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गर्भावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें गर्भवती महिला को  हर दिन, हर पल एक नया अनुभव होता है। इस समय कई दिक्कतें आती हैं और मन हमेशा कुछ शंकाओ से घिरा होता है, इसलिए बहुत जरूरी है कि अपने व डॉक्टर के बीच पारदर्शिता बनाए रखें और खुलकर बात करें, जिससे आपको कोई दिक्कत ना हो।

  • डॉक्टर से सिर्फ सच कहें, सच के सिवा कुछ नहीं। उन्हें अपना पूरा चिकित्सकीय इतिहास बेझिझक बताएं।अपने खान-पान की अस्वस्थ व गलत आदतों के बारे में बताना न भूलें। किसी भी तरह की दवाएं (हर्बल, वैद्य, अवैद्य)तंबाकू, एल्कोहल वगैरह लेती हों तो,उस बारे में बताएं। आपकी कोई सर्जरी हुई हो तो उस बारे में बताएं। याद रखें कि आप जो भी बताएंगी, डॉक्टर उसे पूरी तरह गोपनीय रखेंगे।
  • घर में फ्रिज पर, टी.वी. पर, पर्स में,काम की मेज़ पर या दरवाजे के पास राईटिंग पैड रखें, ताकि आपको डॉक्टर से पूछने के लिए जो भी सवाल याद आए, उसे वहां लिख कर रख दें क्योंकि अक्सर डॉक्टर से मिलने के बाद कई जरूरी बातें पूछना याद ही नहीं रहता।इसी तरह डॉक्टर से हुई हर भेंट और बातचीत का रिकॉर्ड रखें क्योंकि वहां से आने के कुछ दिन बाद ही आपको उनकी सलाह भूल जाएगी। अगर डॉक्टर किसी बात या दवा के बारे में पूरा खुलासा न दे रहे हों तो आप स्वयं ऐसी बातें पूछें। उसी समय उनकी बातें रफ में नोट कर लें और उन्हें घर जाकर साफ-साफ लिख लें, ताकि आप कोई भी जरूरी बात भूलें नहीं!
  • किसी लक्षण से घबरा गई हैं या किसी बात का शक हो तो डॉक्टर को उसी समय फोन करें। हो सकता है कि कोई दवा माफिक न आ रही हो। बेकार बैठकर चिंता न करें। डॉक्टर से फोन पर बात करें। समस्या ज्यादा गंभीर न हो तो ई-मेल भी कर सकती हैं। अगर कोई बात सचमुच परेशान कर रही हो तो उसे पूछने में हर्ज नहीं है, चाहे वे बातें मूर्खता भरी ही क्यों न लगें, आपकी परेशानी मिटनी ही चाहिए। डॉक्टर और दाई अच्छी तरह जानते हैं कि अगर कोई स्त्री पहली बार मां बन रही है तो उसके पास कई सवाल होंगे, जब भी फोन या ई-मेल करें तो स्पष्ट रूप से लक्षण बताएं।
  • अगर कहीं दर्द हो रहा हो तो दर्द की जगह, स्थान व समय बताएं? यह बताएं कि दर्द तेज है या हल्का। बर्दाश्त हो रहा है या नहीं? हो सके तो यह भी बताएं कि कोई पोजीशन बदलने से थोड़ा आराम आया या नहीं। यदि योनि से कोई स्राव हो रहा हो तो उसका रंग बताएं। गाढ़ा लाल, गहरा लाल,भूरा, गुलाबी या हल्का पीला। यह कब शुरू हुआ और कम है या ज्यादा। इसके साथ ही बुखार, मिचली, उल्टी, ठंड या दस्त जैसे लक्षण हों, तो वे भी बताएं।
  •  पूरी तरह से अपडेट रहें, यानी पेरेंटिग पर आने वाली पत्रिकाएं व वेबसाइट देखती रहें। हालांकि आपको हर बात पर पूरा भरोसा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि मीडिया में की गई रिपोर्ट,चिकित्सा रूप से प्रमाणित भी हों, यह जरूरी नहीं है। जब कुछ नया पढ़ें या सुनें तो उसे आजमाने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें क्योंकि बेशक आपकी जानकारी का सबसे बेहतर स्रोत तो वहीं हैं।
  • अगर कोई ऐसी बात पता चले जो आपके डॉक्टर ने नहीं बताई तो उसे अपने तक ही न रखें। चुनौती वाले अंदाज में नहीं, सामान्य रूप से पूछें ताकि उस तथ्य की पुष्टि हो सके। 
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डॉक्टर से कुछ ना छुपाएं, सब कुछ बताएं 3

  • अगर डॉक्टर गलती से किसी बात की हामी भर रहे हों या गलतफहमी में कुछ कह दें (जैसे- किसी मेडिकल हिस्ट्री के बावजूद इंटरकोर्स की इजाजत) तो उन्हें याद दिलाएं कि आपको पहले क्या परेशानी हो चुकी है क्योंकि यह जरूरी नहीं कि उन्हें आपकी मेडिकल हिस्ट्री की एक-एक बात याद ही होगी। आप भी तो अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेवार हैं, इसलिए ध्यान दें कि ऐसी कोई गलती न हो सके ।
  • उनसे हर बात का खुलासा मांगें । पता लगाएं कि आप जो दवा ले रही हैं, उससे कोई दूसरा प्रभाव तो नहीं हो सकता । या जो टेस्ट बताए गए हैं, उसमें क्या खतरा हो सकता है या उसके नतीजे कब तक मिलेंगे ।
  • यदि डॉक्टर अपनी मुलाकात के दौरान सभी सवालों के जवाब न दे सकें तो उनकी एक सूची बना लें । उनसे पूछें कि क्या अगली बार मुलाकात का लंबा समय दे पाएंगे या फिर फोन व ई-मेल के माध्यम से बात की जा सकती है । 
  • डॉक्टर के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें जैसे वजन, आराम, दवाएं, विटामिन, व्यायाम आदि । अगर इनमें से किसी भी निर्देश का पालन करने में कोई समस्या हो तो डॉक्टर से उसका विकल्प पूछें ।
  • याद रखें कि आपको अपनी देखभाल स्वयं करनी है इसलिए सभी निर्देशों का ध्यान रखें । खान-पान की गलत आदतें छोड़ दें क्योंकि एक स्वस्थ शिशु को जन्म देना आपका ही उत्तरदायित्व है । 
  • कई बीमा कंपनियां विवाद की स्थिति में डॉक्टर व मरीज के बीच मध्यस्थ बनती हैं । अगर आपको डॉक्टर से कोई समस्या हो तो स्वास्थ्य संगठन से मदद लें।अगर आपको लगे कि आपने सही डॉक्टर या दाई का चुनाव नहीं किया या आपके शिशु का जन्म उनके हाथों में सुरक्षित नहीं है तो डॉक्टर बदलने में देर न करें ।

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