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पीसीओडी और पीसीओएस के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं भी होने लगती हैं। ये दोनों ही एक प्रकार के हार्मोनल डिसऑर्डर हैं। इसके कारण गर्भधारण में परेशानी, गर्भपात, वजन बढ़ना, डिप्रेशन, टेंशन और टाइप 2 डायबिटीज जैसी परेशानियां होने लगती हैं।
Ayurved Remedy for PCOD-PCOS: आज के समय में बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल, अनियमित दिनचर्या और खराब खानपान के कारण महिलाएं और युवतियां कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैैं। इन्हीं में से बहुत ही आम परेशानियां हैं पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज (पीसीओडी) और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस)। चिंता की बात यह है कि कम उम्र की युवतियों को भी ये दोनों ही समस्याएं होने लगती हैं।
होने लगती हैं ये समस्याएं

पीसीओडी और पीसीओएस के कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं भी होने लगती हैं। ये दोनों ही एक प्रकार के हार्मोनल डिसऑर्डर हैं। इसके कारण गर्भधारण में परेशानी, गर्भपात, वजन बढ़ना, डिप्रेशन, टेंशन और टाइप 2 डायबिटीज जैसी परेशानियां होने लगती हैं। इसके कारण पीरियड्स भी अनियमित होने लगते हैं। कई बार पीरियड 2 से 6 महीने तक देरी से आने लगते हैं। इस दौरान या तो रक्तस्त्राव बहुत कम होता है तो फिर बहुत ज्यादा। अधिकांश महिलाएं इस परेशानी को दूर करने के लिए गोलियां लेती हैं। हालांकि ये गोलियां आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में आप आयुर्वेदिक उपचार अपना सकती हैं। हाल ही में आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दीक्सा भावसार सावलिया ने इसे लेकर इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है।
आयुर्वेद में है रामबाण इलाज
आयुर्वेदिक उपचार आपके पीरियड्स को न सिर्फ रेगुलर करेगा, बल्कि यह आपके वजन को भी कंट्रोल करता है। इससे मूड स्विंग, डिप्रेशन, अनिद्रा जैसी परेशानियां भी दूर हो सकती हैं। तिल, अलसी और मेथी का आयुर्वेदिक मिश्रण आपके पीरियड्स को समय पर लाने में मदद कर सकता है। इससे आपको ओव्यूलेशन में भी मदद मिलेगी। साथ ही गर्भधारण की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। यह चमत्कारी मिश्रण एंडोमेट्रियम की मोटाई को नॉर्मल करता है। और सबसे बड़ा फायदा ये है कि यह पीरियड्स को रेगुलर करता है।
इंसुलिन सेंसिटिविटी सही करेगा तिल
तिल को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण माना गया है। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है। तिल जिंक से भरपूर होते हैं जो प्रोजेस्टेरोन लेवल को बेहतर बना सकता है। इसकी प्रकृति गर्म होती है। इससे पीरियड्स समय पर आने में मदद मिलती है। साथ ही पीरियड्स के दर्द से भी आराम मिलता है।
रक्त प्रवाह को बेहतर करती है मेथी
मेथी दाने सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। ये गुणकारी दाने फाइटोएस्ट्रोजेन से भरपूर होते हैं, जिससे एस्ट्रोजन लेवल बेहतर होने में मदद मिलती है। मेथी दाने एंडोमेट्रियम की मोटाई को भी नॉर्मल करते हैं। जिससे पीरियड्स के दौरान रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इससे इंसुलिन स्पाइक्स को कम करने में मदद मिलती है। मेथी दाने के नियमित सेवन से वजन भी कम होता है।
बहुत असरदार है अलसी
अलसी के बीज बहुत ही हेल्दी होते हैं। ये एंड्रोजन के स्तर को कंट्रोल करते हैं। इससे पीरियड्स समय पर आने में मदद मिलती है। साथ ही वजन भी कम होता है।
12 सप्ताह में दिखेगा असर
डॉ. सावलिया के अनुसार तिल, अलसी और मेथी के मिश्रण से आपको 12 सप्ताह में ही असर नजर आने लगेगा। तिल और अलसी के बीजों को रोस्ट करें। तीनों को बराबर मात्रा में मिलाएं। इस मिश्रण का रोजाना सेवन करना चाहिए। पीरियड्स के दूसरे दिन से लेकर आखिरी दिन तक हर महीने मिश्रण को लेना बंद कर सकते हैं। जब पीरियड्स खत्म हो जाएं तो इसका फिर से सेवन करना शुरू कर दें। आपको प्रतिदिन इस मिश्रण का 3 से 4 ग्राम या एक टीस्पून का सेवन करना चाहिए। इससे आपका हार्मोनल बैलेंस ठीक होने लगेगा।
