोल्ड ड्रिंक्स का गिलास थमाते हुए कहने लगे डॉक्टर साहिबा चिप्स के साथ कोल्ड ड्रिंक बहुत अच्छी लगती है। मैं दिल का डॉक्टर हूं, आपके दिल का उम्र भर ख्याल रखूंगा। मैं तो शर्म से लाल हो गई।