अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नगर की प्रख्यात महिला संगीत अकादमी ने महिला सशक्तिकरण विषय पर नगर की विभिन्न महिला संगठनों की प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया।
Author Archives: Suraj Tiwari
ये हैं शाकाहारी प्रोटीन स्रोत
प्रोटीन्स हमारे शरीर के वो पोषक तत्व है जिसकी हमारे शरीर को बेहद जरुरी होता है। ये शरीर को उर्जा देते हैं। हर शरीर को अलग-अलग आवश्यकता होती है। कुछ लोगों का मानना है कि शाकाहारी लोगों के लिए पूर्ण प्रोटीन प्राप्त करना मुश्किल होता है। लेकिन ऐसा सिर्फ भ्रम है।शाकाहारी लोगों के पास हैं प्रोटीन के स्रोत।
नासमझ – गृहलक्ष्मी लघुकथा
डॉ. के क्लीनिक में बहुत भीड़ थी। अचानक सिस्टर ने देखा एक वृद्ध व्यक्ति कांप भी रहा है और हाँफ भी रहा है। वह उसे पहले डॉ. के पास ले गई। डॉ. ने उसकी जांच की तो पाया रोगी का रक्तचाप 300 के आस-पास है। डॉ. बहुत चकित हुआ और उसने उसके साथ आए बेटे से पूछा ‘पिछली बार कब आपने इनके रक्तचाप की जांच कराई थी।’
चश्मे – गृहलक्ष्मी कहानियां
बरामदे के दरवाजे के आखिरी ताले को झटका देकर जब मिसेज वर्मा आश्वस्त हुई, तो भीतर ड्राइंग-रूम की घड़ी ने साढ़े ग्यारह बजे का एक घंटा बजाया। बीच में रखी हुई ड्रेसिंग टेबल से उन्होंने दूध का गिलास उठाया तो काली-सी परछाई शीशे में उस समय तक दिखाई देती रही, जब तक वे बरामदे की आखिरी सीढी उतरीं।
प्रेम-प्यार- गृहलक्ष्मी लघुकथा
सर्दियों की अलशाम दो जोड़े पाँव समुद्र किनारे रेत पर दौड़े जा रहे थे। लड़की आगे थी और पीछे भाग रहा लड़का उसे पकड़ने का प्रयास कर रहा था।
7 ऐसे योग आसन जो आपकी फर्टिलिटी को बढ़ाएंगे
आजकल हम सभी की लाइफस्टाइल बहुत खराब होती जा रही है, जिस कारण हम सबको बहुत सी स्वास्थ्य समस्याएं सहनी पड़ती हैं, जिनमें से एक है- बांझपन या इनफर्टिलिटी। अगर आप फर्टिलिटी बढ़ानी चाहती हैं तो जरूर ट्राई करिए ये योगासन।
वापसी – गृहलक्ष्मी की कहानियां
रात के 10:00 बज चुके थे ।सड़क छोड़कर रमेश धीरे धीरे पुल की तरफ बढ़ रहा था। सामने पुल नजर आ रहा था। रमेश ने एक बार जी भर कर उस सड़क को देखा, कितनी यादें जुड़ी हैं इस सड़क के साथ। इस सड़क के इस पार कुछ ही दूर पर तो उसका घर था और दूसरी ओर स्कूल ।हालांकि स्कूल भी थोड़ा दूर ही था, लेकिन उस की बिल्डिंग इतनी बड़ी थी, कि दूर से ही नजर आती थी।
स्लो प्वाईजन – गृहलक्ष्मी लघुकथा
अस्सी वर्षीय शन्नो देवी चुपचाप अपने कमरे में लेटी लगातार छत पर लगे पंखे को घूर रही है। उसके अंदर, बाहर सब ओर एक सन्नाटा है। कहने को उसके साथ बेटे, बहू, पोते पोतियों का भरा पूरा परिवार है। पति की मृत्यु के पश्चात और अस्वस्थता के कारण उसका बाहर आना-जाना और सखी सहेलियों से मिलना सब बंद हो गया है।
वाह – गृहलक्ष्मी लघुकथा
एक विक्षिप्त वृद्ध तीन दिनों से गायब। दुनियादारी की बेमिसाल तस्वीर अपनी पत्नी की आज्ञा बेटे ने मान ली। थाने में रपट तक नहीं लिखाई। चौथे दिन घर के निकट चौराहे पर वे अचानक मिल गए।
गड्ढे – गृहलक्ष्मी लघुकथा
‘क्यों बे! बाप का माल समझ कर मिला रहा है क्या?’ गिट्टी में डामर मिलाने वाले लड़के के गाल पर थप्पड़ मारते हुए ठेकेदार चीखा।
