Overview: त्योहारों के बाद हवा में घुला धुआं बन सकता है खतरा, अपनाएं ये ज़रूरी सावधानियां
दिवाली के बाद का मौसम सिर्फ ठंड नहीं लाता, बल्कि साथ लाता है जहरीली हवा जो हमारी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। बुजुर्ग, बच्चे और सांस से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण पर नियंत्रण सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
Rising Air Pollution After Diwali : हर साल दिवाली के बाद जैसे ही सर्दियां शुरू होती हैं, मौसम बदलने के साथ-साथ हवा में मौजूद प्रदूषण भी ज़्यादा गाढ़ा हो जाता है। ठंडी हवा और कम तापमान की वजह से हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5, PM10) ज़मीन के पास जमा हो जाते हैं। नतीजा ये होता है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ज़्यादातर दिनों में ‘पुअर’ या ‘सीवियर’ कैटेगरी में पहुंच जाता है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

इसका सबसे ज़्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है जिन्हें पहले से दिल, फेफड़े, किडनी या लिवर की बीमारी होती है। इनके लक्षण बढ़ जाते हैं, और कई बार हालत इतनी खराब हो जाती है कि अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। जिन मरीजों को अस्थमा या COPD जैसी सांस की दिक्कतें हैं, उनमें तो खासकर लक्षण काफी बिगड़ जाते हैं क्योंकि प्रदूषण से फेफड़ों में सूजन बढ़ जाती है।
AQI बढ़ने पर क्या हो सकता है असर?
जब AQI 400 से ऊपर चला जाता है तो सिर्फ बीमार लोग ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोग, छोटे बच्चे (5 साल से कम), बुज़ुर्ग और बुजुर्ग महिलाएं भी खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन, थकान और यहां तक कि न्यूमोनिया जैसी समस्याओं से जूझने लगते हैं।
प्रदूषण से बचने के आसान उपाय
ऐसे में ज़रूरी है कि जिन लोगों को क्रॉनिक बीमारी है, वो अपनी दवाइयां रेगुलर लें, डॉक्टर से सलाह लेते रहें, और जरूरत पड़ने पर दवा की खुराक एडजस्ट कराएं। बच्चों और बुज़ुर्गों को प्रदूषण के समय घर के अंदर रखना चाहिए, घर में एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल करना चाहिए, और बाहर निकलते वक्त N99 मास्क पहनना चाहिए। सुबह-सुबह वॉक करने से बचें और AQI पर नज़र रखें, थोड़ी सावधानी बहुत काम आती है।
बच्चों पर प्रदूषण का गहरा असर
दिल्ली की मौजूदा हवा बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो गई है। बच्चों की इम्यूनिटी बड़ों के मुकाबले कमज़ोर होती है, इसलिए उन्हें प्रदूषित हवा का असर जल्दी होता है। पिछले कुछ हफ्तों में हमने देखा है कि बच्चों में खांसी, घरघराहट, एलर्जिक राइनाइटिस, ब्रॉन्काइटिस और अस्थमा अटैक जैसे केस काफी बढ़ गए हैं। कई बच्चे आंखों में जलन, गले में दर्द और नींद न आने जैसी शिकायतें भी कर रहे हैं। अगर ये हवा ऐसे ही रही तो लंबे समय में बच्चों के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है, उनकी सांस लेने की क्षमता कम हो सकती है और स्कूल में ध्यान लगाने में भी मुश्किल होती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चे को ज़्यादा बाहर न जाने दें, खासकर जब AQI बहुत खराब हो। घर में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें और जब भी बच्चे बाहर जाएं तो उन्हें मास्क पहनाएं। लेकिन असली समाधान तभी होगा जब हम सब मिलकर प्रदूषण कम करने की दिशा में काम करें ताकि हर बच्चा साफ और सेहतमंद हवा में सांस ले सके।
Inputs by: डॉ. विकास मित्तल, डायरेक्टर – पल्मोनोलॉजिस्ट, सीके बिड़ला हॉस्पिटल®, दिल्ली
Inputs by: डॉ. मेधा, पीडियाट्रिशियन, माधुकर रेनबो चिल्ड्रन हॉस्पिटल
