Oil for Cholesterol: आजकल की लाइफ स्टाइल ही ऐसी हो गई है कि लोग ज्यादा कैलोस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे हैं। आपने अक्सर सुना होगा कि लोग कैलोस्ट्रॉल ज्यादा होने की वजह से कम तेल और मिर्च मसाले का खाना शुरु कर देते हैं। कैलोस्ट्रॉल का ज्यादा होना दिल के लिए नुकसानदेह है। जाहिर है कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा होने पर सतर्क रहने की जरुरत है।
लेकिन आप यह भी जान लें कि कैलोस्ट्रॉल ज्यादा होने की स्थिति में कौन-से तेल का और क्यों इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ऑयल्स के बारे में हम आपको जानकारी देंगे जिनका इस्तेमाल करने से बैड कैलोस्ट्राल स्तर कम होगा। इनका इस्तेमाल करने से कैलोस्ट्रॉल का लेवल भी बना रहेगा और ब्लड क्लॉटिंग, स्ट्रॉक और हार्ट अटैक का खतरा भी नहीं होगा। वैसे भी खाने में तेल का चुनाव करना अहम है। आखिर यह सेहत की बात है।
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Oil for Cholesterol: कैनोला ऑयल

वे लोग जो कम ऑइल खाना पसंद करते हैं उनके बीच में कैनोला ऑइल काफी लोकप्रिय है। यह तेल उसी फैमिली के प्लांट से निकाला जाता है जिससे सरसों और रेपसीड के पौधे ताल्लुक रखते हैं। इसे ब्रसिकेसी फैमिली कहते हैं। इस ऑइल का इस्तेमाल करने से हार्ट हेल्दी रहता है। इसकी वजह है कि इस ऑइल में सैचुरेटेड फैट कम और मोनोसैचुरेटेड फैट ज्यादा होते हैं। सैचुरेटेड फैट से ब्लड का कलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ता है वहीं मोनो और पॉलीसैचुरेटेड फैट दिल की बीमारी के खतरे को कम करते हैं। इस फैट के अलावा इसमें विटमिन ई, के ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स और एंटीऑक्सिडेंट्स भी पाए जाते हैं। इसका रेगुलर इस्तेमाल करने से कलेस्ट्रॉल लेवल धीरे-धीरे कम होने लगता है। चूंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं ऐसे में आपकी एनर्जी बनी रहती है और आप खुद को थका हुआ महसूस नहीं करते।
लेमन ग्रास ऑयल

लेमनग्रास ऑयल विटामिन ए, सी, फोलेट, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, जिंक, कॉपर, आयरन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और कैल्शियम से भरपूर है। सरसों के तेल को छोड़ दिया जाए तो अक्सर ऑयल्स में बहुत खुशबू नहीं होती लेकिन इसमें कुछ खट्टी सी नींबू जैसी खुशबू होती है। आजकल इस तेल का चलन घर में खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाने लगा है। इसके इस्तेमाल से आपको एंजइटी की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। इसमें सिट्रल नाम का एक कंपाउड है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट है जो कि बैड कलॉस्ट्रॉल एलडीएल को कम करने में मदद करता है। इस ऑयल को आप हर्बल टी के तौर पर भी शामिल कर सकते हैं। एक गिलास गर्म पानी में इसकी दो बूंदें डालकर पीएं। आप देखेंगे कि कुछ ही दिनों में आपका कलेस्ट्रॉल कितना कम हो जाएगा।
ऑलिव ऑयल

ऑलिव हमारे दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। अगर आपको ऑयली सब्जी खानी पसंद है तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ऑयल सरसों के तेल की तरह ग्रीसी होता है ऐसे में कम तेल में भी आपको एक चिकनाहट नजर आएगी। ऑलिव ऑयल में गुड कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। नियमित रूप से इसक सेवन करने से अप हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी खूबियां भी भरपूर मात्रा में हैं जो हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली सूजन की समस्या में भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इस चीज का ध्यान रखें कि आप ऑलिव ऑयल को ऊपर से डालें। इसे तेज आंच पर पकाने से इसकी खूबियां खत्म हो जाती हैं। इसे आप सलाद के ऊपर डालकर खाएं। यह आपके सलाद के जायके को बढ़ा देगा।
पीनट ऑयल

सरसों के तेल की तरह ही मूंगफली का तेल हमारी भारतीय रसोई में इस्तेमाल होता है। इसका नियमित इस्तेमाल करने से हार्ट हेल्दी रहता है और ब्लॉकेट की समस्या का समाधान होता है। इसका सेवन करने से एचडीएल यानी गुड कलॉस्ट्राल की मात्रा बढ़ती है। इसे खाने से आर्टरीज के ब्लॉक होने का रिस्क भी कम हो जाता है। इसे आप फ्राइंग के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि यह गर्म होने के बाद ट्रांसफैट में नहीं बदलता। इस ऑयल में हाई मोनोसैचुरेटेड होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं देते।
सनफ्लावर ऑयल

इस ऑयल में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसेचुरेटेड फैट होता है। बरसों से यह ऑयल हमारे किचन का हिस्सा है। विशेषकर उन घरों में जहां होई हार्ट पेशेंट होता है। यह ऑयल दिल की सेहत को दुरुस्त करने में बहुत फायदेमंद है। इसका सेवन करने से गुड कलॉस्ट्रॉल रेशो और एनर्जी बनी रहती है। इस ऑयल में लेसिथिन भी होता है जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। नेशनल सेंटर फॉर इंफॉर्मेंशन के अनुसार इसमें ओलिक एसिड पाया जाता है। जिससे कि हार्ट डिजीज होने की गुंजाईश कम होती है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई भी पाया जाता है जो एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है। इससे हार्ट डिजीज होने की गुंजाईश कम होती है।
