Stress and overthinking side effects
Stress and overthinking side effects

Summary: ओवरथिंकिंग का बुरा असर

ओवरथिंकिंग धीरे-धीरे शरीर और मन को कमजोर कर बीमारियों को जन्म देती है, इसलिए समय रहते इसे रोकना जरूरी है।

Stress and Overthinking Effects: ओवरथिंकिंग एक ऐसी परेशानी है जिसे ना चाहते हुए भी हम कभी ना कभी कर ही लेते हैं। ओवरथिंकिंग कभी-कभार का होना तो ठीक है लेकिन जब यह आपकी आदत बनने लग जाए तो यह आपकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ओवरथिंकिंग का एकदम से शरीर पर असर समझ में नहीं आता बल्कि यह धीरे-धीरे स्लो पॉइजन की तरह हमें बीमार करता है। आइए इस लेख में जानते हैं ओवरथिंकिंग किस तरह हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

क्या है ओवरथिंकिंग: जब आप किसी बात या समस्या को बार-बार या लंबे समय तक सोचते हैं और उस समस्या के हर नकारात्मक पहलू को अपने दिमाग में कल्पना करने लगते हैं तो यह स्थिति ओवरथिंकिंग की है।
जैसे, मेरे साथ ऐसा हो गया तो मैं क्या करूंगा। लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे। कहीं सब समाप्त तो नहीं हो जाएगा।
जब आपका दिमाग हर समय इस तरह के सवालों में उलझा रहे तो समझ लें आप खुद को ओवरथिंकिंग की जाल में फंसा रहे हैं।

ओवरथिंकिंग क्यों कहलाता है स्लो पॉइजन: स्लो पॉइजन से अर्थ है कि आपके स्वास्थ्य को धीरे-धीरे खराब करने वाला जहर, जो एकदम से आपकी जान के लिए खतरा नहीं है लेकिन लंबे समय तक स्थिति न सुधरने पर आपके स्वास्थ्य को प्रभावित जरूर करता है।

Stress and overthinking side effects
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लंबे समय तक ओवरथिंकिंग के बने रहने से व्यक्ति के नींद, रोग प्रतिरोधक क्षमता और हार्मोनल बैलेंस पर बुरा प्रभाव पड़ता है।लगातार नकारात्मक सोचते रहने की स्थिति में आप में क्रॉनिक स्ट्रेस का खतरा बढ़ जाता है।

जब आप लगातार ओवरथिंकिंग करते हैं तो आपका दिमाग भारी, थका हुआ और भ्रमित महसूस करता है। एक ही चीज को बार-बार सोचने से आपकी याददाश्त कमजोर होती है, आप जीवन में कोई भी निर्णय लेने से पहले उसके सही होने पर शक करते हैं।

ओवरथिंकिंग से आपके शरीर में कॉर्टिसोल नमक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है जो कि लंबे समय में आपके थायराइड, शुगर पर असर डालता है।

स्त्रियों में ओवरथिंकिंग से पीसीओडी, पीरियड्स में अनियमित देखा जा सकता है।

ओवरथिंकिंग का आपका हृदय पर भी बुरा असर पड़ता है इससे आपके दिल की धड़कन तेज तथा हृदय से जुड़ी कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

अत्यधिक सोचने से आपको इनसोम्निया अर्थात नींद ना आने की परेशानी भी हो सकती है या फिर आपको गहरी नींद आने में दिक्कत होती है।

ओवरथिंकिंग हमारे शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी कम करता है। जिससे हम जल्दी-जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।

ओवरथिंकिंग हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है लगातार सोचते रहने से व्यक्ति एंजायटी और डिप्रेशन में आ सकता है तथा उसके अंदर आत्मविश्वास की भी कमी हो सकती है।

वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर खुद की दूसरों से तुलना करना फिर उसके बारे में सोचते रहना ओवरथिंकिंग के सामान्य कारण में से एक बन चुका है।

इसके अलावा पुराने असफलताओं का डर और अनुभव, बचपन में मिले नकारात्मक अनुभव या अपने भावनाओं को साझा करने की कमी आपके ओवरथिंकिंग का कारण हो सकते हैं।

ओवरथिंकिंग को कंट्रोल करने के तरीके:

हर दिन 10 से 15 मिनिट मेडिटेशन करें, ‘जो है अभी है’ वाली सोच से खुद को भरें।

अगर आपके दिमाग में लगातार कोई विचार चल रहा है तो उसे लिख दे, लिखने से दिमाग को हल्का महसूस होता है।

अपने दिनचर्या में व्यायाम और योग को शामिल करें। सोने से पहले खुद को पॉजिटिव चीजों से भरे, आपके साथ जो अच्छा हुआ उसे सोचें, उसके लिए धन्यवाद कहें।

यह छोटे-छोटे तरीके हैं जिनसे आप अपने ओवरथिंकिंग कम कर सकते हैं।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...