हर इंसान अपनी जिंदगी का एक तिहाई हिस्सा सोते हुए बिताता है। नींद व्यक्ति के शरीर को पूरे दिन की थकान से निजात दिलाकर शरीर को अगले दिन के लिए तैयार करती है। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद मानव की स्वस्थ जीवनशैली के लिए बेहद ज़रूरी है। सोने की सही मुद्रा इसलिए भी जरूरी होती है ताकि सोते वक्त सही मात्रा में ऑक्सीजन व्यक्ति को मिल सके। यदि सोते वक्त सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलेगी तो इसका स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होगा और अगले दिन व्यक्ति को बदन दर्द, सिर दर्द, सांस लेने में तकलीफ और थकान से जूझना पड़ेगा।

सोते वक्त व्यक्ति के शरीर को पर्याप्त आराम मिलना चाहिए ताकि दिन भर के तनाव से मुक्ति मिल सके कहीं ऐसा न हो कि रात भर तकिये से सिर को दबाना पड़े या किसी परेशानी के कारण आप पूरी रात करवटें बदलते रहें।

अच्छी नींद और अच्छे स्वास्थ्य के लिए सोने की सही मुद्रा कैसी हो, जानिए जीपी अस्पताल में वरिष्ठ फिज़ियोथिरेपिस्ट डॉ. आर.एन. रमेश से।

पीठ के बल और पैर बिलकुल सीधे रखकर लेटना सोने की सबसे कॉमन मुद्रा है। इसमें कठोर गद्दे और तकिए शरीर को प्राकृतिक रूप से बने रहने में मदद करते हैं। सिर और गर्दन के नीच रखा तकिया गर्दन को सहारा देकर इसके आकार को सही बनाए रखता है। एक आदर्श तकिए को आपकी गर्दन और बिस्तर के बीच का खाली स्थान भरने में सहायता करनी चाहिेए ताकि आपके कान, कंधे और हिप्स एक सीध में रहें। अगर आप तकिए के बिना सोना पसंद करते हैं तो एक तौलिये को रोल करके अपनी गर्दन के नीचे लगाएं। सबसे अच्छी स्थित तो यह होगी कि आपका सिर, गर्दन और धड़ एक ही सीध में रहें। हालांकि जिन लोगों का पेट कुछ बढ़ा हुआ होता है, वे इस मुद्रा में आरामदेह महसूस नहीं करते क्योंकि पेट के वजन की वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।

और ऐसे लोग जिनके पैरों में फ्लूड रिटेंशन की वजह से सूजन रहती है, को तकिए की मदद से अपने पैरों को कुछ ऊचाई पर रखना चाहिए ताकि उन्हें सांस लेने में तकलीफ न हो। इसी तरह घुटने और पीठ दर्द की शिकायत वाले बुजुर्गों को अपने घुटनों के नीचे एक पतला सा तकिया रखना चाहिेए।

करवट लेकर सोना

एक आदर्श ऊंचाई का तकिया लें ताकि आपकी गर्दन और बिस्तर के बीच का खाली स्थान भर सके। इससे गर्दन पर पड़ने वाला तनाव नहीं होगा, खासतौर पर करवट लेकर सोते वक्त। इसके साथ ही मुड़े हुए घुटनों के बीच भी एक तकिया लगाएं ताकि नीचे वाले पैर पर ज्यादा ज़ोर न पड़े।

धूम्रपान करने वाले और सांस की तकलीफ वाले लोगों के लिए करवट लेकर सोना आरामदेह होता है क्योंकि इससे सांस लेने में आसानी होती है। खर्राटे लेने वालों को भी इसी तरह सोने की सलाह दी जाती है।

उल्टे होकर सोना

उल्टे होकर सोने की सलाह बहुत कम दी जाती है क्योंकि ऐसे में सोते वक्त गर्दन पर ज्यादा तनाव पड़ता है और अक्सर सोने के बाद गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत की जाती है। इसलिए ऐसे लोगों को जिन्हें पहले से ही गर्दन और पीठ दर्द की शिकायत है, पेट के बल न सोने की सलाह दी जाती है।

अगर आप भी अपने पेट के बल सोते हैं तो या तो तकिया न लगाएं या सिर्फ गर्दन के नीचे एक पतला सा तकिया लगाएं। इस मुद्रा में एक तकिया अपने पेट के नीचे लगाने से आपके शरीर के घुमाव को सही रूप मिलता है और आपकी पीठ भी अपना सही आकार लेती है।

30 डिग्री का कोण

यह मुद्रा उन रोगियों के लिए बताई जाती है जो कुछ ही समय पहले सर्जरी से गुज़रे हैं या दिल और सांस की तकलीफ झेल रहे हैं। इस मुद्रा को सनबेड पोजीशन कहा जाता है और इससे सोते वक्त अच्छी ऑक्सीजन मिलती है। इसमें सोते वक्त अपने शरीर से 30 डिग्री का कोण बनाने के लिए दो या तीन तकियों की ज़रूरत होती है।

अस्थमा, एप्नोसिया, पेट की गड़बड़ी, ऑस्टियोपोरोसिस के मरीज़ और बुज़ुर्गों को इस मुद्रा में सोने से आराम मिलता है क्योंकि इसमें पीठ दर्द से राहत मिलती है और सांस लेने में आसानी होती है। इसके अलावा अगर सीने में कफ है तो यह मुद्रा उसे सांस के रास्ते में आने से रोकती है ताकि लंबे समय तक आरामदेह नींद ली जा सके।

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