Overview: कैसे लुप्त होंगे केदार-बद्री धाम?
पुराणों की भविष्यवाणी के अनुसार, करीब 5500 वर्षों बाद केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम लुप्त हो जाएंगे और उनका स्थान भविष्य केदार और भविष्य बद्री धाम ले लेंगे।
Kedarnath Badrinath Dham: चारधाम यात्रा भारत के प्रमुख तीर्थों में से एक मानी जाती है, जिसमें केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का विशेष स्थान है। यह दोनों धाम उत्तराखंड की ऊँची हिमालयी पहाड़ियों पर स्थित हैं और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनते हैं।
माना जाता है कि इन तीर्थों की यात्रा करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि स्कंद पुराण में इन पवित्र स्थलों को लेकर एक रहस्यमयी और चौंकाने वाली भविष्यवाणी की गई है, कि एक समय ऐसा आएगा जब ये धाम लुप्त हो जाएंगे।
बद्रीनाथ जैसा तीर्थ न था, न होगा
स्कंद पुराण के एक श्लोक में कहा गया है –
“बहुनि सन्ति तीर्थानि दिव्य भूमि रसातले।
बद्री सदृश्य तीर्थं न भूतो न भविष्यतिः॥”
इसका अर्थ है कि त्रिलोक में बद्रीनाथ के समान कोई तीर्थ ना कभी हुआ है और ना ही भविष्य में होगा। लेकिन इसके साथ ही यह भी भविष्यवाणी की गई है कि कलयुग के पहले चरण में एक समय ऐसा आएगा जब बद्रीनाथ और केदारनाथ तीर्थ अदृश्य हो जाएंगे। और आम जनमानस के लिए इन तक पहुंच पाना असंभव हो जाएगा।
कैसे लुप्त होंगे ये पवित्र तीर्थ?
पुराणों के अनुसार, यह रहस्यमयी घटना तब घटेगी जब नर और नारायण पर्वत आपस में मिल जाएंगे। ये वही पर्वत हैं, जिनके बीच बद्रीनाथ धाम स्थित है। जब ये पर्वत एक-दूसरे में विलीन हो जाएंगे, तब बद्रीनाथ की मूर्ति इस स्थान को छोड़ देगी और मंदिर का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
भगवान नरसिंह की मूर्ति देगी पहला संकेत
भविष्यवाणी के अनुसार, बद्रीनाथ के लुप्त होने से पहले कुछ चेतावनी स्वरूप संकेत भी दिखाई देंगे। सबसे पहला संकेत जोशीमठ में स्थित भगवान नरसिंह के मंदिर में मिलेगा। यहां भगवान नरसिंह की मूर्ति के एक हाथ की उंगलियां धीरे-धीरे पतली होती जा रही हैं। मान्यता है कि जिस दिन यह हाथ पूरी तरह से टूटकर अलग हो जाएगा, उसी दिन बद्रीनाथ धाम की समाप्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
केदारनाथ के अदृश्य होने की प्रक्रिया

केदारनाथ धाम, जो भगवान शिव को समर्पित है, भी इसी भविष्यवाणी का हिस्सा है। जब बद्रीनाथ लुप्त होगा, उसी समय केदारनाथ के रास्ते भी बंद हो जाएंगे। दोनों तीर्थ के दर्शन सामान्य जनमानस के लिए असंभव हो जाएगा।
लुप्त होने के बाद कहां जाएंगे भगवान?
जब ये दिव्य स्थल अदृश्य हो जाएंगे, तब भविष्य धामों की स्थापना होगी। ये नए तीर्थस्थल श्रद्धालुओं की अगली आस्था के केंद्र बनेंगे:
भविष्य बद्री
बद्रीनाथ धाम के लुप्त होने के बाद भगवान विष्णु का वास भविष्य बद्री में माना जाएगा, जो जोशीमठ से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां विष्णु जी को नरसिंह रूप में पूजा जाएगा। यह क्षेत्र पहले से ही धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।
भविष्य केदार
इसी प्रकार जब केदारनाथ लुप्त हो जाएगा, तब भगवान शिव भविष्य केदार में पूजे जाएंगे। यह स्थान भी जोशीमठ के समीप स्थित है, जहां एक प्राचीन शिवलिंग और माता पार्वती की प्रतिमा विराजमान है। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थल पर आदि शंकराचार्य ने गहन तपस्या की थी और उन्हें दिव्य अनुभूतियाँ प्राप्त हुई थीं।
गंगा का भी होगा अंत?
केवल केदारनाथ और बद्रीनाथ ही नहीं, बल्कि गरुड़ पुराण और अन्य ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि गंगा नदी, जो भगवान शिव की जटाओं से होकर धरती पर प्रवाहित होती है, वह भी एक दिन पुनः ब्रह्मा के कमंडल में लौट जाएगी। यह घटना संसार के धार्मिक संतुलन में एक बड़ा परिवर्तन मानी जाएगी।
