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जंक फूड गर्भवती महिलाओं के लिए है नुकसानदेह: Junk food during pregnancy
Junk food during pregnancy

Junk food during pregnancy: भारत में शिशु मृत्यु दर का अनुमान वर्तमान में 39.1 है, जबकि देश में मातृ मृत्यु दर 130 पर है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बहुत सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि माता और शिशु दोनों की चपेट में आने के चलते जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। डॉक्टर विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए स्वस्थ खाने की सलाह देते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि गर्भावस्था के दौरान जंक फूड खाने से बच्चे में एलर्जी और अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि अत्यधिक चीनी वाले भोजन खाने से बच्चे पर असर पड़ता है।इसके अलावा जंक फूड के सेवन से अत्यधिक वजन बढ़ता है, जो आगे चलकर कई जटिलताओं का कारण बनता है जैसे- नवजात का आकार असामान्य रूप से बड़ा होगा, समय से पहले होना, गर्भकालीन मधुमेह, जन्म दोष, गर्भपात या जन्म के बाद भी शिशु पर जोखिम।

हार्मोन पर प्रभाव

जंक फूड के सेवन से भी पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) हो जाता है। जंक फूड, शर्करा युक्त भोजन और खाने का अनियमित शेड्यूल, ग्लूकोज के स्तर में उतार-चढ़ाव और हार्मोनल असंतुलन बनाता है, इससे नितंब और पेट में वसा का जमाव होता है। जंक फूड के सेवन से लड़कियों में पीसीओएस की संभावना बढ़ जाती है। पीसीओ गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का कारण बनता है। जंक फूड, हार्मोन को बाधित करने वाले कैमिकल लाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और किशोर लड़कियों को सबसे अधिक खतरा होता है। यहां तक कि प्रसव के बाद भी महिलाएं रक्तस्राव की आशंका बन सकती है, मातृ मृत्यु दर में 17.7 फीसदी के लिए यही वजह जिम्मेदार है।यदि बच्चे अस्वस्थ आहार पर पलते हैं तो शिशुओं को मानसिक विकार होने का खतरा होता है। माताओं को भी अत्यधिक सुस्ती, प्रसव के बाद सूजन जैसी समस्याएं आ सकती हैं और गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ वजन फिर से घटाने में मुश्किल होती है।स्टेटिस्टा वेबसाइट के अनुसार, 2018 तक भारत में जंक फूड की साप्ताहिक खपत 2017 के 37.19 फीसदी की तुलना में बढ़कर 38 फीसदी हो गई थी। अस्वास्थ्यकर भोजन की आदत, लोगों में जीवन शैली की बीमारियों को फैलाने के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं क्योंकि लोग ऐसा खाना पसंद करते हैं जो तुरंत मिल जाएऔर चटपटा हो, जंक फूड ऐसा ही है। फूड जैसे- फ्राइज, नगेट्स, बर्गर आदि बेहद अस्वास्थ्यकर होते हैं और लाभकारी पोषक तत्व प्रदान नहीं करते बल्कि नियमित रूप से खाए जाने पर संभावित रूप से बड़ा नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें वसा और शर्करा अधिक मात्रा में होने के कारण जंक फूड से मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे कई रोग हो जाते हैं। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतना ही प्रभावित करता है।

जंक फूड के कारण बीमारियां

जंक फूड के कारण कई अन्य बीमारियां हो सकती हैं, जैसे-

मोटापा

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obesity

वर्तमान में, लगभग 5 फीसदी भारतीय जनसंख्या मोटापे से ग्रस्त है, 2014 तक यह दर 3.7 फीसदी थी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में मोटापे की दर 10 वर्षों में दोगुनी हो गई है। जंक फूड में तेल, चीनी, वसा और कैलोरी की उच्च मात्रा से वजन अत्याधिक बढ़ता है। लोग वजन मोटे हो जाते हैं और सुस्ती, सांस की तकलीफ का अनुभव करते हैं। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो मोटापा अन्य बीमारियों का स्रोत भी बन सकता है।

उच्च रक्तचाप

 जंक फूड में लवणता का स्तर उच्च होता है, जो रक्तचाप को बढ़ाता है और अगर पहले से ही कोई हृदय रोग है तो स्थिति को और भी बद्तर करता है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल

जंक फूड में वसा के उच्च प्रतिशत के कारण, लो-डेन्सिटी वाले लिपोप्रोटीन (एलडीएल) कोलेस्ट्रॉल या खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर शरीर में बढ़ता है।

हृदय रोग

उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप के कारण मानव शरीर में हृदय रोगों की संभावना बढ़ जाती है। जो लोग जंक फूड का सेवन करते हैं उन्हें दिल का दौरा या स्ट्रोक होने का अधिक खतरा होता है। द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 28.1 फीसदी मौतों के पीछे हृदय रोग और स्ट्रोक प्रमुख कारण हैं, जो 21 लाख से अधिक हैं।

डायबिटीज

जंक फूड कार्बोहाइड्रेट से भरा होता है, जो इंसुलिन स्पाइक को बढ़ाता है। इसके चलते शरीर की प्राकृतिक इंसुलिन प्रतिक्रिया बाधित हो जाती है। 7.1 फीसदी से अधिक भारतीय वयस्क मधुमेह से पीडि़त हैं यानी 6.2 करोड़ से अधिक लोग।

डिप्रेशन

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depression

जंक और प्रोसेस्ड फूड में शर्करा और वसा का स्तर ज्यादा होता है, जिससे मस्तिष्क में रासायनिक प्रतिक्रिया होती है और यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है। यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक जंक फूड का सेवन कर रहा है तो शरीर महत्वपूर्ण पोषक तत्वों और अमीनो एसिड खोना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे मस्तिष्क तनाव से निपटने में असमर्थ हो जाता है और अवसाद विकसित हो जाता है। भारत में आत्महत्या की दर प्रति लाख लोगों के लिए 10.9 बताई गई। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, कम से कम 6.5 फीसदी भारतीय आबादी मानसिक विकारों से ग्रस्त है।

मेमोरी लॉस

अध्ययनों में यह पाया गया है कि अधिक वसा और चीनी वाले भोजन खाने से मस्तिष्क कमजोर होता है। जंक फूड से मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस में अचानक सूजन आ जाती है, जो स्मृति और धारणा के लिए जिम्मेदार है। 

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